जाबांज सैनिकों के लिए सोचना होगा
संजय मेहता- परिवार से दूर। बच्चों से दूर । पत्नी से दूर । मां से दूर । हर वक्त मौत के साए में जिंदगी गुजारते हमारे सैनिक । शहीद हो गए। शहीदी के बाद। फूल , माला , निंदा , वायदे । संवेदना के कुछ शब्द। बहूत कुछ। फिर वही बात। सब बक्से में बंद। उनको भूला देना। हम आजादी का आनंद लेते हैं। हम क्या करते हैं...
