हिन्दी समाचार चैनलों पर मुस्लिम एंकरों का राष्ट्रवाद !

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हिन्दी समाचार चैनलों पर मुस्लिम एंकरों का राष्ट्रवाद

केंद्र में मोदी सरकार के आने के बाद से समाचार चैनलों का ‘राष्ट्रवाद’ चरम पर है। अर्नब ने रिपब्लिक भारत नाम के चैनल की शुरुआत ही राष्ट्रवाद के दर्शकों को ध्यान में रखकर किया। इसमें उन्हें अप्रत्याशित सफलता भी मिली। इसका असर समान विचारधारा वाले दूसरे चैनलों पर भी पड़ा और राष्ट्रवाद को लेकर किस्म-किस्म के प्रयोग शुरू हो गए। इसी क्रम में आजकल एक नया प्रयोग मुसलमान एंकरों को लेकर चैनलों के स्क्रीन पर दिखायी दे रहा है।

मुसलमान एंकरों से हिन्दू राष्ट्रवाद !

राष्ट्रवाद के इस नए प्रयोग के तहत राष्ट्रवाद के बुलेटिन मुस्लिम एंकरों से करवाया जा रहा है। एबीपी न्यूज में रुबिका लियाकत (Rubika Liyaquat), ज़ी हिंदुस्तान में सरफराज सैफी (Sarfaraz Saifi), टीवी – 9 में सुमेरा खान (Sumaira Khan) और समीर अब्बास (Sameer Abbas), रिपब्लिक भारत में सय्यद सुहैल (Syed Suhail) आदि कई एंकर आपको अलग-अलग समाचार चैनलों पर राष्ट्रवाद की नयी परिभाषाएं गढ़ते दिखायी पड़ जाएंगे।

ज़ी हिंदुस्तान का राष्ट्रवाद

ज़ी हिंदुस्तान ने एक कदम आगे बढ़कर अपने 9 बजे के प्राइम टाइम बुलेटिन का नामकरण ही ‘राष्ट्रवाद’ कर दिया और इस राष्ट्रवाद का नायक एंकर ‘सरफराज सैफी’ को बना दिया। मजेदार बात है की सरफराज सैफी इस राष्ट्रवाद में कभी गजवा – ए – हिन्द की लानत-मलानात करते हैं तो कभी उनके निशाने पर ओवैसी तो कभी पाकिस्तान रहता है। सरफराज सैफी प्रतिभाशाली युवा एंकर हैं और सिद्दत से खबरें पढ़ते हैं। यही वजह है कि जी हिंदुस्तान का यह प्रयोग सफल भी हो रहा है। राष्ट्रवादी दर्शक इसे खूब पसंद कर रहे हैं क्योंकि जब यह कहते हुए एंकर सवाल पूछते हैं कि मैं सरफराज सैफी …..  पूछना चाहता हूँ तो राष्ट्रवाद एक अंगड़ाई ही लेने लगता है। आप इस अंगड़ाई का मतलब बखूबी समझ ही रहे होंगे। ठीक इसी अंदाज में एबीपी पर रुबिका लियाकत मौलवियों से भिड़ते हुए ये कहती हैं कि मौलवी साहब आप हमे इस्लाम मत समझाइए, इस सवाल का पहले जवाब दीजिए तो राष्ट्रवाद के दर्शकों को सुकून मिलता होगा कि मुस्लिम एंकर ने अपने मजहब के ही मौलवी की फजीहत कर दी। कम-से-कम चैनलों की थिंक टैंक की सोंच तो ऐसी ही है।

चैनलों की नीयत में खोट

हालांकि एक पत्रकार होने के नाते ऐसा करने में कोई बुराई नहीं है क्योंकि पत्रकारिता का कोई धर्म नहीं होता और तथ्यों की सही जानकारी देना ही एक पत्रकार का वास्तविक धर्म होता है। लेकिन यहाँ चैनलों की नीयत पर शक होता। यह महज संयोग नहीं लगता कि राष्ट्रवाद और धार्मिक उन्माद वाले कार्यक्रमों की एंकरिंग मुसलमान एंकरों से खास मकसद के लिए करवाया जा रहा है। बहरहाल इसका बेहतर जवाब तो चैनल और उसके एंकर ही दे सकते हैं। इसके आगे कुछ कहने की हमारा राष्ट्रवाद हमे इजाजत नहीं देता। बाकी तो आप समझदार है ही। लेकिन इतना तय है कि समाचार चैनलों की सोंच राजनीतिक दलों जैसी हो गई है जहां खास धर्म पर बयान देने के लिए उसी धर्म के राजनेताओं को आगे किया जाता है। उम्मीद है इसका मतलब तो आप समझते ही होंगे। जय हिन्द।

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