न्यूज इंडिया के साथ एंकर निदा अहमद की नयी पारी – Anchor Nida Ahmed with News India
Media News in Hindi : टीवी टुडे ग्रुप, ज़ी ग्रुप और आईटीवी नेटवर्क के तमाम बड़े चैनलों में अपनी धाक जमाने के बाद निदा अहमद अब फिल्म सिटी नोएडा से लॉन्च होने जा रहे चैनल न्यूज इंडिया से नई पारी शुरू कर रही हैं। बतौर न्यूज़ एंकर निदा अहमद इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान रखती हैं, बिना लाग-लपेट के वो अपनी बात कहतीं हैं। ख़बरों से निदा का सीधा नाता रखने में यकीन है। न्यूज़ इंडिया ने स्क्रीन पर जो कुछ शानदार और जानदार चेहरे जोड़े हैं, उनमें एक नाम निदा अहमद का भी है। अभी कई और चेहरों से पर्दा हटना बाकी है।
एंकर निदा अहमद का प्रोफेशनल कॅरियर – Anchor Nida Ahmed’s Professional Career in Hindi
निदा अहमद ने अभी हाल ही में इंडिया न्यूज़ को अलविदा कहा है। निदा नेशनल न्यूज़ चैनल ‘न्यूज़ इंडिया’ ( NEWS INDIA ) में सीनियर प्रोड्यूसर कम एंकर की भूमिका में नज़र आएंगी। इससे पहले निदा अहमद ‘तेज’, ‘जी यूपी-उत्तराखंड’, ईटीवी, नेटर्वक-18 में भी काम कर चुकी हैं। निदा अहमद ने ‘समाचार प्लस’ में बतौर एंकर करीब दो साल काम किया। निदा अहमद ने अपने करियर की शुरुआत क्राइम रिपोर्टर के रूप में की। समय के साथ निदा ने मीडिया जगत की बारीकियां सीखीं, बतौर एंकर खुद को पहचान दिलाई।
उत्तरप्रदेश के संभल ज़िले से नाता रखने वाली निदा अहमद के सामने जिंदगी में कई चुनौतियां आईं, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। निदा को Youth ICON Award 2017, हिंदुस्तान की बेटियां सम्मान 2018, ASIA AWARD 2019, NATIONAL WOMEN ACHIEVER AWARD 2019, WOMAN OF SUBSTAINCE AWARD 2020, AIAC EXCELLENCE AWARD 2021 अवॉर्ड से नवाजा जा चुकी है।
कंधार से आजतक के संवाददाता सिदीकुल्लाह खान लाइव हैं. उनके चारों तरफ हथियार से लैस लोग नज़र आते हैं जिनके बारे में वो बताते हैं कि ये तालिबानी हैं. वो नोएडा फिल्म सिटी की स्टूडियो में बैठी एंकर अंजना ओम कश्यप से बात करते हुए दो बातें बार-बार दोहराते हैं- यहां लोग बहुत घबराए और डरे हुए हैं और दूसरा कि ये लोग हमें भी कह रहे हैं कि ये वीडियो बनाना बंद करो.
