मुजफ्फरनगर दंगे की रिपोर्टिंग में कुछ चैनलों और अखबारों ने नियमों को तोड़ा
आनंद प्रधान भारत के लिए सांप्रदायिक दंगे कोई नई परिघटना नहीं हैं. जाहिर है कि न्यूज मीडिया के लिए भी इन सांप्रदायिक दंगों की कवरेज का अनुभव नया नहीं है. इसके बावजूद हर छोटे-बड़े दंगे को भड़काने में न्यूज मीडिया खासकर क्षेत्रीय भाषाओं के अखबारों की भूमिका और ज्यादातर मामलों में उसकी एकपक्षीय, असंतुलि...
