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बिजनेस जर्नलिज्म से आसान था दाऊद इब्राहिम के ठिकाने पर पहुंचना!

deepak sharma journalist
deepak sharma journalist

दुबई में दाऊद इब्राहिम के दफ्तर और ठिकाने पर पहुंचना आसान था। एक वक़्त के ताकतवर मंत्री सलमान खुर्शीद से भिड़ना भी आसान था। केपीएस गिल जैसे सुपरकॉप को कुर्सी से उतारना भी कुछ सीमा तक मेरे लिए आसान था….लेकिन देश के अर्थतंत्र और देश के कैपिटल मार्किट को भीतर से समझना आसान नहीं है। ये एक ऐसी दुनिया है जिसका हर विषय एक समंदर है और हर समंदर में कई समंदर समाये हुए हैं।

शायद इसीलिए जनता, क्राइम की स्टोरी समझती है, बॉर्डर पर सेना की हलचल को समझती है और राजनीति पर तो ज्ञान बाँट सकती है। शायद इसलिए इस देश में 10 वीं पास लोग विधायक और 12 वीं फेल लोग मंत्री बन जाते हैं।जिन्होंने कामर्स की कभी किताब नहीं खोली वे संसद में बजट समझाते है। सच है, अर्थ जैसे विषय को समझाने में सरकार को अगर परहेज है तो उसे समझने में जनता को भी रूचि नहीं। शायद इसलिए सदियों में कोई कौटिल्य, कोई विक्रमादित्य पैदा होतें है। और शायद इसलिए देश के हज़ारों साल के इतिहास में स्वर्णिम दौर बार बार नहीं आता ।स्वर्णिम दौर का आधार संस्कृति या शक्ति नही, आर्थिक संपनता और समृद्धि है ..जो भारत ने चंद्रगुप्त और समुद्रगुप्त के दौर में देखी थी ।

अरुण शोरी पिछले पांच दशकों में देश के सबसे मेधावी पत्रकार इसलिए माने गए क्यूंकि बुनियादी तौर पर वे अर्थशास्त्री हैं। शौरी ने रिलायंस की नींव, या फिर बोफोर्स पर कांग्रेस की नीँव इसलिए हिला दी थी क्यूंकि वे कैपिटल मार्किट या बिज़्नेस कॉंट्रैक्ट बारीकी से समझते थे। शौरी की बात फिर कभी …. आज आप किसी बुद्धजीवी से अगर ये पूछेंगे कि भारत को अंतराष्ट्रीय बाजार में मज़बूती के साथ किसने आगे किया तो जवाब में आप नरसिम्हा राव का ही नाम सुनेंगे। देश में लाइसेंस राज को समाप्त कर, राव ने आर्थिक बदलाव की जो शुरुआत की थी उन्ही नीतियों पर आधुनिक भारत आगे बढ़ा… जिसे बाद में वाजपेयी, मनमोहन और मोदी तक ने फॉलो किया। टेक्नोलॉजी और औद्योगिक उत्पादन को, राव ने ही रफ़्तार दी थी। 17 भाषाएँ धाराप्रवाह बोलने वाले राव, सचमुच जीनियस थे। एक जीनियस ही इस देश में अर्थ को तंत्र में बदल सकता है ।

दो दशक से अधिक की पत्रकारिता के सफर में मुझे बेहद कम लोग ऐसे दिखे जो वाकई देश की समस्याओं को, खासकर आर्थिक चुनौतियों को भीतर तक जानते थे। अधिकतर लोगों से जब मैंने बाजार, व्यापार, बजट, शेयर मार्किट, उत्पादन और करेंसी पर बात की तो उनमे मुझे दक्षता का आभाव दिखा। कई ब्यूरो चीफ, कई संपादक ऐसे मिले जो सालाना बजट में देश के खर्च और आमदनी को नहीं समझते थे।टीवी चैनल के ज्यादातर साथियों का हाल तो और भी बदतर था।

मैं भी स्वीकार करता हूँ कि पिछले 6-7 वर्षों के निरंतर अध्यन के बाद भी मेरे लिए देश के कैपिटल मार्किट, ट्रेड और वित्तीय व्यवस्था को भीतर तक समझना एक चुनौती है। समझ जितनी गहरी होगी उतनी ही सहजता से पाठकों को अर्थ तंत्र और धन तंत्र समझा सकूंगा।

देश को बदलना है तो देश की मुख्यधारा की मीडिया को अर्थ को अहमियत देनी होगी, सिर्फ इकनोमिक टाइम्स या CNBC (बिज़नेस) चैनल के प्रसार से स्थिति बदलने वाली नहीं। वैसे भी बिज़नेस चैनल और बिज़नेस अख़बार की भाषा ठेठ बिज़नेस वाली है जो जनता को समझ नहीं आती। बिज़नेस में सामान्य जन की अज्ञानता के कारण आज देश के स्टॉक मार्किट में गिनती के लोग ही निवेश करते है।

