पं. माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय जनसंपर्क दिवस पर व्याख्यान आयोजित

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makhanlalभोपाल, 21 अप्रैल । भारतीय मूल्यों, परम्पराओं और संस्कृति की जब भी बात होती है तो उसे संकीर्ण नजरिया माना जाता है। यह सही नहीं है। ये मूल्य तो शाश्वत है। भारतीय मूल्यों और संस्कृतियों में हमारी जड़ें हैं। ये विचार जनसंपर्क विभाग के अपर सचिव श्री लाजपत आहूजा ने व्यक्त किये। वे 21 अप्रैल को राष्ट्रीय जनसंपर्क दिवस के मौके पर माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित विशेष व्याख्यान में बोल रहे थे। कार्यक्रम का विषय ‘‘भविष्य के भारत के लिए भारतीय मूल्यों, परम्पराओं और संस्कृति का संरक्षण: जनसंपर्क की भूमिका’’ था। इस कार्यक्रम में पब्लिक रिलेशंस सोसायटी ऑफ इंडिया, भोपाल चेप्टर ने भी सहभागिता की।

जनसंपर्क के अपर सचिव श्री आहूजा ने इस मौके पर कहा कि जब भी हम भारतीय मूल्यों की चर्चा करते हैं तो हमें संकीर्ण, पिछड़ा और दकियानूसी मान लिया जाता है। यह सरासर गलत है। इस धारणा को जनसंपर्क के माध्यम से दूर किया जा सकता है। हमारी संस्कृति की बहुत-सी श्रेष्ठ बातें छुपी हुई हैं। जनसंपर्क के माध्यम से उन्हें दुनिया के सामने लाना हमारा प्रमुख कार्य होना चाहिए। जनसंपर्क को स्वागत-सत्कार करने वाला विभाग मान लिया जाता है, जबकि ऐसा नहीं है। जनसंपर्क अधिकारियों और कर्मचारियों का काम महज किसी संस्थान कि छवि को बनाये रखना ही नहीं है बल्कि उस संस्थान के हित में कई तरह से महत्वपूर्ण भूमिका निभाना भी है। इस मौके पर उन्होंने मध्यप्रदेश के जनसंपर्क विभाग के कई महत्वपूर्ण कार्यों का उल्लेख किया। इस मौके पर जनसंपर्क के विशेषज्ञ एवं कृषक जगत के प्रधान सम्पादक श्री विजय बोन्द्रिया ने संगोष्ठी के विषय ‘‘भविष्य के भारत के लिए भारतीय मूल्यों, परम्पराओं और संस्कृति का संरक्षण: जनसंपर्क की भूमिका’’ पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में पी.आर.एस.आई. के भोपाल चेप्टर के अध्यक्ष श्री संजय सीठा ने भी अपनी विचार रखे। उन्होंने बताया कि भारतीय मूल्यों और संस्कृति के संरक्षण में जनसंपर्क अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

ऐसे शुरू हुआ राष्ट्रीय जनसंपर्क दिवस

प्रतिवर्ष पूरे भारत में 21 अप्रैल का दिन राष्ट्रीय जनसंपर्क दिवस के रूप में मनाया जाता है। 1958 में भारत अंतरराष्ट्रीय जनसंपर्क संघ का सदस्य बना। एक दशक बाद भारत में 21 अप्रैल 1968 को पूरी दुनिया के जनसंपर्ककर्मी दिल्ली में एकत्र हुये थे। जहाँ भारत में जनसंपर्क की अंतरराष्ट्रीय आचार संहिता का अंगीकार किया था। उस दिन यह निर्णय लिया गया था कि 21 अप्रैल का दिन राष्ट्रीय जनसंपर्क दिवस के रूप में मनाया जाना चाहिए। तब से 21 अप्रैल को राष्ट्रीय जनसंपर्क दिवस के रूप में मनाया जाता है।

इस आयोजन में भोपाल के वरिष्ठ एवं युवा जनसंपर्क अधिकारी उपस्थित थे। पी.आर.एस.आई. भोपाल चेप्टर के सचिव डॉ. संजीव गुप्ता के अतिरिक्त श्री सी.के.सरदाना, श्री यू.सी.खरे, श्री मनोज द्विवेदी, श्री शैलेन्द्र ओझा, श्री रमेश शर्मा, श्री गोविंद चैरसिया इस मौके पर उपस्थित थे। विश्वविद्यालय के कुलाधिसचिव प्रो. रामदेव भारद्वाज, कुलसचिव डॉ. चंदर सोनाने भी कार्यक्रम में मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन विश्वविद्यालय के जनसंपर्क विभाग के अध्यक्ष डॉ. पवित्र श्रीवास्तव ने किया और संबद्ध संस्थाओं के निदेशक श्री दीपक शर्मा ने आभार व्यक्त किया।

(डॉ. पवित्र श्रीवास्तव)

निदेशक, जनसंपर्क विभाग

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