Home Blog Page 28

बबली और शीला का बिछौना देखकर आप भी हो जायेंगे भावुक !

street dog house

बबली का बिछौना..

बिछौना तो शीला का भी लगा है पर फिलहाल ये दोनों शायद कहीं तफरी करने गई हुई हैं.. नटखट भूरु और काली जरूर सुकून नींद निकाल रहे हैं..

कड़ाके की ठंड में ऐसा नर्म-गर्म बिस्तर मिल जाए तो क्या कहने..

इंदौर (Indore) के डॉग लवर्स ग्रुप की ‌की एक शानदार और अनुकरणीय पहल..

वंदना जैन और उनके साथियों ने ठंड के चलते #StreetDog के लिए शहर के कोने-कोने में बोरी से बनाए हुए ऐसे कई गद्दे लगवा दिए हैं..

नगर निगम का नाम सिर्फ इसलिए लिख दिया है कि कहीं नगर निगम वाले कचरा समझ कर ना उठा ले..

यह इंदौर नगर निगम सहित दूसरे नगरीय निकायों के लिए भी… बेशक उनके लिए भी जो इस मैसेज को पढ़ रहे हैं…

अपने आसपास के जानवरों को ठंड से बचाने की पहल करें …

आखिर ठंड तो इन्हें भी लगती है जनाब..

(सुनील सिंह बघेल के वॉल से साभार)

रवीश की नजर में व्हाट्सएप के भोर प्रचारक !

ravish kumar
ravish kumar whattapp messages

सुबह होते ही सुबह ऐसे बदरंग हाल में देखना अपने भीतर की सारी चेतनाओं का अंतिम संस्कार करने जैसा लगता है। ऐसे मैसेज भेजने वाले सुबह से भी नियमित है। किसी दिन इस दुनिया से सूरज अपना लोटा लेकर ग़ायब भी हो जाए और कह दे कि मैंने उगना डूबना छोड़ दिया है तो भी ये लोग मैसेज भेजते रहेंगे। गुड मार्निंग मैसेज भेजने वालों का नैसर्गिक संबंध मैसेज से है, सुबह से नहीं। एक जनाब तो मुझे रात के एक बजे भेजते हैं। उन्हें लगता है कि बारह बजते ही सुबह हो गई। साहब AM-PM के स्टार्टिंग प्वाइंट से ही सुबह को काउंट करने लगते हैं।

इन मैसेजों को खोज कर भेजने वालों को एक बीमारी ने धर लिया है। इसका नाम है मार्निंग मैनिया। यहाँ उल्लेख करना समीचीन होगा कि यह नाम मैंने रखा है। क्योंकि किसी लेख में अगर आप ‘मैं’ पर ज़ोर न दें तो पाठक को लगता है कि लेखक कॉपी पेस्ट वाला है। मैंने कई लोगों को लिखते वक्त ख़ुद को सीरीयसली लेते देखा है। काफ़ी तवज्जो देते हैं ख़ुद पर। जैसे कि वे एक मूर्ख समाज में समझोत्पादन करने का कोई भयंकर काम कर रहे हैं। उन्हीं से आज प्रेरित हो गया।

बहरहाल, सुबह से भी ज़्यादा अगर कोई सुबह को लेकर प्रतिबद्ध हो जाए तो उसका क्या किया जाए। भारत में कोई लोगों को लगता है कि जब तक व्हाट्स एप में गुड मार्निंग मैसेज भेजने की आज़ादी है, लोकतंत्र सुरक्षित है। आप गुड मार्निंग मैसेज के रूप में आने वाली तस्वीरों को देखें। इन्हें देखकर यक़ीन हो गया है कि 24 घंटे के पहर में कोई वक्त बदरंग है तो सुबह है। सुबह की अभिव्यक्तियाँ मर चुकी हैं। कुछ बची हैं जो मैसेज में दर्ज हैं। इसका मतलब है कि सुबह की भाषा मिट चुकी है। आप सुबह को प्रतिनिधि तस्वीरों के ज़रिए व्यक्त करने लगे हैं। कप प्लेट, पहाड़ के पीछे से निकलता सूरज, द चार फूल, कुछ संदेश अतिरिक्त।

