सावधान इंडिया ने दिखाया न्यूज चैनलों का घिनौना सच

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सावधान इंडिया पर न्यूज चैनलों की काली सच्चाई
सावधान इंडिया पर न्यूज चैनलों की काली सच्चाई

 

 

“सोशलाइज़” होने का मतलब सुन्दर महिला मीडिया कर्मी को प्रोस्टीटूट के लिए प्रोत्साहित करना।

 

सुजीत ठमके

 

सावधान इंडिया पर न्यूज चैनलों की काली सच्चाई
सावधान इंडिया पर न्यूज चैनलों की काली सच्चाई

14 अक्टूबर, 2014 रात 10 बजे। घर में परिवार के साथ मिलकर डिनर कर रहा था। टाइम्स नाउ का सुपर प्राइम टाइम  देख रहा था। इधर-उधर की गपशप चल रही थी। मेरी धर्मपत्नी ने कहा सुजीत आज आप सावधान इंडिया जरूर देखो। मैंने कहा ऐसा क्या है ? धर्मपत्नी ने कहा आप जिस प्रोफेशन में है उस प्रोफेशन का घिनौना सच दिखया जाने वाला है।

 

10.30 बजे मैंने लाइफ ओके चैनल को स्विच ऑन किया। न्यूज़ चैनेलो में  “सोशलाइज़” होने की परिभाषा को सुनकर सन्न रह गया। कोई मीडियाकर्मी का अफेयर्स है। दोनों के सहमति से 2-4 शादी  करते है। डिवोर्स होता है। किसी के साथ डेट पर है। लिवइन रिलेशनशिप में है। दोनों की सहमति से सम्बन्ध बनाते है आदि आदि। तो हमें कोई एतराज नहीं है। क्योकि यह पूरी तरह से निजी जिंदगी से जुड़ा मामला है। मैंने इसपर सार्वजनिक रूप से ना कोई टिप्पणी की है , ना लिखा है और ना लिखूंगा। किसने क्या करना चाहिए, यह निजी जिंदगी से जुड़ा मामला है। किसी मीडिया कर्मी को अपनी जिंदगी खुलकर जीने की पूरी स्वतन्त्रता है। आजादी है। मैं भी इस विचारधारा का पक्षधर हूँ । लेकिन मामला संगीन है।  गंभीर है। संवेदनशील है। महिला उत्पीडन से जुड़ा है। एक सुन्दर महिला मीडिया कर्मी के मज़बूरी का फायदा उठाकर प्रोस्टीटूट के दलदल में धकेलने का है।

 

घटना पिछले वर्ष की है।  मुंबई के न्यूज़ चैनल से जुडी है। इस घटना का ताल्लुक सीधा सीधा देश और समाज से हो तो ” सीधी बात” रखना मेरा दायित्व है। लाइफ ओके के सावधान इंडिया टीम वाकई बधाई की पात्र है। जिन्होंने  न्यूज़ चैनल का घिनौना सच दिखाने का साहस दिखाया। मै ऐसा बिलकुल भी नहीं कहता की सभी न्यूज़ चैनल इस  घिनौने खेल से पीड़ित है। किन्तु इस घटना से सभी न्यूज़ चैनेलो ने एक सबक लेना चाहिए।

 

न्यूज़ चैनल में सुन्दर महिला एंकर का मतलब केवल ” सोशलाइज़” होना नहीं है। न्यूज़ चैनल या अखबार लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ है। भले ही कॉर्पोरेट कल्चर बढ़ा हो। खबरे समाज का आईना है। खबरों में जो दिखता है वैसा देश, समाज का जनमानस बनता है। क्या आम और क्या ख़ास सभी समुदाय को मीडिया से उम्मीदे रहती है।

 

यह घटना पिछले साल की है। लखनऊ की दोनों बहने मुंबई में रहती है। काल्पनिक पात्र बदल दिए गए है। मधु वर्मा नामक महिला रिपोर्टर न्यूज़ चैनल में काम मानने जाती है। छोटी बहन मॉस कम्युनिकेशन की पढ़ाई करती है। घटना में दिखाया गया है की , न्यूज़ चैनल की वरिष्ठ महिला न्यूज़ एंकर स्टूडियो से एक ब्रेकिंग न्यूज़ पढ़ती है। नवी मुंबई – वाशी में रेव पार्टी में पुलिस ने छापेमारी की और  लगभग २०० लड़के लडकिया पकड़ी गई। उतने में चैनल के  एडिटर आते है। महिला न्यूज़ एंकर को कहते है ” अरे यह क्या न्यूज़ दिखा रही हो। सनसनीखेज न्यूज़ चाहिए। राजनीति से जुडी बड़ी न्यूज़ चाहिए। कॉर्पोरेट से बड़ी न्यूज़ चाहिए। पेज थ्री से बड़ी न्यूज़ चाहिए। संपर्क बढ़ाओ। सोशलाइज़ हो। आप वरिष्ठ पत्रकार है। नए लोगो  को लो। सुन्दर लडकिया लो। सोशलाइज हो  …। जी हां सही सुना आपने ‘सोशलाइज’ हो।

