ऑपरेशन प्राइम मिनिस्टर क्यों किया गया, जानिए विनोद कापड़ी की ज़ुबानी

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न्यूज़ एक्सप्रेस ने ऑपरेशन प्राइम मिनिस्टर क्यों किया? चैनल के एडिटर-इन-चीफ विनोद कापड़ी ने बीबीसी से बातचीत में इस बात का खुलासा किया. पढ़िए पूरी रिपोर्ट :

 

न्यूज़ एक्सप्रेस का नया अंदाज़
न्यूज़ एक्सप्रेस का नया अंदाज़
एक निजी समाचार चैनल न्यूज़ एक्सप्रेस के जनमत सर्वेक्षण करने वाली कुछ एजेंसियों पर किए गए स्टिंग ऑपरेशन के बाद इंडिया टुडे समूह ने ‘सी वोटर’ नाम की कंपनी से किए करार को स्थगित कर दिया है.

इंडिया टुडे समूह की क़ानूनी शाखा के प्रमुख पुनीत जैन का कहना है कि उन्होंने सी-वोटर के साथ आने वाले क्लिक करें आम चुनाव के सर्वेक्षण के लिए अनुबंध किया था जिसे अब वह फ़िलहाल स्थगित कर रहे हैं.

एक अन्य प्रमुख अंग्रेज़ी चैनल का भी कहना है कि उसने भी सर्वेक्षण के अनुबंध को रद्द कर दिया है.

वहीं सी वोटर के प्रबंध निदेशक और मुख्य संपादक यशवंत देशमुख ने ट्विटर पर लिखा है कि पहले भी न्यूज़ एक्सप्रेस चैनल के लिए उनके संस्थान ने कई चुनाव पूर्व सर्वेक्षण किए हैं बस इस बार उन्होंने न्यूज़ एक्सप्रेस पर आने से इनकार कर दिया.

यशवंत देशमुख ने ट्वीट किया, “मेरे वकील को जो करना है, वे करेंगे और मुझे जो करना है, वह मैं करूंगा. इसके अलावा मेरी टीम को जो करना है वह करेगी. हम अपने अगले सर्वेक्षण को लेकर व्यस्त हैं.”

न्यूज़ एक्सप्रेस ने ऐसी कुल 11 कंपनियों के बारे में स्टिंग ऑपरेशन किया था.

‘ऑपरेशन प्राइम मिनिस्टर’ नाम से प्रसारित किए गए इस स्टिंग ऑपरेशन में इन कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों को कथित रूप से यह कहते दिखाया गया है कि वह सर्वेक्षण के आंकड़ों में हेरा-फ़ेरी कर सकते हैं.

हालांकि इस स्टिंग ऑपरेशन की सत्यता की जांच नहीं हो पाई है लेकिन प्रसारित किए गए दृश्यों में एक कंपनी के बिज़नेस डेवलपमेंट मैनेजर को कथित रूप से यह भी कहते दिखाया गया है कि सर्वेक्षण के आंकड़ों में हेर-फेर करने के लिए भी अलग से रकम ली जाएगी.

न्यूज़ एक्सप्रेस चैनल के संपादक विनोद कापड़ी ने बीबीसी को बताया कि उन्होंने चुनाव आयोग द्वारा पिछले साल अक्तूबर में राजनीतिक दलों को लिखे गए पत्र को ध्यान में रखते हुए ऐसी कंपनियों के खिलाफ क्लिक करें स्टिंग ऑपरेशन करने का मन बनाया.

चुनाव आयोग ने अपने पत्र के ज़रिए विभिन्न दलों से चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों के बारे में राय मांगी थी.

इस स्टिंग ऑपरेशन के प्रसारण के बाद कई राजनीतिक दलों ने इस तरह के सर्वेक्षणों की वैधता पर सवाल खड़े किए हैं. इन दलों ने चुनाव आयोग से मांग की है कि वह इस तरह के सर्वेक्षणों पर प्रतिबंध लगाए.

चुनाव आयोग का भी कहना है कि चुनाव से पहले इस तरह के सर्वेक्षण परिणामों पर असर डालते हैं.

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