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अमेजॉन प्राइम पर सबसे ज्यादा देखी जाने वाली हिंदी फिल्म बनी तूफान !

toofan on amazon prime
अमेज़न प्राइम पर तूफान की सफलता

ओटीटी अमेजॉन प्राइम (OTT News in Hindi) पर कुछ समय पहले ही रिलीज हुई फिल्म ‘तूफान’ ने रिकॉर्डतोड़ सफलता हासिल की है और 2021 में अमेजॉन प्राइम पर सबसे ज्यादा देखी जाने वाली हिंदी फिल्म बन गई है। अमेजॉन प्राइम वीडियो की तरफ से यह आंकड़ा जारी किया गया है। गौरतलब है कि इस फिल्म में फरहान अख्तर ने मुक्केबाज की मुख्य भूमिका अदा की है जिसे दर्शकों ने पसंद किया और रिलीज होने के पहले सप्ताह के भीतर ही सबसे ज्यादा देखे जाने वाले वीडियो के रूप में शीर्ष पर पहुँच गया।

फिल्म को भारत के 3,900 प्लस से अधिक कस्बों और शहरों में और दुनिया भर के 160 से ज्यादा देशों और क्षेत्रों में देखा गया है। इसके अलावा, स्थानीय भाषाओं की श्रेणी में और क्षेत्र में विश्व स्तर पर, फिल्म ‘नरप्पा’ (तेलुगु), ‘सरपट्टा परंबरई’ (तमिल) और ‘मलिक’ (मलयालम), भारत के 3,200 से अधिक कस्बों और शहरों में और 150 से अधिक देशों में देखी गईं।

भारतीय पत्रकार दानिश सिद्दीकी की तालिबान ने बेरहमी से हत्या की थी !

danish siddqui journalist
भारतीय पत्रकार दानिश सिद्दकी की तालिबान द्वारा निर्मम हत्या

माइकल रुबिन ने वाशिंगटन एक्जामिनर में भारतीय पत्रकार दानिश सिद्दकी की हत्या से संबंधित एक एक सनसनीखेज खुलासा किया है। उनकी रिपोर्ट के मुताबिक पुलित्जर पुरस्कार विजेता भारतीय फोटो जर्नलिस्ट दानिश सिद्दीकी केवल एक साधारण गोलीबारी में नहीं मारे गए थे, बल्कि तालिबान द्वारा उनकी बेरहमी से हत्या की गई थी। माइकल रुबिन ने वाशिंगटन एक्जामिनर में यह दावा किया है। स्थानीय अफगान अधिकारियों का कहना है कि सिद्दीकी ने अफगानिस्तान की राष्ट्रीय सेना की टीम के साथ स्पिन बोल्डक क्षेत्र की यात्रा की थी, ताकि पाकिस्तान के साथ लगती सीमा को नियंत्रित करने के लिए अफगान बलों और तालिबान के बीच संघर्ष को कवर किया जा सके।

रिपोर्ट में कहा गया है कि जब वे सीमा शुल्क चौकी के एक-तिहाई मील के भीतर पहुंच गए, तो तालिबान के हमले से टीम विभाजित हो गई और इस दौरान कमांडर और कुछ लोग सिद्दीकी से अलग हो गए।

इस हमले के दौरान सिद्दीकी को र्छे लगे, जिसके बाद वह और उनकी टीम एक स्थानीय मस्जिद में गए, जहां उन्हें प्राथमिक उपचार दिया गया। रिपोर्ट के अनुसार, जैसे ही यह खबर फैली कि एक पत्रकार मस्जिद में है, तालिबान ने हमला कर दिया।

स्थानीय जांच से पता चलता है कि तालिबान ने सिद्दीकी की मौजूदगी के कारण ही मस्जिद पर हमला किया था।

रिपोर्ट के अनुसार, सिद्दीकी जिंदा था और तालिबान ने उसे पकड़ लिया। तालिबान ने सिद्दीकी की पहचान की पुष्टि की और फिर उसे और उसके साथ के लोगों को भी मार डाला। रिपोर्ट में कहा गया है कि कमांडर और उनकी टीम के बाकी सदस्य उन्हें बचाने की कोशिश में मारे गए।

अमेरिकन एंटरप्राइज इंस्टीट्यूट के एक सीनियर फेलो रुबिन ने रिपोर्ट में लिखा है, हालांकि एक व्यापक रूप से प्रसारित सार्वजनिक तस्वीर में सिद्दीकी के चेहरे को पहचानने योग्य दिखाया गया है, मैंने अन्य तस्वीरों और सिद्दीकी के शरीर के एक वीडियो की समीक्षा की, जो मुझे भारत सरकार के एक सूत्र द्वारा प्रदान किया गया था, जिसमें दिखाया गया है कि तालिबान ने सिद्दीकी को सिर के चारों ओर पीटा और फिर उसके शरीर को गोलियों से छलनी कर दिया।

