दल्लों की जमात बनी मोतिहारी नेशनल जर्नलिस्ट यूनियन ऑफ़ इंडिया

• संगठन के कार्यकारी सदस्यों के मनोनयन पर सवालिया निशान
• जिला अध्यक्ष किसी मीडिया बैनर से नहीं जुड़े
• खास खबरची ही मनोनयन प्रक्रिया में शामिल
• सीनियर व योग्य पत्रकारों में नाराजगी

मोतिहारी. पत्रकारों के हित में, पत्रकारों द्वारा, पत्रकारों में से चयनित योग्य व्यक्तियों को मिलाकर बनाया गया संगठन है नेशनल जर्नलिस्ट यूनियन ऑफ़ इंडिया. इसका मुख्य काम है पत्रकारों के हक़-हुकूक को लेकर आवाज उठाना. लेकिन एक ज़माने में प्रतिष्ठित रहे एनजेयूआई की जिला शाखा पर भी अब माफिया तंत्र हावी हो चले हैं. उतर भारत की किसी भी जिला शाखा की स्थिति अब किसी से भी छुपी नहीं है. खासकर, एनजेयूआई की मोतिहारी शाखा तो अपनी कारगुजारियों से दलालों व फ्रॉडो की जमात के तौर पर चर्चित हो गई है. सबका कहना आम है कि संगठन में ऐसे लोगों की पैठ हो गई है. जिनका लिखने-पढ़ने से नाता तो दूर की बात है, वे किसी स्तरीय मीडिया बैनर से भी नहीं जुड़े हैं. पत्रकारों के कल्याण की बात कह संगठन का महत्वपूर्ण पद हथियाने वाले ये दल्ले, पीत पत्रकारिता का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण बन अपना धंधा चमकाने में लगे हैं. बीते दिनों संगठन के जिला अध्यक्ष के चुनाव में हुई धांधली को लेकर योग्य पत्रकार कानाफूसी कर थूक-थूकियाते हुए छिः छिः कर रहे है.


पिछले 27 जनवरी को स्थानीय रेड क्रॉस भवन में संगठन की बैठक हुई. इसकी अध्यक्षता एनजेयूआई के प्रदेश महासचिव राकेश प्रवीर ने की. इस बैठक में एक खास बिरादरी के खबरचियों की ही ज्यादा संख्या थी. हालाँकि इन्हें भी सीमित मात्रा में बुलाया गया था. और आनन-फानन में बैठक कर इन्हीं सीमित लोगों की सहमति से संजय ठाकुर को अध्यक्ष, अरुण तिवारी को महासचिव व अजय कुमार को कोषाध्यक्ष मनोनित किया गया. जबकि नियम के मुताबिक संगठन के कार्यकारी सदस्यों का चुनाव इससे जुड़े तमाम सदस्यों का मत लेकर करना है. इसमें जिला से लेकर अनुमंडल व प्रखंड स्तरीय पत्रकार सदस्यों की सहभागिता जरूरी है.

पर कायदे-कानून को ताक पर रख जिला शाखा ने करीबी लोगों से लौबी बाजी की बदौलत कार्यकारी सदस्यों का चयन कर लिया. अब इससे बड़ी धांधली क्या सकती है कि अध्यक्ष संजय ठाकुर खुद कई महीने से किसी बैनर से नहीं जुड़े हैं. कुछ महीने पहले ये राष्ट्रीय सहारा जैसे अखबार का प्रभारी हुआ करते थे. पर कई गंभीर आरोपों के चलते इन्हें निकाल दिया गया. तब से बेरोजगार हैं. इतना जरूर है पत्रकारिता का धौंस दिखा पत्नी को पंचायत चुनाव में जीता मुखिया बना दिए हैं. फिलहाल पंचायत विकास फंड व अध्यक्ष पद का रौब दिखा हकीमों की दलाली से इनकी रोजी-रोटी चल रही है.

जबकि महासचिव अरुण तिवारी पटना से प्रकाशित अपराधियों को महिमा मंडित करने वाली पत्रिका समकालीन तापमान से जुड़े हैं. ऐसी पत्रिका से जुड़े शख्स के व्यक्तित्व की पड़ताल कठिन नहीं है. वही कोषाध्यक्ष अजय कुमार शहर से सटे तुरकौलिया प्रखंड से हिंदुस्तान के संवाददाता हैं. पूरे जिले में इनकी पहचान एक उम्दा सेटर व खाद माफिया के रूप में है. खैर, देखा जाए तो जिले में आधे दर्जन ऐसे खबरची हैं जो मेहनत की लूट में शामिल होने के बावजूद गंभीर छवि रखते है. हाल ही में हुए संगठन के चुनाव की प्रणाली से इन योग्य उम्मीदवारों में नाराजगी है. ऐसे में, अहम सवाल यह उठता है कि इन चंद काबिल लोगों को दरकिनार कर व अन्य पत्रकारों को शामिल किए वगैर संगठन का चुनाव कहाँ तक जायज है.

(मोतिहारी से स्वतंत्र पत्रकार मुकेश विकास की रिपोर्ट.)

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