पुस्तक संस्कृति का विकास जरूरीः लीलाधर मंडलोई

0
557
पुस्तक संस्कृति का विकास जरूरीः लीलाधर मंडलोई

प्रेस विज्ञप्ति

पुस्तक संस्कृति का विकास जरूरीः लीलाधर मंडलोई
पुस्तक संस्कृति का विकास जरूरीः लीलाधर मंडलोई

नई दिल्ली के प्रगति मैदान में चल रहे विश्व पुस्तक मेले के दूसरे दिन राजकमल प्रकाशन समूह ने वर्ष 2014 के अपने कृति उपलब्धि पर एक परिचर्चा का आयोजन किया। इस परिचर्चा में बोलते हुए वरिष्ठ साहित्यकार व भारतीय ज्ञानपीठ के निदेशक लीलाधर मंडलोई ने पुस्तक संस्कृति को बढ़ावा देने पर बल देते हुए कहा कि हमारा ध्यान पुस्तक संस्कृति को बढावा देने पर होना चाहिए। वहीं वरिष्ठ साहित्यकार शिवमूर्ति ने कहा कि राजकमल प्रकाशन समूह ने अपने प्रकाशकीय दायित्वों का हमेशा से निर्वहन किया है। वह इतने वर्षों में अपनी स्तरीयता को बनाए हुए है और समय के साथ तालमेल बिठाकर चल रहा है, जो कि पुस्तक-पाठक व लेखक के लिए बेहद सकारात्मक है। इस मौके पर शिवमूर्ति ने कहा कि जिस तरह से राजकमल प्रकाशन समूह सकारात्मक प्रचार के जरिए हिन्दी की किताबों को पाठकों से जोड़ने का काम कर रहा है वह अनुकरणीय है। हिन्द युग्म प्रकाशन के निदेशक शैलेश भारतवासी ने सोशल मीडिया पर बढ़ रही पठनीयता व उभरते लेखकों की ओर ध्यान आकृष्ट कराते हुए कहा कि यह पाठकों व लेखकों के बीच एक नया इंटरशेक्सन बना रहा है, इससे प्रकाशक समुदाय को लाभ उठाने की जरूरत है।

कार्यक्रम का संचालन कर रहे राजकमल प्रकाशन समूह के संपादकीय निदेशक सत्यानंद निरुपम ने बताया कि पिछले एक वर्ष में राजकमल प्रकाशन समूह ने समय के साथ-साथ अपना तारतम्य बिठाने की कोशिश की है। नए माध्यमों से पाठकों तक पहुंचने का प्रयास लगातार जारी है। हम राजकमल प्रकाशन समूह की वेबसाइट नए सिरे से लॉन्च करने जा रहे हैं। अपनी वेबसाइट की खूबियों की चर्चा करते हुए सत्यानंद निरुपम ने बताया कि राजकमल प्रकाशन समूह अपने सभी लेखकों को अपनी वेबसाइट से जोड़ रहा है, जहां वे अपनी किताबों की बिक्री की जानकारी भी प्राप्त कर पायेंगे। पाठकों से जुड़ने के क्रम में हम इस वर्ष 54 पुस्तक मेलों में सम्मिलित हुए।

‘एडविना और नेहरू’ की मांग बढ़ी
राजकमल प्रकाशन समूह के स्टॉल पर पहले दिन की तरह ही दूसरे दिन भी पुस्तक प्रेमियों की भीड़ लगी रही। राजकमल प्रकाशन समूह की तमाम श्रेणियों की पुस्तकों के बीच आज ‘एडविना व नेहरू’ पुस्तक को लेकर पाठकों की रूचि ज्यादा दिखी। गौरतलब है कि यह किताब नेहरू – एडविना के संबंध व भारतीय राजनीति को संदर्भ में रखकर कैथरीन क्लामाँ ने लिखी है। इसका हिन्दी अनुवाद निर्मला जैन ने किया है। रवीश कुमार किताब ‘इश्क़ में शहर होना’ के प्रति नई पीढ़ी की दिलचस्पी जबरदस्त रही। राजकमल प्रकाशन समूह द्वारा क्रिकेट प्रेमियों का खास ध्यान रखते हुए लाइव कमेंट्री सुनाने की व्यवस्था भी की। सहज समानांतर कोश, भारत में मानवाधिकार, राग दरबारी, मैला आंचल, निवार्सन, उपसंहार, आधा गाँव, राष्ट्रीय महत्व के 100 भाषण के साथ-साथ प्रो. तुलसी राम की पुस्तक मुर्दहिया (आत्मकथा) व मणिकर्णिका की खासी मांग रही।

आज हमारे स्टॉल पर वरिष्ठ साहित्यकार अखिलेश, चन्द्रकांता, अल्पना मिश्र, सुमन केसरी, हरीश आनंद, मोहनदास नैमिशराय, लीलाधर मंडलोई सहित कई जानी-मानी साहित्यिक हस्तियां उपस्थित हुईं।

हिन्दी साहित्य में युवा सशक्त सृजन कर रहे हैं : अखिलेश
राजकमल प्रकाशन समूह के स्टॉल पर पधारे वरिष्ठ साहित्यकार अखिलेश ने कहा कि युवाओं में हिन्दी साहित्य के प्रति बढ़ता रूझान हिन्दी साहित्य के लिए सकारात्मक संकेत हैं। उन्होंने कहा कि जब हिन्दी साहित्य में युवा पीढ़ी सशक्त सृजन कर रही है तो निश्चित ही युवा पाठक बड़े तादाद में होंगे।

कल का कार्यक्रम
रू-ब-रू लप्रेकः इश्क़ की नयी कहन
(रवीश कुमार, विनीत कुमार, गिरीन्द्रनाथ झा, विक्रम नायक, निधीश त्यागी और पियूष मिश्रा)
स्थान- हॉल न. 6
समय- 2 बजे से 3 बजे तक
2
जूठन भाग दोः ओमप्रकाश वाल्मीकि
संस्मरण –
उपस्थितिः श्रीमती चंद्रा वाल्मिकी, विमल थोराट एवं शिवमूर्ति
स्थान- लेखक मंच
हॉल न.-12
समय 4:20 5:20

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

one + 3 =

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.