रुबिन ने कहा कि तालिबान की ओर से सिद्दीकी को शिकार बनाने, उन्हें मारने और फिर उनकी लाश को क्षत-विक्षत करने का निर्णय दिखाता है कि वे युद्ध के नियमों या वैश्विक समुदाय के व्यवहार को नियंत्रित करने वाले कन्वेंशन का सम्मान नहीं करते हैं।

रुबिन ने रिपोर्ट में कहा, खमेर रूज और तालिबान के बीच कई समानताएं हैं। दोनों ने नस्लवादी दुश्मनी के साथ कट्टरपंथी विचारधारा का संचार किया है। तालिबान हमेशा क्रूर रहा है, लेकिन संभवत: वे इस बार उनकी क्रूरता को एक नए स्तर पर ले गए, क्योंकि सिद्दीकी एक भारतीय थे। वे यह भी एक संकेत देना चाहते हैं कि पश्चिमी पत्रकारों का उनके नियंत्रण वाले किसी भी अफगानिस्तान में स्वागत नहीं है और वे उम्मीद करते हैं कि तालिबान के प्रचार को सच्चाई के रूप में स्वीकार किया जाएगा।

रुबिन ने रिपोर्ट में लिखा, वास्तव में, सिद्दीकी की हत्या से पता चलता है कि तालिबान ने निष्कर्ष निकाला है कि उनकी 9/11 से पहले की गलती यह नहीं थी कि वे क्रूर और निरंकुश थे, बल्कि यह कि वे हिंसक या अधिनायकवादी नहीं थे।पत्रकारों के लिए असली सवाल यह है कि विदेश विभाग सिद्दीकी की मौत को महज एक दुखद दुर्घटना बताने का ढोंग क्यों कर रहा है। (एजेंसी)
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खबरों की दुनिया में समाचार प्लस की वापसी, री-लॉन्च हुआ चैनल

samachar plus channel relaunch
samachar plus channel relaunch

खबरों की दुनिया में समाचार प्लस चैनल की वापसी एक बार फिर से हो गई है। गौरतलब है कि लंबे समय से इसकी रिलांचिंग की कोशिश चल रही थी जो अब जाकर सफल हुई। चैनल के नोयडा स्थिति दफ्तर से चैनल की शुरुआत की गई।

समाचार प्लस चैनल के सर्वेसर्वा उमेश कुमार हैं। पूर्व में यह उत्तराखंड और उत्तरप्रदेश पर केंद्रित चैनल था। खासकर उत्तराखंड में इसकी गहरी पैठ थी। लेकिन विवादों के बाद चैनल का प्रसारण रुक गया था जिसे अब फिर से लॉन्च किया गया।

खबरों की माने तो चैनल के साथ वरिष्ठ पत्रकार शैलेश भी जुड़े हैं। चैनल का लोगो (logo) और पंचलाइन को जस का तस (खबर वही, जो हमने कही) रखा गया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि दर्शक इस पुराने चैनल नए रूप में कैसे और कितना स्वीकारते हैं। चैनल के सीइओ उमेश कुमार ने चैनल के री-लॉन्च का वीडियो सोशल मीडिया पर डालते हुए लिखा – “समाचार प्लस के शुभारंभ पर आप सभी का प्यार और आशीर्वाद चाहिए। कोशिश करूँगा कि आप सबकी अपेक्षाओं पर खरा उतर सकूँ।”

यह भी पढ़े ⇒ बेशर्म सरकारों का आप कोई इलाज नहीं कर सकते – उमेश कुमार,एडिटर-इन-चीफ,समाचार प्लस

टाइम्स नेटवर्क का हिन्दी चैनल टाइम्स नाउ नवभारत, नविका कुमार बनी प्रधान संपादक

Times Now Navbharat
Times Network's Hindi channel Times Now Navbharat

हिन्दी समाचार चैनलों की दुनिया में नया हिन्दी चैनल टाइम्स नाउ नवभारत – Times Now Navbhart News in Hindi

टाइम्स नेटवर्क के बहुप्रतीक्षित हिन्दी समाचार चैनल के लॉन्च की घोषणा आखिरकार हो ही गई। गौरतलब है कि टाइम्स नेटवर्क के हिन्दी चैनल के लॉन्च को लेकर पहले भी कई बार अफवाह उड़ी , लेकिन चैनल अस्तित्व में नहीं आया। लेकिन अबकी किन्तु-परंतु पर विराम लगाते हुए टाइम्स नेटवर्क ने ट्विटर पर टाइम्स नाउ के हिन्दी चैनल के लॉन्च होने की घोषणा कर दी। इस हिन्दी चैनल का नाम ‘टाइम्स नाउ नवभारत’ होगा। यह हाई डेफिनिशन (एचडी) पर होगा। आजतक एचडी और डीडी न्यूज एचडी के बाद हाई डेफिनिशन (एचडी) पर आने वाला यह तीसरा चैनल होगा। चैनल जल्द लॉन्च होगा। वेब पर इसका लोगो (logo) भी जारी किया जा चुका है और टाइम्स नाउ के नोयडा (फिल्म सिटी) स्थित दफ्तर में भर्तियों के लिए इंटरव्यू जोर-शोर से जारी है।

