मजदूरों से मीडिया को इतना परहेज और घृणा क्यों है?

जगदीश्वर चतुर्वेदी

स्टेटस 1 : मीडिया में आए दिन हर तरह के पर्व और उत्सव पर कवरेज मिलेगा लेकिन मजदूर दिवस पर मजदूरों के ऊपर, मजदूरों की बस्ती या मजदूरों की समस्याओं पर कवरेज नहीं मिलेगा।

सवाल यह है मजदूरों से मीडिया को इतना परहेज और घृणा क्यों है? क्या मजदूरों का इस समाज में कोई योगदान नहीं है ? क्या मजदूर टीवी दर्शक नहीं होते या अखबार के पाठक नहीं होते ?

जो लोग आए दिन हरामखोर नेताओं और देशद्रोही विचारधारा के पक्ष में लिखते रहते हैं और वामनेताओं के खिलाफ घृणा परोसते रहते हैं वे कभी अपने दिल में झांक कर देखें देश को किसने बनाया है मजदूरों ने या हरामखोरों ने ?

 

स्टेटस 2 :फेसबुक मित्र पता करें उनके इलाके के अखबार में मई दिवस का कवरेज है या नहीं, उनके इलाके में दिख रहे टीवी चैनल में मई दिवस का कवरेज है या नहीं ?

मजदूरों को मीडिया में अदृश्य रखने का अर्थ है मजदूर की उपस्थिति और भूमिका को अस्वीकार करना। मित्रो, मजदूर है और वह करोड़ों की संख्या में है,हर क्षेत्र में उसकी सकारात्मक भूमिका है। मजदूरों के बिना, उनके सकारात्मक सोच के बिना आप आधुनिक समाज का निर्माण ही नहीं कर सकते । भारत के मजदूरवर्ग और उससे जुड़े संगठन देशभक्ति और सामाजिक एकता बनाए रखने में अग्रणी भूमिका निभाते रहे हैं ।

(स्रोत-एफबी)

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