अभिषेक श्रीवास्तवसत्यमेव जयते में आमिर खान की भूमिका कांग्रेस में राहुल गांधी की भूमिका जैसी है: विशुद्ध नकली और बनावटी। जिस तरह कांग्रेस की डेढ़ सौ साला खांटी राजनीति पर बांह मरोड़ू राहुल पानी फेर रहे हैं, वैसे ही बलात्कार के दिल दहला देने वाले यथार्थ को अपने नकली विस्मय से आमिर अविश्वसनीय बना दे रहे हैं। सत्यमेव जयते में सारा खेल उन तकनीकी संरचनाओं का है जो फौरी संवेदना पैदा करती हैं: क्लोज़ शॉट, आंसू, कसे हुए फ्रेम, ग़मगीन दर्शकों के चेहरे, डूबता सूरज आदि, जिसमें आमिर की लंबी उसांस अचानक नकलीपन भर देती है। वैसे ही, जैसे हमारी व्यवस्था में झूठ, बेईमानी और भ्रष्ट आचरण की एक कसी हुई संरचना में अचानक राहुल गांधी अध्यादेश फाड़कर एक प्रहसन का बोध कराते हैं। विश्व बैंक और आइएमएफ के पेंशनधारियों की फौज कांग्रेस हमारे विवेक को मार चुकी है। अब रिलायंस, ऐक्सिस जैसे संस्थानों से अनुदानित सत्यमेव जयते जैसे कार्यक्रम कटु यथार्थ के नकली नैरेशन से हमारी संवेदना को मारने का काम कर रहे हैं। सावधान...! (स्रोत-एफबी)
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