विमल कुमारआज केदारनाथ सिंह को जब ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला तो उद्घोषिका ने कहा कि ३५ लाख दिए जायेंगे पुरस्कार में ..सब लोग खुश हुए कि पुरस्कार राशि बढ़ गयी पर समारोह के अंत में उसने कहा कि ११ लाख ही दिए गए .२४ लाख का क्या हुआ ? हम लोग सभागार में चौंक गए.मामला समझ में नहीं आया ..राष्ट्रपति महोदय ने अपने भाषण में गलती से अज्ञेय का नाम आज्ने पढ़ा .इंग्लिश की स्पेल्लिंग के कारण .लगता है राष्ट्रपति अज्ञेय जी के नाम से परिचित नहीं . @एफबी
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