सिदी जब एंकर अंजना ओम कश्यप से बात कर रहे होते हैं तो उनके चेहरे पर भी थकान, उदासी, घबराहट और बेचैनी बहुत साफ झलक रही होती है. हम दर्शक एक नज़र में समझ जाते हैं कि वो कितनी जोख़िम उठाकर वहां से अपना काम कर रहे हैं और ऐसा करने के लिए उन्हें कितनी मशक़्कत करनी पड़ रही होगी. उनकी आवाज़ में उदासी टूटन है जो बिना किसी के पक्ष में बात करते हुए हालात देखकर होती चली गयी है. मुझे नहीं पता कि वो इस कवरेज के पीछे अपनी कितनी रात की नींद और दिन का सुकून दांव पर लगा गए हों. लेकिन स्टूडियो में बैठी एंकर अंजना ओम कश्यप उनसे ऐसे-ऐसे सवाल और इस अंदाज़ में कर रही होती हैं कि जैसे संवाददाता होटल अशोका के सामने किसी मैंगो फेस्टिवल कवर करने के लिए खड़ा हो. उन्हें इस बात का रत्तीभर भी एहसास नहीं है कि जहां वो खड़े होकर लाइव कर रहे हैं, दो मिनट की चूक से उनकी जान पर बन आती है. इस बात की सेंस नहीं है कि चैनल ने इतने पैसे लगाकर अपने संवाददाता को ग्राउंड पर भेजा है तो उनकी बात प्रमुखता से आनी चाहिए. वो आगे पता नहीं कब इस तरह लाइव करने की स्थिति में हो तो पहले उन्हें अपनी तरफ से बोलने का भरपूर मौक़ा दें.
जब मैं इस पूरे मंज़र से गुज़रा तो दो-तीन बातें एकदम स्पष्ट हो गयी- एक तो ये कि एंकर अंजना ओम कश्यप ने अपने संवाददाता से सवाल करने से पहले कोई विशेष तैयारी नहीं की और न ही जोख़िम के साथ रिपोर्टिंग कर रहे अपने इस संवाददाता की स्थिति से वाक़िफ है. लेकिन उससे भी ख़तरनाक और अफ़सोसनाक बात ये कि जब एंकर के भीतर स्टारडम आ जाता है तो कैसे अपने ही सहकर्मी और संस्थान के संसाधनों का बेहतर उपयोग करने की क्षमता खो देते है.
सिदी जिस माहौल में कंधार की सड़कों पर खड़े होकर लगातार बोलते रहे, वो पूरा दृश्य ही अपने आप में बेहद डरावना है. उसी में हथियारों से लैस तालिबानी एकदम से उनके नज़दीक आ जाते और फ्रेम में घुस जाते. सिदी ने तो सहज होने के क्रम में इस दौरान एक के हथियार पर हाथ भी फेरे और कहा भी कि देखिए कैसे चारों तरफ हथियारबंद लोग हैं. अंजना ओम कश्यप ने औपचारिकतावश दो-तीन बार कहा तो ज़रूर कि सिदी आप अपना पूरा ध्यान रखें लेकिन जिस इत्मिनान से और जिस चलताऊ ढंग से अपने संवाददाता से सवाल करती रहीं, हम साफ़ महसूस कर सके कि इतने गंभीर विषय पर इनका कोई अध्ययन और फॉलोअप नहीं है. नहीं तो वो समझ पाती, हम आवाज़ और उनके द्वारा गए पूछे गए सवालों से महसूस कर पाते कि वो कितनी तैयारी से आयी हैं ?
हम ऐसे दौर में कारोबारी मीडिया को लेकर बात कर रहे हैं जहां पेशेवर स्तर की चूक, लापरवाही और बेशर्मी पर टिप्पणी करने की गुंजाईश तेजी से ख़त्म होती जा रही है. फैन्स-फॉलोअर्स के इस दौर में सामग्री( कंटेंट ) बहुत पीछे चला गया है. मुझे नहीं पता कि संस्थान इस सारी बातों का आकलन करते भी हैं या नहीं लेकिन मेरे जैसा टीवी का पुराना दर्शक बहुत साफ़ समझ पाता है कि इससे चैनलों के भीतर की