एक घंटे का प्रोग्राम हो. एंकर मिलाकर कुल आठ लोग बोलने वाले हो. बोलने वालों में नेता, वकील और अध्यापक भी हो तो सबको बोलने के लिए वाजिब समय मिले, ये जरूरी नहीं.
ऐसे में यदि एंकर रवीश जैसा जब्बर किस्म का न हो तो दो नेता ही आपस में बतकही कर स्क्रीन की बहस को संसद के हंगामे में तब्दील करके पूरा समय खपा देते हैं और पैनल के दूसरे लोग स्क्रीन पर बस मूर्तिवत बैठे रह जाते हैं.
ऐसे में खीजना स्वाभाविक है. शनिवार को एनडीटीवी पर प्रसारित ‘प्राइम टाइम’ में ऐसा ही हुआ जब नजमा हेपतुल्लाह और मशहूर वकील माजिद मेनन खीज गए और लाइव के दौरान ही एंकर कादम्बिनी शर्मा से अपनी नाराजगी जता दी.