भोपाल। द्विभाषी मासिक शोध पत्रिका समागम का हर अंक विषय-विशेष पर केन्द्रित रहा है। माह जुलाई-2014 का अंक अमर कथाकार मुंशी प्रेमचंद पर केन्द्रित है। प्रेमचंद की उपस्थिति हिन्दी साहित्य में कालजयी है तो पत्रकारिता एवं सिनेमा के भी वे सशक्त हस्ताक्षर रहे हैं। उनके समूचे रचनाकर्म पर विवेचनात्मक आलेख एवं शोध पत्रों का प्रकाशन किया गया है। साहित्य, सिनेमा एवं पत्रकारिता के अंर्तसंबंधों पर प्रेमचंद के बहाने शोध पत्रिका समागम एक नये बहस की शुरूआत करना चाहती है। इस विशेष अंक में अतिथि सम्पादक प्रख्यात साहित्यकार सुश्री उर्मिला शिरीषजी हैं। इस आशय की जानकारी सम्पादक मनोज कुमार ने दी। उन्होंने बताया कि शोध पत्रिका समागम का अगला अंक जनक्रांति 2014 व्हाया सोशल मीडिया पर केन्द्रित होगा।
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