संभावना एकदम से ख़त्म होती चली जा रही है. आजतक की तरह बाकी चैनलों के पास संसाधन नहीं है कि वो अपने संवाददाता को कंधार भेज दे. संस्थान ने तो अपनी तरफ से ऐसा किया लेकिन स्टारडम में फंसी एंकर के भीतर की ये ख़ुशफ़हमी इस तरह से हावी है कि बस उनके होने भर से व्यूअरशिप मिल जाएगी तो ये कवरेज एक उदाहरण साबित होगा कि कैसे दुर्लभ मौक़े और संसाधनों का स्टारडम और सेलेबहुड के फेर में बर्बाद कर दिया जाता है. काश, सिद्दिकी को कोई संजीदा एंकर मिल पाता जो उन्हें इत्मिनान से बोलने देता और इस अंदाज़ में सधे हुए सवाल रखता कि चैनल के संसाधन और संवाददाता के जोख़िम उठाने की कद्र हो पाती. (लेखक के फ़ेसबुक प्रोफ़ाइल से साभार)
हिंदी की सारी वेबसाइटें कंदहार को कंधार लिख रही हैं जबकि अंग्रेज़ी में इसकी स्पेलिंग है – Kandahar जो इसके नाम को बिल्कुल स्पष्ट कर देता है।
कंदहार को कंधार लिखने के पीछे दो कारण हो सकते हैं। 1. पत्रकार भाई d के बाद के a को मिस कर रहे हैं और dh को एकसाथ समझकर ध लिख रहे हैं। 2. कुछ लोगों की यह मान्यता है कि यह वही जगह है जो पहले गंधार या गांधार के नाम से जानी जाती थी। वैसे इस बात का कोई प्रमाण नहीं है कि कंदहार उसी इलाक़े में पड़ता है जिस इलाक़े में कभी गंधार या गांधार था। लेकिन अगर ऐसा है भी तो कंधार भी क्यों लिखें? गंधार या गांधार ही लिखो। मेरी समझ से नाम वही होना चाहिए या उसके बिल्कुल क़रीब होना चाहिए जो स्थानीय लोग बोलते हों।
अंग्रेज़ी को छोड़िए, फ़ारसी, पश्तो या दारी – किसी भी भाषा में कंधार नहीं बोला जाता। सबमें कंदहार है या क़ंदहार। लेकिन सोचने या पता लगाने की फ़ुरसत किसे है?
विकिपीडिया के इस पेज के अनुसार यह शहर सिकंदर ने बसाया था और इस्कंदर से कंदर होकर ही कंदहार बना है।
पेज का लिंक अगर और जानना या पुष्टि करना चाहते हों – https://en.wikipedia.org/wiki/Kandahar
(वरिष्ठ पत्रकार नीरेंद्र नागर के सोशल मीडिया प्रोफ़ाइल से साभार)
Atul Dayal appointed as Creative Director of News India TV
आध्यात्मिक चैनल के सर्वेसवा होंगे अतुल दयाल
फ़िल्म सिटी से जल्द लॉन्च होने वाले हिंदी नेशनल न्यूज़ चैनल न्यूज़ इंडिया की टीम में एक और बड़ा नाम जुड़ गया है। करीब 25 साल से मीडिया इंडस्ट्री में सक्रिय अतुल दयाल ने न्यूज़ इंडिया के क्रिएटिव डायरेक्टर के पद पर ज्वाइन कर लिया है। नेटवर्क के अगले बड़े प्रोजेक्ट आध्यात्मिक चैनल के सर्वेसवा अतुल दयाल ही होंगे। वो नए चैनल के स्टूडियो, न्यूज़ रूम की डिजाइनिंग से लेकर चैनल के लुक-फील पर काम कर रहे हैं। अतुल रामेश्वर दयाल ने संस्कार टीवी से इस्तीफा देकर नई चुनौती स्वाकार की है। संस्कार टीवी के 5 चैनलों के कंटेंट और प्रोग्रामिंग का पूरा जिम्मा अतुल दयाल ही संभाल रहे थे।
