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भारतीय पत्रकार विकास परिषद के अध्यक्ष बने विजय यादव

मुंबई, भारतीय पत्रकार विकास परिषद ने अध्यक्ष सहित अपने सभी नए पदाधिकारियों घोषणा कर दी है. नवगठित कमिटी में वरिष्ठ पत्रकार विजय यादव को अध्यक्ष , संदीप शुक्ला (न्यूज़ एक्सप्रेस ) व भगवती मिश्रा (दोपहर का सामना ) को उपाध्यक्ष , श्यामजी मिश्रा महासचिव, संगठन सचिव विजय वर्मा , मनीष झा ( नवभारत टाइम्स ), बृजभान जैसवार (टीवी ९) व अजय मिश्रा उप सचिव नियुक्त हुए है. फोटो जर्नलिस्ट दिनेश परेशा कोषाध्यक्ष पद पर कार्यरत होंगे. इसके आलावा विशाल वर्मा, दिलीप पटेल, फरजाना अंसारी , कुमार राजेश, प्रकाश अवस्थी, अनिल मिश्रा नए कार्यकारिणी सदस्य होंगे.

नवभारत और हमारा महानगर के पत्रकार ओवरटाइम से हलकान

मुंबई : मुंबई से प्रकाशित दैनिक नवभारत और दैनिक हमारा महानगर के पत्रकारों को मजबूरन करनी पड़ रही है हमाली । बता दे कि मुंबई के हिंदी समाचार पत्रों की सूची में टॉप तीन में नवभारत और हमारा महानगर का नाम आता है । इस के बावजूद आज के समय में पत्रकारों भर्ती नहीं किये जाने के कारण जो कर्मचारी है उनसे ही दूसरे बीट के काम करने को मजबूर है।

नवभारत के मुंबई और नवी मुंबई में कर्मचारियों की भरी कमी है । वही नवभारत मुंबई कार्यालय में कार्यरत और मंत्रालय कवर करने वाले विजय सिंग ने पिछले सप्ताह भास्कर ज्वाइन करने से अब मंत्रालय का पूरा काम एक ही पत्रकार पर ही आ गया है । वही नवभारत के नवी मुंबई स्थित कार्यालय में कार्यरत राजित यादव और ओमप्रकाश ढोर के साथ ही विमल मिश्र को नियुक्त किया गया है।

आज़म खां चाबुक बयान पर प्रेस काउन्सिल से जांच की मांग

मेरे द्वारा आज़म खां, नगर विकास मंत्री, उ०प्र० के द्वारा सरकारी अफसरों द्वारा डंडे की भाषा समझने सम्बंधित बयान की सत्यता के सम्बन्ध में जस्टिस मार्कंडेय काटजू, अध्यक्ष, प्रेस काउन्सिल ऑफ इंडिया से जांच कराये जाने की मांग की गयी है.

आज़म खां द्वारा समाजवादी पार्टी मुख्यालय में 30 जनवरी 2013 को कथित रूप से सरकारी अफसरों द्वारा डंडे की भाषा समझने और उन पर चाबुक चलाये जाने के बयान के विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित होने के अगले दिन उन्होंने आधिकारिक बयान दे कर इससे इनकार किया और इसे भ्रामक और उनकी छवि खराब करने की साजिश बताया.

मैंने मीडिया की विश्वसनीयता के दृष्टिगत उनसे इस पूरे प्रकरण की अपने स्तर से तत्काल वृहत जांच कराये जाने की मांग की है कि आज़म खां के बयान सम्बंधित पहली खबरें सही हैं अथवा नहीं ताकि इससे यह स्पष्ट हो जाए कि उनके खंडन में कोई सच्चाई है अथवा नहीं.

डॉ नूतन ठाकुर कन्वेनर,

नेशनल आरटीआई फोरम,

लखनऊ # 94155-34525

और शहीद हो गया ‘राउडी’ धीरेन्द्र प्रताप सिंह

पत्रकार धीरेन्द्र प्रताप सिंह नहीं रहे. उन्हें याद कर रहे हैं प्रशांत कुमार.

कल तक हंस-हंसाकर सबसे बात करने वाला अक्खड़ पत्रकार धीरेन्द्र प्रताप सिंह अपने पत्रकार मित्रों को छोड़कर हमेशा के लिए चला जायेगा, यह बिहार एवं झारखंड में किसी को पता नहीं था। मंगलवार की सुबह जब यह मनहूस खबर मुझे मिली कि अपना जिंदादिल धीरेन्द्र प्रताप सिंह हमेशा-हमेशा के लिए हम सबको छोड़कर चला गया है, तो मैं रो पड़ा। यह संभव नहीं था। इस बात की तसदीक के लिए जब मैंने हिन्दुस्तान धनबाद संस्करण के सीनियर काॅपी एडिटर सुबोध बिहारी कर्ण से पूछा तो वह भी धीरेन्द्र प्रताप सिंह के नहीं रहने की पीड़ा से छटपटा उठे। उन्होंने कहा कि सोमवार की शाम 4.30 बजे पत्रकार धीरेन्द्र प्रताप सिंह की हत्या कनपटी में गोली मारकर उनके आवास सूर्य विहार काॅलोनी के समीप कर दी गयी। उनकी हत्या करने वालों में गैंग्स आॅफ वासेपुर के हत्यारों का नाम दबी जुबान से धनबाद में लिया जा रहा है। मैं आवाक् एवं व्यथित हूँ।

आर्यन टीवी में पत्रकारों को सैलरी नहीं मिल रही, उधर होटल खुल रहा है

aryan tv

पटना. मीडिया इंडस्ट्री में ये चलन चल पड़ा है कि कभी भी कटौती करनी हो तो पत्रकारों की जेब पर ही डाका डालो और उनकी सैलरी ही रोक दो. आर्यन टीवी में आजकल ऐसा ही हो रहा है. पाटलिपुत्र ग्रुप ऑफ कंपनीज के बिहार पर केंद्रित चैनल ‘आर्यन टीवी’ में पिछले दो माह से कर्मचारियों को सैलरी नहीं मिली है. दिसम्बर 2012 और जनवरी माह का वेतन अभी तक नहीं मिला है. दूसरी तरफ यही ग्रुप एक होटल patliputraexotica खोल रहा है. स्पष्ट है कि इन्हें पत्रकारों की फ़िक्र नहीं. वे मरे या जियें. हालात और खराब हो गए जब आज सुबह से LIVE नहीं जा रहा था क्योंकि लीज लाईन डाउन हो गया था. हालाँकि दस बजे के बाद से फिर सब सामान्य हो गया और लाइव जाने लगा. लेकिन ये आए दिन की समस्या है.

दरअसल 4 जुलाई 2012 को एच आर निशा रतनाकर के नोटीस के द्वारा सी.एल बंद किया गया और कहा गया की दिसम्बर माह की सैलरी में जोड़ कर दिया जाएगा लेकिन वह अब नहीं दिया जा रहा है.

आर्यन टीवी की हालत का अंदाज़ा इसी बात से लगा सकते हैं कि पीएफ और ई.एस.आई तो काटा जाता है लेकिन सालों गुजर गए आज तक किसी को भी पी.एफ खाता न. नहीं दिया गया. पता नहीं वो पैसा कहां जा रहा है और ना ही ESI की किसी भी कर्मचारी को सुविधा दी जा रही है (पता नहीं पी.एफ अधिकारी क्या पी कर सोए है?).

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