ठीक इसी तरह आप ऐसे मैसेज और संदेशों के कारण नेहरू से लेकर जेएनयू और मुसलमानों को पहचानने लगे है। सारा ज्ञान और बोध सिमट जाता है। यही व्हाट्स एप यूनिवर्सिटी है। मैसेज के साथ आने वाली तस्वीरें आपके दिमाग़ में भाषा की जगह बैठती चली जाएँगी। आप भाषाविहीन होते जाएँगे। आप के भीतर जागने सोने हंसने रोने के बोध पर इन तस्वीरों का क़ब्ज़ा हो जाएगा। ऐसे ही लोगों का समूह रोबोट और आईटी सेल से संचालित होने लगता है। इन चीजों को पहचानिए। इनसे छुटकारा पाइये।

मैं आप गुड मार्निंग मैसेज भेजने वालों को चिरकुट नहीं कहना चाहता। चिरकुट होना बिस्कुट होना है। चाय के साथ आ जाता है और न चाहते हुए भी चाय पीने वाला बिस्कुट खाने लगता है। पता ही नहीं चलता कि चाय पी रहा है कि बिस्कुट खा रहा है। ऐसा लगता है जैसे आप मुँह के भीतर चाय से आटा सान रहे हों। वही काम गुड मार्निंग मैसेज करता है।

मैं आपको भोर प्रचारक कहता हूँ। आप न हों तो दुनिया में भोर का प्रचार न हो। आप ‘भोर प्रचारकों’ की बदौलत ही इनबॉक्स में सूरज के निकलने का इंतज़ाम हो सका है। आप लोग रोबोट हो चुके हैं। मैसेज लिया और किसी के इनबॉक्स में ठेल दिया। मैंने यह लेख आपकी निंदा में नहीं लिखा है बल्कि इन मैसेजों से सुबह को बचाने के लिए लिखा है। मुझे सैंकड़ों की संख्या में लोग हर सुबह गुड मार्निंग मैसेज भेजते हैं। मेरा बस यही कहना है कि इस प्रक्रिया में गुड आफ़्टर नून उपेक्षित महसूस कर रहा है। उसका भी आप लोड ले लीजिए। क्योंकि मना करने से भी सुधरने वाले तो हैं नहीं । ओ भोर के सिपाही, थोड़ा दोपहर का ठेका ले लो रे, दोपहर रह गया है अकेले रे।इसे गाते रहिए। (रवीश कुमार के सोशल मीडिया से साभार)

एमडीएच के धर्मपाल गुलाटी जब आजतक चैनल पर एंकरिंग करना चाहते थे!

dharmpal gulati aajtak

कहते हैं कि जीवन में अगर मसाला ना हो तो जीने का कुछ मजा नहीं आता। गुलाटी जी ने जिंदगी को खूब जिया और 98 साल की उम्र में सबकुछ छोड़कर दुनिया को अलविदा कह दिया। लेकिन बात जब भी मसालों को होगी लोग धर्मपाल गुलाटी जी को याद करेंगे। दरअसल हम जिंदगी जीते हुए जो भी अच्छा-बुरा करते हैं उसकी यादें ही रह जाती हैं। बाकी तो एक हद के बाद धन-दौलत मन का सुकून ही रह जाता है और खासकर उम्र के तीसरे पड़ाव में तो आप उसके उपभोग के काबिल भी नहीं रह जाते। आपकी गाढ़ी कमाई आपके बाल-बच्चों, आपके डॉक्टरों के बंगला-गाड़ी खरीदने और अस्पतालों की शानो-शौकत को बढ़ाने में ही काम आती है। मेरे कहने का मतलब ये नहीं है कि धन-दौलत का अर्जन कोई बुरी बात है। मैं तो बस ये कहना चाह रहा हूं कि एक हद के बाद धन-दौलत की लोच और लचक (Elasticity and Plasticity) दोनों ही बेकार हो जाती है।

अब बात फिर से एमडीएच के धर्मपाल गुलाटी जी की। बात शायद 2004-5 की है। तब मैं आजतक न्यूज चैनल में बतौर प्रोड्यूसर काम कर रहा था। उस दिन हमारी ड्यूटी रनडाउन पर थी। तभी मार्केटिंग के एक शख्स भागते हुए मेरे पास आए। बोले- ‘किसी मसाला कंपनी ने चैनल को बड़ी रकम का विज्ञापन दिया है। उसके मालिक को खुश करना है।‘ मैं हैरान था, ‘इसमें मैं क्या कर सकता हूं।‘ दरअसल धर्मपाल गुलाटी जी आजतक चैनल पर एंकरिंग करना चाहते थे। मैंने अपने बॉस सुप्रिय प्रसाद, जिन्हें में बड़े प्यार और दोस्ताना अंदाज में सुप्रिय सर कहता था, की ओर आश्चर्य मिश्रित भाव से देखा और मुझे समझते देर नहीं लगी कि अब हमें करना क्या है!