एक ताज़ा आंकड़े के मुताबिक 2020 में अमेरिका में 55 प्रतिशत नागरिक स्टॉक मार्किट में निवेश कर रहे हैं जबकि भारत में 1.5 प्रतिशत से भी कम जनता स्टॉक में निवेश करती है। गूगल, एप्पल, फेसबुक, माइक्रोसॉफ्ट या अमेज़न का जबरदस्त विस्तार, अमेरिकी स्टॉक एक्सचेंज की ही देन है। इसलिए अमेरिका के सुपर पावर बनने के पीछे वहां की पब्लिक लिस्टेड कंपनियों और जनता की उसमे भागीदारी का बड़ा रोल है। जापान भी जनता के निवेश से ही टोयोटा, हौंडा, सुजुकी,सोनी,हिताची और पैनासोनिक जैसी ग्लोबल कम्पनी खड़ा कर सका।

देश को आगे बढ़ाना है तो सचमुच में बाजार को सरल और सहज करना होगा। दुर्भाग्य ये है कि जो स्टॉक मार्किट, मिडिल क्लास का जीवन बदल सकता है उस स्टॉक मार्किट को भारत में आम आदमी, हर्षद मेहता के नाम से जानता है। बाजार में निवेश को यहां बदनाम कर दिया गया है और कुछ स्टॉक ब्रोकर्स के कार्टेल ने भी रातोरात करोड़पति बनने की फ़िराक में कैपिटल मार्किट की छवि को ख़राब किया।

बहरहाल मेरी कोशिश रहेगी कि स्टॉक मार्किट को सहजता से आपको समझा सकूं जिससे आपका जीवन भी बेहतर हो सके और देश का उत्पादन भी। आप भी बढ़े, फैक्टरियां भी बढ़े, निर्यात भी बढ़े और देश भी।

और ये लक्ष्य बिना मज़बूत, पारदर्शी और सहज कैपिटल मार्किट के संभव नहीं। हमें आर्थिक सुपर पावर बनना हैं तो इसका रास्ता जन निवेश से ही निकलेगा। इसलिए आनेवाले दिनों में आप मेरे कुछ शो पर नज़र रखियेगा जहाँ में एक्सपर्ट्स की मदद से आपको बाजार के हर पहलू को बेहद आसानी से समझाने की कोशिश करूँगा

अक्षय कुमार ने यूट्यूबर के खिलाफ 500 करोड़ रुपये का मानहानि का मुकदमा किया

akshay kumar

बॉलीवुड सुपरस्टार अक्षय कुमार ने एक यूट्यूबर के खिलाफ 500 करोड़ रुपये का मानहानि का मुकदमा किया है। इसकी वजह यह रही कि यूट्यूबर ने अपने वीडियोज में अक्षय कुमार के नाम पर झूठी और बेबुनियाद खबरों का प्रसार किया है। इस यूट्यूबर का नाम राशिद सिद्दीकी है, जिसने सुशांत सिंह राजपूत मामले में अक्षय कुमार का नाम घसीटा है।

सिद्दीकी को इससे पहले सुशांत मामले में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और उनके बेटे आदित्य ठाकरे के नाम को उछालने और गलत खबरें फैलाने के चलते गिरफ्तार किया जा चुका है।

राशिद सिद्दीकी नामक इस यूट्यूबर ने कुछ सेलेब्रिटीज के बारे में भ्रामक जानकारियां फैलाकर कथित तौर पर लोगों को गुमराह करने के लिए डिजिटल मीडिया का इस्तेमाल किया है।

राशिद को अपने वीडियोज में अक्षय कुमार का नाम कई बार लेते और उन पर गलत आरोप लगाते देखा गया है। राशिद ने अपने वीडियो में दावा किया था कि ‘एमएस धोनी : द अनटोल्ड स्टोरी’ जैसी बड़ी फिल्म सुशांत को मिलने की बात से अक्षय नाखुश थे और साथ में यह भी दावा किया कि सुशांत मामले में आदित्य ठाकरे और मुंबई पुलिस से उनकी गुप्त बातचीत होती है।

बताया जा रहा है कि बिहार से ताल्लुक रखने वाले सिविल इंजीनियर सिद्दीकी मानहानि, सार्वजनिक दुर्व्यवहार और जानबूझकर अपमान करने का आरोप लगाया गया है।

यूट्यूबर ने अपने वीडियो में अक्षय पर अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती को कनाडा भागने में मदद का आरोप लगाया था। ऐसा माना जाता है कि हर चार महीने के दरमियां सिद्दीकी की कमाई 15 लाख रुपये के आसपास होती है और उसके सब्सक्राइबर्स की संख्या भी अब बढ़कर तीन लाख से अधिक हो गई है। (एजेंसी)

मनोज वाजपेई का फर्जी ट्विटर एकाउंट !

manoj bajpayee

बॉलीवुड अभिनेता मनोज वाजपेई ने गुरुवार को नेटिजंस को उनके नाम से चलाए जा रहे एक ट्विटर अकाउंट को लेकर आगाह किया है। अभिनेता ने अपने सत्यापित ट्विटर अकाउंट से उनके नाम से चलाए जा रहे फर्जी अकाउंट के स्क्रीनशॉट साझा किए।

