जी मीडिया ने उड़ाया नरेंद्र मोदी का मजाक

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जी मीडिया ने उड़ाया नरेंद्र मोदी का मजाक
जी मीडिया ने उड़ाया नरेंद्र मोदी का मजाक




जी मीडिया ने उड़ाया नरेंद्र मोदी का मजाक
जी मीडिया ने उड़ाया नरेंद्र मोदी का मजाक
इस देश की कोई टीम रियलिटी शो भी जीतती है तो वो नरेन्द्र मोदी के अच्छे दिन आने के वादे का असर है. इससे ज्यादा दमदार तरीके से और कैसे मजाक उड़ाया जा सकता है ?

ये काम कोई और चैनल करता तो लगता कि वो कांग्रेस के हाथों बिका हुआ है लेकिन फिल्म का चैनल पार्टनर जी मीडिया ने वो काम किया है जो कि न केवल नरेन्द्र मोदी के आगे नतमस्तक है बल्कि चैनल के मालिक सुभाष चन्द्रा खुलेआम रैलियों में भाजपा/नरेन्द्र मोदी को वोट करने की अपील करते आए हैं.

फिल्म ‘हैप्पी न्यू इयर’ का चैनल पार्टनर जी मीडिया है. पूरी फिल्म का बड़ा हिस्सा ऐसा जान पड़ता है जैसे जी टीवी को प्रोमोट करने के लिए ही बनायी गई हो जैसे नो वन किल्ड जेसिका लाल को देखकर लगा कि ये बरखा दत्त की जीवनी बयान करने के लिए बनायी गई थी. इस फिल्म में थोड़े वक्त के लिए न्यूज24 के अलावा इतनी जगह जी टीवी है कि फिल्म का नाम हैप्पी न्यू इयर की जगह जी रियलिटी शो भी रख दिया जाता तो कोई दिक्कत नहीं होती.

खैर ये अभी तक की पहली फिल्म है जिसमे नरेन्द्र मोदी की सरकार को बतौर संदर्भ के रुप में इस्तेमाल किया गया है. इस हिसाब से ये फिल्म बेहद सामयिक है.. फिल्म का दृश्य है कि टीम इंडिया की डांस शो में दुनियाभर के लोग बधाई दे रहे हैं, उसी में करीब 10 सेकण्ड के लिए नरेन्द्र मोदी की शक्ल से मिलता-जुलता एक शख्स दिखाई देता है जो ये कहता है कि ये भारत में अच्छे दिन आने की निशानी है.

अब जड़ से जड़ ऑडिएंस को ये बात समझने में देर नहीं लगेगी कि ये नरेन्द्र मोदी की चाटुकारिता में नहीं, सटायर में इस्तेमाल किया गया है. दिन-रात मोदी की सरकार के आगे लोटनेवाले चैनल पर जब हम ये देखते हैं तो साफ समझ आ जाता है कि असल में चैनल ने मीडिया पार्टनरशिप निभाते हुए किसके नमक की कीमत अदा की है..वैसे दिलचस्प है कि इस 10 मिनट की विजुअल ही इतनी दमदार है कि इसके लिए बाकी की पूरी फिल्म झेली जा सकती है.( बाकी मैच फिक्सिंग, पेड न्यूज के अलावा रियलिटी शो फिक्सिंग को समझने के लिए ये फिल्म देखी जा सकती है जिसमें अनुराग कश्यप से लेकर विशाल तक की छवि लपेटे में आ जाती है.)


सुबह मैं आउटलुक में नम्रता जोशी( Namrata Joshi) जोशी का इस फिल्म पर रिव्यू पढ़ने के बाद तय किया कि इसे आज ही देखनी है..नम्रता जोशी, शुभ्रा गुप्ता जैसे फिल्म समीक्षकों को पढ़ने का सबसे बड़ा लाभ ये है कि एक तो इनका लिखा आप फिल्म देखने, न देखने के पहले- बाद भी एक दिलचस्प राइटअप का सुख लेने के लिए पढ़ सकते हैं और दूसरा कि ये फिल्मों पर होते हुए भी, फिल्मों से बहुत दूर-गहरे जाकर अपनी बात करते हैं. वैसे नम्रता जोशी की अगर इस एक लाइन The good-hum­oured dig at Narendra Modi and the not-so-good-hum­oured one at Saroj Khan had me giggling silly के अलावा बाकी पूरी रिव्यू पढ़कर कोई राय कायम करना चाहे तो वो तत्काल फिल्म देखने का इरादा त्याग देगा..

लेकिन हम जैसे लोग जो फिल्म की कहानी, ट्रीटमेंट या हैद जैसी फिल्म आने पर “हमने भी फिल्म पर लिखना है, हमने भी हाथ आजमानी है” के चक्कर में न पड़कर मीडिया मटीरियल के हिसाब से फिल्म देखते हैं, एक से एक बकवास और कूड़ा फिल्में भी इस चक्कर में बर्दाश्त कर लेते हैं..ये फिल्म ओओएच( ऑउट ऑफ होम) विज्ञापन स्ट्रैटजी औऱ स्पेस को समझने के लिए, मीडिया पार्टनरशिप पैटर्न और रियलिटी शो की ट्रीटमेंट समझने के लिए देख आते हैं..इस लिहाज से आपको लक्स कोजी से लेकर अपना प्यार शालीमार तक के लिए स्पेस और जी टीवी से लेकर न्यूज 24 तक के लिए बनायी जानेवाली जगह को लेकर खूब समझने का मौका मिलेगा ही..साथ ही इस बात को लेकर भी हैरानी होगी कि आखिर अब तक भक्तों को फिल्म की इस दस सेकण्ड पर खासतौर पर नजर कैसे नहीं गई ?

(फिल्म हैप्पी न्यू इयर देखने के बाद मीडिया विश्लेषक विनीत कुमार की एक टिप्पणी)

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