आईबीएन-7 के रिपोर्टर की साहित्यिक छौंक सुनकर निराला ने भी सिर पीट लिया होगा

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आईबीएन-7 के इंडिया गेट पर खड़े रिपोर्टर ने अपनी रिपोर्ट में साहित्यिक छौंक देते हुए कहा “कि जैसा कि महादेवी वर्मा ने लिखा था कि दुख ही जीवन की कथा रही, क्या कहूँ आज जो नहीं कही!”

निराला ने अपना सिर पीट लिया होगा!

सुबह से देख रही हूँ कुछ चैनलों के रिपोर्टर बाक़ायदा हांफ-हांफ कर बोलते हुए बात में गंभीरता पैदा करने की क़ोशिश कर रहे हैं।

समझ नहीं आती कि एक गंभीर मसले को ये लोग इस तरह से पेश क्यों करना चाहते हैं?

संयत और सटीक बोलेंगे तब भी लोग उनके चैनल के सामने बैठे रहेंगे, देखेंगे, सक्रिय भी होंगे।

(दिल्ली विश्वविद्यालय में अध्यापन कार्य में संलग्न सुधा सिंह के फेसबुक वॉल से साभार)


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