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बीबीसी या सीएनएन में मर्दानगी की दवाओं के विज्ञापन कभी देखे हैं?

ट्रेन से दिल्ली आते समय जब आप गाजियाबाद क्रॉस करते हैं तो बड़े – बड़े अक्षरों में आपको एक खास तरह का विज्ञापन दीवालों पर लिखा मिलेगा. ये विज्ञापन तरह –तरह के नीम हकीम और उनके नुस्खे से संबंधित होते हैं जो मर्दानगी से निपटने के उपाय बताती है.

मर्दानगी, शीघ्रपतन से लेकर बेटा पैदा करने की दवाई तक होने का ये दावा करते हैं. लेकिन अब ऐसे विज्ञापन गाजियाबाद की दीवारों तक ही सीमित नहीं रह गए हैं. उनका दायरा बढ़ गया है.

वे शक्ल बदलकर टीवी स्क्रीन तक आ धमके हैं और अपना जाल बखूबी फैला रहे हैं. इसका नमूना तब दिखाई पड़ता है जब रात 12 बजते ही ‘पावर प्राश’ के रूप में न्यूज़ चैनलों पर इनका विज्ञापन चलने लगता है.

रविवार को श्रीनगर में नहीं छपे अखबार

श्रीनगर। कश्मीर के लोगों को रविवार सुबह अखबार पढ़ने को नहीं मिला। अफजल गुरु को फांसी की सजा मिलने के बाद शहर में लगातार दूसरे दिन कर्फ्यू जारी है। किसी भी स्थानीय अखबार ने रविवार को अंक प्रकाशित नहीं किया।

एक अखबार के संपादक ने कहा, कि आज कोई स्थानीय अखबार प्रकाशित नहीं हुआ है। लेकिन कई स्थानीय अखबारों के वेब अंक इंटरनेट पर उपलब्ध हैं। श्रीनगर में शनिवार से ही केबल टीवी और इंटरनेट सेवा बंद है।

हालांकि बीएसएनएल की ब्रॉडबैंड सेवा शहर में और शहर के बाहर चालू है। अफजल को फांसी दिए जाने के बाद एहतियातन ये कदम उठाए गए है। घाटी में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन तमाम उपाय कर रहा है। (एजेंसी)

न्यूज इंटरनेशनल की वेबसाइट हैक

इस्लामाबाद। पाकिस्तान के दैनिक समाचार पत्र ‘न्यूज इंटरनेशनल’ की वेबसाइट सोमवार को हैक कर ली गई। हैकरों ने दावा किया है कि ‘डॉट पीके डोमेंस’ पर अब उनका नियंत्रण है।

‘पीएकेबग्स’ से अखबार की वेबसाइट पर भेजे गए संदेश में कहा गया है कि हम फिर आ गए हैं। पीकेएनआईसी डॉट नेट डॉट पीके तुम सोचते हो कि डॉट पीके डोमेंस पर तुम्हारा नियंत्रण है? ऐसा नहीं है! आज डॉट पीके डोमेंस पर हमारा नियंत्रण है।

पाकिस्तानी अखबार ‘न्यूज इंटरनेशनल’ की वेबसाइट हैक संदेश में आगे कहा गया है कि अगर आप अपने सिस्टम को दुरुस्त कर लेते हैं, जो कि फिहलहाल हमारे कब्जे में है। तो भी हमने 23,000 खातों की सूचनाएं सफलतापूर्वक नष्ट कर डाली है, जिसमें सरकारी खबरों के ब्लॉग्स फोरम्स आदि शामिल हैं।(एजेंसी)

"बड़ी " खबर क्या होती है?

“बड़ी ” खबर क्या होती है? क्या उसे बार-बार ” बड़ा” कहने से उसका आकार वाकई इतना बढ़ जाता है। टीवी न्यूज पुनरावत्ति की शिकार बनती जा रही है।

उससे खबर की गंभीरता, उसका आकार और उसकी मह्त्ता बढ़े न बढ़े, वह खीज का रूप लेने लगती है।

खबर की कमी के बीच अलग तरह की किसी भी घटना का घट जाना और फिर उसे महाकाय बनाकर शब्दों की जुगाली करते जाना मीडिया के उत्तेजित होते स्वभाव पर मोहर लगाती है और उन सबके बीच जब राजनीतिक प्रवक्ता भी राग-विराग में शामिल हो जाते हैं तो कई बार न खबर छोटी रहती है न बड़ी, वो तो खुद ही कहीं खो जाती है.

(डॉ. वर्तिका नंदा के फेसबुक वॉल से)

पटना के अखबार और सरकारी विज्ञापन का झोल

बिहारशरीफ से संजय कुमार की रिपोर्ट >>

advertisment scam patna बिहारशरीफ । अपने सीमित संसाधनों के बलबूते निकल रहे मासिक, पाक्षिक, साप्ताहिक तथा वेब समाचार पोर्टल को कितनी आर्थिक दिक्कत उठानी पड़ती है यह सबको पता है, लेकिन बिहार सरकार इन लघु मीडिया संस्थानों को वित्तीय मदद देने के बजाय गलत विज्ञापन नितियों के जरिये बड़े दैनिक अखबारों को फायदा पहुंचाने के लिये वैसे विज्ञापन भी जारी कर रही हैं जिन विज्ञापनों की उपयोगिता एवं समय सीमा खत्म हो चुकी होती है।

जनसंपर्क विभाग द्वारा एक चौथायी रंगीन पेज का विज्ञापन लोगों को सूचना देने के लिये नहीं बल्कि सिर्फ अख़बार को फायदा पहुंचाने के लिए ही जारी होता है. तभी तो प्रोगाम की समय समाप्ति होने के बाद विज्ञापन प्रकाशित होते रहते हैं और राज्य सरकार ऐसे विज्ञापन का पैसा अखबार को देती है.

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