दिल्ली की लड़ाई में अन्ना का चेहरा
मनीषा प्रियम अन्ना ने ठीक वैसे ही मुख्यधारा की राजनीति से परहेज किया, जिस तरह कभी जयप्रकाश नारायण ने किया था। जेपी की तरह ही वह राजनीति पर सवाल तो खड़े करते रहे हैं, पर सत्ता की गद्दी से दूर हैं। बेशक यह सच है कि वह राजनीतिक दलों से बात करते हैं और कई राजनीतिक नेता उनसे संपर्क में हैं, पर वह राजनीति...