टाइम्स नाउ नवभारत की प्रधान संपादक नविका कुमार

टाइम्स नेटवर्क के आगामी हिंदी समाचार चैनल के प्रधान संपादक के पद पर नविका कुमार (Navika Kumar) को नियुक्त किया गया है। वे टाइम्स नाऊ (अंग्रेजी) में बतौर एंकर पहले से ही थी। अपनी नई भूमिका में हिन्दी चैनल की रणनीति और प्रबंधकीय निर्णयों में भी अपनी भूमिका निभाएंगी। टाइम्स नाऊ पर अपने शो न्यूजआवर को भी वे पहले की तरह जारी रखेंगी।

भारतवर्ष का अंतर्राष्ट्रीय चैनल – टीवी9

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हिन्दी में अंतर्राष्ट्रीय खबरों का नया ठिकाना

भारतीय चैनलों के लिए एक समय तक अंतर्राष्ट्रीय खबरों का मतलब पाकिस्तान होता था। पाकिस्तान से आगे बढ़े तो गाहे-बगाहे चीन, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल तक पहुंचते-पहुंचते ये हांफने लगते थे। इन देशों की भी खबरें करते हुए इनका दायरा बहुत सीमित होता था। मसलन बांग्लादेश की खबर में बांग्लादेशी घुसपैठिए तो नेपाल की खबर में किसी भगौड़े अपराधी की खबर.. । वास्तव में दूसरे देशों के अंदर क्या चल रहा है और उसका अंतर्राष्ट्रीय जगत पर क्या असर पड़ेगा, उसकी खबर हिन्दी के किसी भी समाचार चैनल पर दिखाई नहीं देता था। अंतर्राष्ट्रीय खबरों के लिए दर्शकों को मजबूरी में अंग्रेजी चैनल या फिर बीबीसी या सीएनएन जैसे चैनलों का रूख करना पड़ता था।

लेकिन पिछले एक वर्ष से स्थितियों में बदलाव आया है और खबरिया चैनलों पर अंतर्राष्ट्रीय खबरों की बाढ़ या गई है। आप सोंच रहे होंगे कि वर्षों से एक ही ढर्रे पर चल रहे हिन्दी समाचार चैनलों में ऐसा बदलाव कैसे आ गया! दरअसल इस बदलाव का श्रेय एक ऐसे नए चैनल का है जिसने बेहद कम समय में भारतीय दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी है और टॉप चैनलों की सूची में महज एक – डेढ़ साल में ही शामिल होकर पुराने चैनलों के सामने कड़ी टक्कर पेश की है। यह चैनल कोई और नहीं, बल्कि टीवी 9 भारतवर्ष है जिसने हिन्दी में अंतर्राष्ट्रीय खबरों की नयी परिभाषा ही गढ़ दी। चैनल ने लकीर का फकीर बनने की बजाए भारतवर्ष के स्क्रीन पर ऐसी वृहद अंतर्राष्ट्रीय खबरों की सीमा खींची कि दर्शकों की अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी चैनल की वर्षों पुरानी ख्वाहिश पूरी हो गई।

हालांकि जब विनोद कापड़ी और अजीत अंजुम जैसे दिग्गजों के साथ विवादों के साये में चैनल लॉन्च हुआ तो सबको यही उम्मीद थी कि यह चैनल भी राजनीतिक नूरा-कुश्ती पर केंद्रित रहेगा। शुरुआती दौर में कुछ ऐसा हुआ भी। लेकिन फिर टीवी-9 में ऐसा बदलाव आया कि दर्शकों की एक बड़ी संख्या टीवी-9 की तरफ खींची चली आयी। चैनल ने परंपरागत खबरिया चैनलों के खांचे से निकलकर नई लकीर खिंचनी शुरू कर दी। अंतर्राष्ट्रीय खबरों को दिलचस्प तरीके से दिखाया जाने लगा। भारत-चीन विवाद के अलावा चीन की जितनी खबरें टीवी-9 ने दिखाई, शायद ही किसी और चैनल ने उतनी पहले कभी दिखाया हो। आर्मेनिया – अजरबैजान के युद्ध की लाइव कवरेज के लिए अपने रिपोर्टर अभिषेक उपाध्याय तक को भेज दिया। ऐसा करने वाला टीवी-9 अकेला समाचार चैनल था।

टीवी-9 के इस ‘अंतर्राष्ट्रीय’ प्रयास  को दर्शकों ने भी खूब सहारा और चैनल ने न केवल अपनी पहचान बनाई बल्कि उसे ऐसे प्रतिबद्ध दर्शक भी मिले जो टीवी-9 ही अब देखना पसंद करते हैं। संक्षेप ने टीवी-9 के रूप में भारतीय दर्शकों को उनका अपना अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी चैनल मिल गया है जिसकी कमी लंबे समय से महसूस की जा रही है।

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