राजदीप अपने ही ‘पोस्ट’ में गोल मारने के बाद किसी खिलाड़ी की पीठ थप-थपाई जाती है क्या ?

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आलोक कुमार

IMG00067-20140930-0106कल मेडीसन – स्क्वायर के बाहर मशहूर पत्रकार राजदीप सरदेसाई के साथ अप्रवासी भारतीयों ने , राजदीप के द्वारा देश के प्रधामन्त्री की छवि को धूमिल करने के उद्देश्य से पूछे गए विद्वेषपूर्ण सवालों के उपरान्त , जैसा सलूक किया उससे फिर से एक बार ये सवाल उठता है कि “मीडिया को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर हस्तक्षेप की कितनी ‘दूरी’ दी जानी चाहिए ?” अंतर्राष्ट्रीय फ़लक पर और वहाँ के परिवेश में हम पत्रकारों ये समझना होगा कि हम एक पत्रकार होने के पहले भारतवासी हैं और विदेशी सरजमीं पर प्रधानमंत्री किसी दल विशेष का प्रतिनिधि नहीं अपितु देश का प्रतिनिधितित्व कर रहा होता है .

देश के भीतर आप अगर समालोचक की भूमिका में रहते हैं तो ठीक है , वो भी निष्पक्षता से , लेकिन विदेशी सरजमीं पर अगर आप अपना दायित्व भूलकर ‘गिरगिटों’ सा या देश की मर्यादा को खंडित करने वाला आचरण करते हैं तो जो मेडीसन – स्क्वायर के बाहर हुआ उसमें ‘आप’ किसी से कोई सहानभूति की उम्मीद नहीं कर सकते. अपने ही ‘पोस्ट’ में गोल मारने के बाद किसी खिलाड़ी की पीठ थप-थपाई जाती है क्या ? वैसे भी आज भारत में मीडिया , विशेषकर इलेक्ट्रोनिक मीडिया, और उससे जुड़े लोगों की भूमिका सवालिया घेरों में है !!

इस पूरे घटनाक्रम की वीडियो – क्लिपिङ्ग्स (जैसा कि न्यूज- चैनलों पर दिखाया जा रहा है ) देखने के बाद ये बिलकुल स्पष्ट हो जाता है कि राजदीप के असहज और अमर्यादित सवालों का जब वहाँ मौजूद लोगों ने विरोध किया तो राजदीप ने पहले अपशब्दों का प्रयोग किया और हाथा-पाई की शुरुआत भी राजदीप के द्वारा ही की गई . ये एक पत्रकार का आचरण तो कहीं से नहीं है अपितु ये साफ तौर पे दर्शाता है कि राजदीप की मंशा ‘कुछ और ‘ थी !! और शायद राजदीप को भी अपनी गलती का अहसास हुआ है तभी तो उन्होंने चुप्पी साध ली और इस मामले को तूल नहीं दिया अन्यथा भारत के टीवी चैनलों पर कोहराम मच जाता. जहाँ तक मैं राजदीप को जानता हूँ अगर वो गलत नहीं होते तो चुप्प बैठने वालों में से नहीं थे l

यहाँ एक बात और जोड़ना चाहूँगा कि अगर यही घटना भारत में प्रधानमंत्री के किसी कार्यक्रम के दौरान घटित होती तो उसे सांप्रदायिक रंग देकर ऐसा कोहराम मचाया जाता मानों भारत में प्रेस की आजादी पर हमला हो रहा हो और उससे जुड़े लोगों को सीधे तौर पे आरएसएस , वीएचपी , बजरंग दल से जुड़ा बताया जाता .

आलोक कुमार

(वरिष्ठ पत्रकार व विश्लेषक ),

पटना .

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