तब शायद 85 साल के धर्मपाल जी को लेकर मार्केटिंग वाले आ गए। हमारे सामने एक जवानी से लबरेज और उत्साह से भरा शख्स सामने था। गले में चमकती हुई मालाएं। सभी हीरे की ही रही होंगी। साथ में लाइट मारते चमकीले कपड़े। मैंने आधे घंटे के रिपीट प्रोग्राम के समय झट से उन्हें एकरिंग के लिए पास ही स्टूडियो ले गया और एंकर की कुर्सी पर बिठा दिया। मगर लो जी कर लो बात। उन्होंने झट से कहा, ‘वो चलाइए जिसे देखकर सब पढ़ते हैं।‘ उन्हें टेलीप्रॉम्पटर का नाम पता नहीं था। खैर, किसी तरह से मैंने उन्हें टीपी को ऊपर नीचे करना समझाया। वो काफी खुश नजर आ रहे थे। लेकिन उनसे भी ज्यादा खुश मार्केटिंग वाले नजर आ रहे थे। गुलाटी जी की आंखों में गजब की चमक थी। शरीर में फुर्ती और चेहरे पर ताजगी और रौनक। मानो अभी-अभी फेशियल करा के आए हों। मैंने उनसे जाकर कहा, ‘अब आप न्यूज पढ़ सकते हैं।‘ उन्होंने मेरी तरफ थोड़ी नाराजगी भरे लहजे में देखते हुए कहा, ‘वो आपकी एंकर कहां है? उसे भी मेरी बगल में बिठाइए।‘ शायद रितुल जोशी की ड्यूटी थी। किसी तरह उनकी एंकरिंग पूरी हुई। तब पता नहीं आजतक का कितना भला हुआ। मगर एंकरिंग के बाद वो चहकते हुए नजर आए। मेरी कुर्सी के पास आकर बड़ी विनम्रता से धन्यवाद कहा।
तबसे जब भी एमडीएच मसाला खरीदता हूं तो धर्मपालजी की ये कहानी बरबस याद आ जाती है। वैसे तो धर्मपाल गुलाटी जी के निधन की खबरें कई बार आईं और दो-तीन दफे तो अखबारों में छप भी गई, लेकिन वो इतनी आसानी से जाने वालों में नहीं थे। आज के अखबारों में उनके लिए प्रार्थना सभा और रस्म पगड़ी का विज्ञापन देखा तो सबकुछ आंखों के सामने कौंध गया। मानो कल की ही बात हो। गुलाटी जी अपने नाम से ना सही, लेकिन एमडीएच के नाम से आने वाले कई वर्षों तक याद किए जाएंगे। तबतक, जबतक कि कोई वॉलमार्ट, रियालंस या अडाणी उनके मसालों के ब्रांड पर कब्जा ना कर ले। विनम्र श्रद्धांजलि।

(वरिष्ठ पत्रकार संजय कुमार के फेसबुक वॉल से साभार)

रिपब्लिक टीवी के सीईओ को मुंबई पुलिस ने किया गिरफ्तार

republic tv ceo arrest

रिपब्लिक टीवी और मुंबई पुलिस का टशन अब भी जारी है. इसी कड़ी में मुंबई पुलिस ने नयी कार्रवाई करते हुए चैनल के सीईओ को हिरासत में ले लिया है.

रिपब्लिक टीवी के सीईओ विकास खानचंदानी को टीआरपी घोटाले की जांच के सिलसिले में रविवार सुबह गिरफ्तार किया गया और 15 दिसंबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत ने रिमांड आदेश जारी किया, जिसके तुरंत बाद, रिपब्लिक टीवी ने जोर देकर कहा कि कंपनी इस फैसले को बॉम्बे उच्च न्यायालय में चुनौती देगी। रिपब्लिक टीवी ने सुबह आरोप लगाया था कि यह गिरफ्तारी अवैध है।

खानचंदानी को रविवार तड़के मुंबई पुलिस की विशेष जांच टीम ने गिरफ्तार किया था।

अदालत की सुनवाई के दौरान, पुलिस ने 14 दिनों की हिरासत मांगी। पुलिस ने कहा कि आरोपी को अपराध के बारे में और इससे मिलने वाले लाभ के बारे में पता था।