इस फोटोग्राफ के साथ ही उन्होंने ट्वीट कर कहा, “यह एक फर्जी अकाउंट है। सावधान रहें।”

वर्कफ्रंट की बात करें तो, बाजपेयी की दिवाली में ‘सुरज पे मंगल भारी’ फिल्म रिलीज हुई है। फिल्म में वह वेडिंग डिटेक्टिव के अवतार में दिख रहे हैं।

एलेक्सा पर जोड़ा गया हिंदी सपोर्ट

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एमेजॉन ने गुरुवार को ऐलान किया कि कंपनी की तरफ से फायर टीवी पर एलेक्सा के लिए एक नए लैंग्वेज सपोर्ट के रूप में अब हिंदी को शामिल किया जा रहा है। इसके तहत फायर टीवी पर एलेक्सा से हिंदी में इंटरैक्शन किया जा सकेगा, स्थानीय भाषा में कई जानकारियां उपलब्ध कराई जाएंगी, हिंदी में हजार तरह के स्किल जोड़े जाएंगे इत्यादि। यूजर्स अपने डिवाइस लैंग्वेज के रूप में हिंदी का चुनाव कर फायर टीवी में मेन्यू भी इसी भाषा में देख सकेंगे।

कंपनी ने एक बयान में कहा, “यूजर्स एलेक्सा वॉयस रिमोट के माध्यम से हिंदी को चुन सकते हैं। इसके लिए उन्हें सेटिंग्स में क्लिक कर फायर टीवी लैंग्वेज के सेटिंग्स में जाना होना, इसके बाद डिवाइस ऑप्शन में जाना होना और फिर डिवाइस लैंग्वेज को चुनना होगा। फायर टीवी के नए ग्राहक अपने डिवाइस बॉक्स को सेट करते वक्त ही भाषा का चयन कर सकते हैं।”

इसके लॉन्च होने से ग्राहक हिंदी में एलेक्सा के माध्यम से गाने, विभिन्न चीजों के बारे में ज्ञान, व्यक्तित्वों से संबंधित जानकारी, स्मार्ट होम, अलार्म, मौसम, न्यूज, स्थानीय चीजों के बारे में छानबीन सहित और भी कई सुविधाओं का लाभ उठा पाने में सक्षम हो सकेंगे। (एजेंसी)

सुदर्शन टीवी का मामला दिल्ली हाईकोर्ट में खारिज

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दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को मुस्लिमों के संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा पास करने से संबंधित आगामी कार्यक्रम के प्रसारण पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका को वापस लिए जाने पर इसे बुधवार को खारिज कर दी। न्यायमूर्ति नवीन चावला की अध्यक्षता वाली हाईकोर्ट की एक एकल-न्यायाधीश पीठ ने याचिका को खारिज कर दिया, जब वकील शादान फरसाट ने यह कहते हुए याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी कि इसी तरह का मुद्दा शीर्ष अदालत के समक्ष लंबित है।

याचिकाकर्ता सैयद मुज्तबा अतहर और कुछ अन्य लोगों ने अपनी याचिका में कहा कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा आदेश एक नॉन स्पीकिंग ऑर्डर है।

दलील में आगे कहा गया है कि केबल टीवी अधिनियम की धारा-5, 19 और 20 के तहत कानून के जनादेश और 29 अगस्त को दिए गए आदेश में अदालत के निर्देश के बावजूद, दिया गया आदेश कार्यक्रम संहिता के उल्लंघन के संबंध में कोई आकलन करने में विफल है। यह दलील केबल टीवी अधिनियम की धारा 19 या 20, या तो प्रस्तावित शो या इसके प्रोमो के संबंध में दी गई है।

दलील में कहा गया है, “मूल्यांकन को केवल उत्तरदाता संख्या-2 (सुदर्शन न्यूज) और संख्या-3 (एडिटर-इन-चीफ सुरेश चव्हाण) के एक बयान पर छोड़ दिया गया है कि प्रोग्राम कोड का कोई उल्लंघन नहीं किया गया है।

कार्यक्रम सुरदर्शन टीवी के ‘बिंदास बोल’ सीरीज का हिस्सा है, जिसे चव्हाण द्वारा पेश किया जाता है।

सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने पूर्व में जारी एक आदेश में कहा कि वह किसी कार्यक्रम को पूर्व-सेंसर नहीं कर सकता है और न ही इसे टेलीकास्ट होने से रोक सकता है।

मंत्रालय की ओर से कहा गया था, “अगर जब कार्यक्रम टेलीकास्ट होता है और कानून का कोई उल्लंघन पाया जाता है, तो कार्रवाई की जा सकती है।”

बता दें कि इस कार्यक्रम के प्रोमो में दावा किया गया था कि चैनल सरकारी सेवाओं में मुस्लिमों की घुसपैठ के षड्यंत्र का बड़ा भंडाफोड़ करने वाला है। (एजेंसी)

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