सुदर्शन टीवी का मामला दिल्ली हाईकोर्ट में खारिज

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दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को मुस्लिमों के संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा पास करने से संबंधित आगामी कार्यक्रम के प्रसारण पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका को वापस लिए जाने पर इसे बुधवार को खारिज कर दी। न्यायमूर्ति नवीन चावला की अध्यक्षता वाली हाईकोर्ट की एक एकल-न्यायाधीश पीठ ने याचिका को खारिज कर दिया, जब वकील शादान फरसाट ने यह कहते हुए याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी कि इसी तरह का मुद्दा शीर्ष अदालत के समक्ष लंबित है।

याचिकाकर्ता सैयद मुज्तबा अतहर और कुछ अन्य लोगों ने अपनी याचिका में कहा कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा आदेश एक नॉन स्पीकिंग ऑर्डर है।

दलील में आगे कहा गया है कि केबल टीवी अधिनियम की धारा-5, 19 और 20 के तहत कानून के जनादेश और 29 अगस्त को दिए गए आदेश में अदालत के निर्देश के बावजूद, दिया गया आदेश कार्यक्रम संहिता के उल्लंघन के संबंध में कोई आकलन करने में विफल है। यह दलील केबल टीवी अधिनियम की धारा 19 या 20, या तो प्रस्तावित शो या इसके प्रोमो के संबंध में दी गई है।

दलील में कहा गया है, “मूल्यांकन को केवल उत्तरदाता संख्या-2 (सुदर्शन न्यूज) और संख्या-3 (एडिटर-इन-चीफ सुरेश चव्हाण) के एक बयान पर छोड़ दिया गया है कि प्रोग्राम कोड का कोई उल्लंघन नहीं किया गया है।

कार्यक्रम सुरदर्शन टीवी के ‘बिंदास बोल’ सीरीज का हिस्सा है, जिसे चव्हाण द्वारा पेश किया जाता है।

सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने पूर्व में जारी एक आदेश में कहा कि वह किसी कार्यक्रम को पूर्व-सेंसर नहीं कर सकता है और न ही इसे टेलीकास्ट होने से रोक सकता है।

मंत्रालय की ओर से कहा गया था, “अगर जब कार्यक्रम टेलीकास्ट होता है और कानून का कोई उल्लंघन पाया जाता है, तो कार्रवाई की जा सकती है।”

बता दें कि इस कार्यक्रम के प्रोमो में दावा किया गया था कि चैनल सरकारी सेवाओं में मुस्लिमों की घुसपैठ के षड्यंत्र का बड़ा भंडाफोड़ करने वाला है। (एजेंसी)

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