 

मधु वर्मा नामक लखनऊ की महिला मीडिया कर्मी उस चैनल में इंटरव्यू के लिए जाती है। एचआर चैनल का प्रबंधन उसे जॉब भी देता है। मधु का सपना पूरा होता दिखाई पड़ता है। मधु अपनी छोटी बहन को भी सपने दिखाती है आप मॉस कम्युनिकेशन जल्दी करो। अच्छे चैनल में बड़े पैकेज की नौकरी मिल जाएगी। लेकिन धीरे-धीरे चैनल की वरिष्ठ  महिला मीडियाकर्मी अपने रंग में आना शुरू कर देती है।

मधु से कहा जाने लगता है – मधु आपको नाम कमाना है। टीवी पर दिखना है। आप सुन्दर हो। आपको आगे बढ़ना है। आप को सोशलाइज होना पडेगा। देवेन्द्र सिंह नामक राजनेताओ से सोशलाइज होने की तारीख, जगह, समय फिक्स होता है। जगह न्यूज़ चैनल का ही  रेस्टरूम रहता है। भोली भाली लखनऊ की मधु वर्मा समझ नहीं पाती देवेन्द्र सिंह नामक राजनेताओ की  वरिष्ठ महिला मीडियाकर्मी की हिडन एजेंडा क्या है। मधु वर्मा रेस्ट रूम जाती है।  देवेन्द्र सिंह नामक राजनेताओ से सोशलाइज होना रहता है।

 

लेकिन मधु वर्मा को पैसे, ग्लैमर, नौकरी से कई ज्यादा अपनी इज्जत प्यारी होती है।  मधु वर्मा दो टूक मना करती है। दौड़कर रेस्ट रूम से निकलती है। चैनल प्रबंधन, वरिष्ठ महिलाकर्मी और टीम मधु के पीछे दौड़ती है। राजनेता देवेन्द्र सिंह बौखला जाता है।   चैनल प्रबंधन, वरिष्ठ महिलाकर्मी को कहता है मधु को मेरे फार्म हाउस में भेज देना। चैनल प्रबंधन के मिली भगत से मधु वर्मा को मुंबई के बिचेस  पास ठिकाने लगाया जाता है। और ख़ुदकुशी का मामला बताया जाता है।

 

लेकिन मधु वर्मा की छोटी बहन जो मॉस कम्युनिकेशन करती है। उसकी कोशिश रंग लाती है। चैनल प्रबंधन और पूरी टीम, एडिटर, न्यूज़ एडिटर आदि आदि राजनेताओ के जरिये दबाव बनाने की कोशिश करता है। मुंबई पुलिस निष्पक्ष होकर काम करती है। आज चैनल प्रबंधन कुछ मीडियाकर्मी, एडिटर, न्यूज़ एडिटर आदि सलाखों के पीछे है। इस  घटना से यह प्रतीत होता है की चैनल प्रबंधन, कुछ वरिष्ठ मीडिया कर्मी, एडिटर, न्यूज़ एडिटर आदि राजनेता के  प्यार में इतने अंधे रहते है की, सुन्दर महिलामीडिया कर्मी को प्रोस्टीटूट बनने के लिये प्रोत्साहिक किया जाता है।

न्यूज़ चैनेलो पर महिला आरक्षण, महिला उत्पीड़न, महिला सशक्तिकरण, यौनशोषण, बलात्कार आदि आदि बातो पर डिबेट ढकोसला लगती है। न्यूज़ चैनल का घिनौना सच दिखाया है सावधान इंडिया ने।  “सोशलाइज़” होने का मतलब सुन्दर महिला मीडियाकर्मी को प्रोस्टीटूट के लिए प्रोत्साहित करना। उम्मीद करते है भविष्य में न्यूज़ चैनल महिलो के प्रति सचेत रहकर काम करेंगे।

 

 

( लेखक भारत सरकार के अधीन देश के नामचीन संस्था में मीडिया एंड  पीआर देखते है। कई मीडिया संस्थानों के रह चुके है। युवा मीडिया विश्लेषक है। राजनीति, करेंट अफेयर्स, विदेशनीति, सोशल इशू, इकोनोमिक्स, आन्ट्रॅप्रॅनर्शिप जैसे विषयो में बेहतर पकड़ रखते है ) 

 

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