सैफुल्लाह के पिता की मीडिया से यह एक तरह की अपील है...
जाली टोपी, लंबी दाढी और उटंग पाजामे वाला पिता : जो अपने देश का नहीं हुआ, वो मेरा क्या होगा ? लिहाजा मैं उसका शव नहीं ले सकता. हिन्दुस्तान के एक पिता का अपने बुनियादी धर्म( पिता धर्म ) छोडकर ऐसा कहना आसान तो नहीं कहा होगा. लेकिन का देश के ऐसे हजारों पिता पर के बारे में राय काम करने से पहले क्या तब भी...