न्यूज इंडिया की नई टीम को अतुल दयाल के तजुर्बे का पूरा फायदा मिल रहा है। मीडिया से अतुल दयाल का नाता 1992 से जुड़ा और वो तब से लगातार अलग-अलग चैनलों और मीडिया हाउस के साथ जुड़ कर कुछ नया करते रहे हैं। आपको जैन टीवी, दूरदर्शन, ईटीवी, बीएजी फिल्म्स, सी वोटर ब्रॉडकास्ट, एसवन न्यूज चैनल, इंडिया न्यूज, हिंदुस्तान न्यूज नेटवर्क और संस्कार टीवी सहित नामी गिरामी मीडिया संस्थाओं के साथ काम करने का अनुभव है।
अतुल दयाल हिंदी और अंग्रेजी दोनों ही भाषाओं पर जबरदस्त पकड़ रखते हैं। कलम के महारथी अतुल दयाल मीडिया के हरफनमौला माने जाते हैं। अतुल दयाल ने अब तक बतौर चीफ रिपोर्टर, स्क्रिप्ट राइटर, प्रोड्यूसर, एडिटर, एंकर, डायरेक्टर हर भूमिका निभाई है। आपने डॉक्यूमेंट्री, सीरियल, फिल्म मेकिंग में भी अपना हुनर बखूबी आजमाया है। कई चैनलों की लॉन्चिंग में अतुल दयाल ने अहम भूमिका निभाई है।
अतुल दयाल की खूबी ये है कि वो बातें कम और काम ज्यादा वाले फलसफे में यकीन करते हैं। लेखनी में दक्ष, काम के प्रति समर्पण, जुनून और विश्वास ही अतुल दयाल की पूंजी है और सफलता की कुंजी है। अतुल दयाल टीम के साथ मिलकर रात दिन चैनल के लुक फील पर काम कर रहे हैं। उनके साथ बड़ी प्रोफेशनल टीम है। इंडस्ट्री के कुछ बड़े चेहरे भी न्यूज इंडिया की स्क्रीन पर नजर आएंगे।
12 अगस्त की रात 9 बजे ज़ी हिन्दुस्तान के सुपर प्राइम टाइम शो राष्ट्रवाद की स्क्रीन पर सरफराज सैफी नज़र नहीं आये। राष्ट्रवाद शो को पसंद करने वालों को ‘मैं सरफराज सैफ़ी…’ वाला अंदाज नहीं दिखा वो तेवर नही दिखे । 7 दिसंबर 2020 को ज़ी हिन्दुस्तान री लॉन्च हुआ था उसी दिन ज़ी हिंदुस्तान का सुपर प्राइम टाइम शो सरफराज सैफी के साथ राष्ट्रवाद शो लॉन्च हुआ, तब से एक दिन भी ऐसा नहीं रहा… जब रात 9 बजे सरफराज सैफी ज़ी हिन्दुस्तान की स्क्रीन पर मौजूद न रहे हों।
तो क्या ज़ी हिन्दुस्तान से सरफराज सैफी ने नाता तोड़ लिया है..?… तो क्या जी हिन्दुस्तान के शो राष्ट्रवाद से सरफराज सैफी ने नाता तोड़ लिया है… तो क्या सरफराज सैफी ने ज़ी हिन्दुस्तान से इस्तीफा दे दिया है… आखिर अचानक क्यों सरफराज सैफी और राष्ट्रवाद की ये जुगलबंदी टूट गई है… मीडिया के दिग्गजों से लेकर नोएडा फिल्म सिटी में बस इसी बात की चर्चा है कि आखिर ये क्या हुआ… हमारी टीम ने भी इन सभी सवालों का जवाब तलाशने के लिए सरफराज सैफी से संपर्क करने की कोशिश की… लेकिन अभी तक बात नहीं हो पाई है…
आपको बता दें सरफराज सैफी ज़ी हिन्दुस्तान के री लॉन्चिंग पर पहले दिन रात 9 बजे राष्ट्रवाद शो कर रहे थे… बुलंद आवाज़ के मालिक सरफराज़ अपने अंदाज अल्फाज और तेवरों से सरफराज सैफी ने इस शो को नई धार दी…चैनल को नई पहचान दी प्राइम टाइम के कड़े मुकाबले में बड़े बड़े दिग्गज चेहरों के बीच सरफराज सैफी ने न केवल अपनी जगह बनाई बल्कि आम जनता की जुबान पर भी चढ़ गए… लोगों के जेहन में बस गए… ‘मैं सरफराज सैफी… ‘ फिलहाल खामोश हैं पर उनकी चर्चा हर तरफ हो रही है… हर कोई जानना चाहता है… सरफराज के राष्ट्रवादी तेवर अब कब… कहां… ?
