राहुल गांधी कम-से-कम अर्णब के शो से नरेंद्र मोदी की तरह भागे तो नहीं

रवि प्रकाश

राहुल गाँधी - अर्णब गोस्वामी
राहुल गाँधी – अर्णब गोस्वामी

राहुल गांधी ने अपने पहले इंटरव्यू में जिस मैच्योरिटी के साथ अर्णब के सवालों को लिया, उसकी तारीफ करनी पड़ेगी। हालांकि, एक-आध मौके पर वह फिसले भी लेकिन जल्दी ही अपने को संभाल भी लिया। राहुल ने सभी सवालों को गंभीरता से लिया और सहज तरीके से उनके जवाब दिए।

वरना, वे नरेंद्र मोदी की तरह इंटरव्यू बीच में ही छोड़कर भाग सकते थे। आपको याद ही होगा कि करण थापर के शो से नरेंद्र मोदी कैसे बाग खड़े हुए थे। जिननकी यादाश्त कमजोर है उन दोस्तों के लिए नीचे उस इंरव्यू का लिंक भी डाल दूंगा। (www.youtube.com/watch?v=QHS_eSoOBzg)

 

आनंद प्रधान

rahul arnab iv final2यही होता है जब आप बड़े-बड़े दावे करते हैं, हाई मोरल ग्राउंड लेते हैं और पी.आर कम्पनियाँ आपकी साफ़-सुथरी छवि गढती हैं लेकिन उनके बारे में सीधे सवाल पूछे जाने पर दायें-बाएं करने लगते हैं. भला कथनी और करनी के बीच के अंतर को कोई पी.आर कंपनी कैसे भर सकती है?

राहुल गाँधी की सीमा यह है कि वे कांग्रेस के नेता होते हुए भी कांग्रेस और यू.पी.ए सरकार की कारगुजारियों का जवाब देने को तैयार नहीं हैं. आज का सबक यही है कि जब कथ्य न हो तो भाषा और रूप बहुत दूर तक मदद नहीं कर पाते हैं.

लेकिन क्या हम प्रधानमंत्री पद के दावेदार नरेन्द्र मोदी के ऐसे ही इंटरव्यू की उम्मीद कर सकते हैं? शायद नहीं. शर्त लगाने को तैयार हूँ!!

मोदी के आजतक जितने इंटरव्यू देखे हैं, उनमें वे सीधे-तीखे सवालों पर इंटरव्यू छोड़कर उठ जाते हैं. वक्ता होना एक बात है लेकिन सीधे-तीखे सवालों का सीधा जवाब देना दूसरी बात है…वैसे वक्ता तो भाजपा में सुषमा स्वराज और अरुण जेटली भी अच्छे हैं लेकिन वे प्रधानमंत्री पद के दावेदार नहीं हैं.

Frank Huzur

Arnab Goswami makes rahul gandhi nervous in an aggressive but very polite Q&A session• Revealed on the show: Rahul is a reluctant politician• He is not maverick enough to talk realpolitik• Besides, he has no political willpower to use his massive influence within his formidable organisation• His wavering silence on several issues present him as a weak Gandhi scion• Arnab gains more out of this corporate media interview• Rahul stands exposed on various issues, including dynasty deco as well as princely trappings• In nutshell, the interview is a grand corporate blitz to keep the debate dancing between NaMo and Rahul Gandhi Two-party system is the lusty desire of India’s corporations. Diversity and consolidation of regional forces like the Socialists scares them into nightmare on key issues of economic welfare of 1 Billion suffering masses of the world’s largest democracy. Neither Mr Gandhi nor GJ NaMO could walk the distance to 7 RCR without Thirdspace political parties!

Jamshed Qamar Siddiqui

अर्णब-राहुल इंटरव्यू पर अब तक की सबसे बेहतरीन प्रतिक्रिया जो मैंने सुनी –
“राहुल अपने वक्त से काफी आगे चल रहे हैं, समाज को उन्हे समझते-समझते वक्त लगेगा”

राहुल देव

Rahul Gandhi will regret giving this interview throughout his life. Bad judgement.

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