हालांकि, खानचंदानी के वकीलों ने अपने पक्ष में तर्क दिया कि पुलिस पालघर लिंचिंग मामले (अप्रैल 2020) के कवरेज के बाद टीवी चैनल के पीछे पड़ी है। बावजूद इसके कोर्ट ने खानचंदानी को दो दिन की हिरासत में भेज दिया।

खानचंदानी की गिरफ्तारी के तुरंत बाद, रिपब्लिक टीवी ने एक कैंपेन शुरू किया जिसमें उनकी रिहाई की मांग की गई।

चैनल ने कहा, “रिपब्लिक टीवी एक स्वतंत्र समाचार संगठन पर हमलों को रोकने के लिए अदालतों को हस्तक्षेप करने के लिए राष्ट्रीय अपील जारी करता है।”

पिछले महीने, एसटीआई ने रिपब्लिक टीवी के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों सहित गिरफ्तार 12 अभियुक्तों के खिलाफ 1,400 पन्नों की चार्जशीट दायर की थी।

सूचना एवं प्रचार निदेशालय के डिप्टी डायरेक्टर नलिन चौहान लापता

nalin chauhan deputy director delhi govt
nalin chauhan deputy director delhi govt

सूचना एवं प्रचार निदेशालय (दिल्ली) के डिप्टी डायरेक्टर नलिन चौहान रहस्मय तरीके से अपने घर से लापता हो गए हैं और अबतक उनके बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है. इसी कारण उनके मित्र और रिश्तेदार खासे परेशान हैं और उन्हें ढूँढने के लिए सोशल मीडिया का भी सहारा ले रहे हैं. फेसबुक पर पत्रकार पवन जिंदल (Pawan Jindal) लिखते हैं –

आईआई एम सी के मेरे बैचमेट Nalin Chauhan पिछले चार दिन से अपने दिल्ली निवास से लापता हैं । कुछ दिन पहले उन्हें कारोना हो गया था और ठीक होने के बाद घर के साथ वाले फ्लैट में आइसोलेशन में रह रहे थे । गुरुवार दोपहर बिना बताए घर से निकल गए हैं और फोन घर पर ही छोड़ गए हैं । पुलिस जांच जारी है । सभी दोस्त परिचित ढूंढ रहे हैं । हमारा पूरा बैच पूरी ताक़त से सक्रिय है । मैं अपने पुराने दोस्त की तलाश में हरिद्वार ऋषिकेश क्षेत्र में आ पहुंचा हूं । आप अगर उन्हें कहीं देखें या कोई सूचना मिले तो कृपया मुझे 9818777257 पर तुरंत संपर्क करें।

आजतक के वरिष्ठ पत्रकार विकास मिश्र सूचना साझा करते हुए लिखते हैं –
हमारे मित्र, आईआईएमसी के सहपाठी नलिन चौहान Nalin Chauhan
कल अपने घर से निकले थे, अभी घर नहीं पहुंचे हैं। नलिन दिल्ली सरकार में सूचना अधिकारी हैं। जाने माने स्तम्भकार भी हैं। अगर आपको कहीं ये दिखें तो कृपया सूचित कीजिये। सारे परिजन बहुत परेशान हैं।

उनकी पत्नी ने भी नलीन चौहान के एफबी पर संदेश लिखा है और कोई जानकारी मिलने पर सूचना देने के लिए आग्रह किया है –
My husband ,Sh. Nalin Chauhan
, is missing from near his residence since yesterday morning (10.12.20) . He had been unwell for the last month due to Covid . He had recovered and returned from hospital on 5.12.20. He was a bit disturbed due to post covid stress , but we all were looking forward to being a family together with his return yesterday. But, due to unknown reasons he stepped out of campus and hasn’t returned . He is not carrying his phone , its at home . We have filled the missing report at Police Station. What we need right now , is your prayers and alertness if you get any information regarding his whereabouts.
I request you all to please not comment on this post unless important .
If you get any information about him, please text me .
Please call or text us at 9999852401 ,9711002778

नलिन चौहान गुरुवार सुबह 11 बजे से लापता हैं. उनका मोबाइल भी घर पर ही हैं. गौरतलब है कि कुछ दिन पहले वह कोरोना संक्रमित हो गए थे, लेकिन बाद में वे ठीक भी हो गए थे. उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट थाने में उनके परिजनों ने दर्ज करवा दी है और पुलिस जांच में लग भी गयी है. लेकिन अबतक कोई पुख्ता सबूत नहीं मिला है.

सोशल मीडिया पर मीडिया खबर

665,311FansLike
4,058FollowersFollow
3,000SubscribersSubscribe

नयी ख़बरें