राष्ट्रवाद की सफलता का जश्न हुआ और फिर सरफराज शो से गायब!
sarfaraz saifi anchor with shamsher singh editor zee hindustan
जी हिंदुस्तान के बहुचर्चित कार्यक्रम ‘राष्ट्रवाद’ के सफलतापूर्वक 200 दिन पूरे होने पर जी हिंदुस्तान में हाल ही में जश्न भी हुआ था। केक काटकर सेलिब्रेट किया गया था। फिर अचानक सरफराज स्क्रीन से गायब कैसे हो गए। सरफराज के करीबी बताते हैं कि सात महीनों के दौरान उसने राष्ट्रवाद को दिन-रात जीया है, वो सुबह से शाम तक इसी शो की फिक्र में जुटे रहते कैसे हिट हो अलग अलग तरिके निकाल कर शो हिट करते थे। वो आउटडोर होते तो भी अपना शो वहीं से करते। कभी बीमार भी पड़ जाते तो अपने एंकर लिंक करने की जिद ठान बैठते ये सरफ़राज़ का जूनून है काम को लेकर ना कभी वीकली ऑफ, ना कभी छुट्टी… ये लगन और मेहनत ही थी कि राष्ट्रवाद ने कुछ महीने में देश मे एक नई पहचान बनाई जिसका फायदा जी हिंदुस्तान को हुआ घर घर चैनेल देखा जाने लगा।
खबरों के मुताबिक ज़ी हिन्दुस्तान में रात 9 बजे के शो के लिए बेस्ट और बड़ी टीम बनाई गई, ग्राफिक्स से लेकर प्रमोशन तक हर बात का खयाल रखा गया। डेली प्रोमो के साथ सरफराज के स्पेशल प्रोमो बने। हाल के दिनों में बज टाइम्स नाउ नवभारत ने राष्ट्रवाद के नाम से शो लॉन्च किया तो काफी विवाद भी हुआ। ज़ी हिन्दुस्तान के मैनेजिंग एडिटर शमशेर सिंह और उनकी टीम ने राष्ट्रवाद का नाम चोरी हो जाने को लेकर तल्ख टिप्पणियां की। टाइमस ग्रुप जाने से लेकर अलग अलग चर्चा जोर शोर से चल रही है कोई कह रहा है वो वापस अपनी पुरानी दुनिया कॉरपोरेट में चले गए है। अब स्कीन पर नही दिखाई देंगे कोई ये कह रहा है वो किसी नए बेंचर के साथ आ रहे है अब सवाल ये उठ रहा है कि आखिर राष्ट्रवाद का मेन एंकर सरफराज सैफी कहां है..?
आपको बता दे सरफ़राज़ सैफ़ी लगभग 19 साल से मीडिया में काम कर रहे है और टीवी इंडस्ट्री इंटर्न के तौर पर कैरियर शुरू किया कई मीडिया हाउस में बड़े बड़े ओहदों पर काम है टेलीविजन में एक तेज़तर्रार एंकर और स्मार्ट वर्क के लिए मशहूर सरफ़राज़ ने एक अलग पहचान बनाई है उनकी राजनीतिक गलियारो से लेकर ब्यूरोक्रेसी पर शानदार पकड़ मानी जाती है क्योंकि लंबे समय तक क्राइम कवर करते रहे, कई मीडिया हाउस में वाईस प्रेसीडेंट कॉरपोरेट की ज़िम्मेदारी निभा चुके है देश विदेश के दर्जनों अवार्ड उनको मिल चुके है।