ओम थानवी को टाइम्स नाऊ पर पत्रकारिता नहीं फासिज्म दिखता है

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ओम थानवी,वरिष्ठ पत्रकार
ओम थानवी,वरिष्ठ पत्रकार

जनसत्ता के पूर्व संपादक और वरिष्ठ पत्रकार ओम थानवी इन दिनों टाइम्स नाऊ पर भिड़े हुए हैं. हर दूसरे दिन वे टाइम्स नाऊ और अर्नब गोस्वामी को लेकर कुछ न कुछ लिखते रहते है जिसका सार आलोचना होता है. वैसे वे खुलेआम अर्नब को मोदी / भाजपा भक्त करार चुके है. इसी सिलसिले में आज सर्जिकल स्ट्राइक पर रवीश कुमार और बरखा दत्त की तारीफ़ करते हुए उन्होंने सोशल मीडिया पर अपना स्टेटस अपडेट किया –




ओम थानवी

अर्नब गोस्वामी न्यूज़आवर में बहस करते
अर्नब गोस्वामी न्यूज़आवर में बहस करते

आजकल टीवी देखना पड़ रहा है। पता नहीं कब क्या सरप्राइज़/सर्जिकल ख़बर निकल आय!

सदा की तरह पहले रवीश की बात सुनी। फिर भारत-पाक तनाव पर बरखा दत्त की चर्चा। यह होती है बहस:

संजीदा लोग, सबको बात कहने का मौक़ा, ऐंकर पार्श्व में। पार्थसारथी ज़रूर उत्तेजना में सुधींद्र कुलकर्णी के प्रति ग़ैर-राजनयिक हो गए। परिवेश ऐसा है कि राष्ट्रवाद सबमें ज़ोर मारने लगता है। सुधींद्र का राष्ट्रप्रेम भी असंदिग्ध है, पर वे निस्संकोच कश्मीर समस्या के निपटारे की ओर भी ध्यान दिलाते हैं, अपना संयम खोए बिना।

हिंदी चैनलों की ओर लौटते वक़्त फिर बीच में कहीं ‘लड़ाई’ देख ठहर गया – टाइम्स नाउ ही था। उस रोज़ सबा नक़वी निशाने पर थीं, आज सईद मिर्ज़ा। शिव सेना-मनसे के लिए मानो हर मुसलमान पाकिस्तान-समर्थक होता होगा, पर टीवी पत्रकारों में तो विवेक होना चाहिए। इस कथित बहस में पाकिस्तानी कलाकारों – साथ में उनका पक्ष लेने वाले सलमान ख़ान – के प्रति चैनल (और उसके अधिकांश ‘मेहमान’) का पुनर्निर्धारित दुराग्रह था।

उस रोज़ सुधींद्र कुलकर्णी ने अर्णब को कहा था – “मैंने आपसे बदतरीन (‘worst’) ऐंकर पहले कभी नहीं देखा।”
आज सईद मिर्ज़ा ने कहा – ” यह पत्रकारिता नहीं है, यह फ़ासिज़्म (Fascism) है।”
इत्यलम।




1 COMMENT

  1. arnav ne tum sabke kapde ytar diye hain ,tum aur kya kah sakte ho ?80 ke dashak main hi ho abhi?NDTV ke anchor kya hain kaise hain tum ab logon ko murkh nahi bana sakte

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