दिल्ली के हिंदी अखबारों में पढ़ने लायक कुछ नहीं होता
नदीम एस.अख्तर- वाक़ई में, दिल्ली के हिंदी अखबारों में पढ़ने लायक कुछ नहीं होता। रूटीन की खबरें और एजेंसी की कॉपी। हो गई इतिश्री। पाठकों के लिए ना कोई दिशा ना कोई विचारोत्तोजक लेख और ना ही कोई खोजपूर्ण रपट। सिर्फ क्लर्की हो रही है। अखबारों के ऑनलाइन संस्करण का तो और पतन है। लाइफस्टाइल की खबरों के नाम प...
