हैदराबाद, 19 फरवरी, 2013. दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के उच्च शिक्षा और शोध संस्थान द्वारा संचालित साहित्य-संस्कृति मंच के त्वावधान में वसंत पंचमी के अवसर पर निराला जयंति समारोहपूर्वक मनाई गई. कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो.ऋषभ देव शर्मा ने निराला की संघर्षशीलता और महाप्राणता से प्रेरणा लेने की बात कही.
इस अवसर पर निराला की विभिन्न विधाओं की रचनाओं का वाचन एवं सस्वर पाठ किया गया. डॉ.गोरखनाथ तिवारी ने ‘राम की शक्ति पूजा’ का वाचन करते हुए कहा कि इस कविता में ओज गुण का समावेश इसे महाकाव्यत्व प्रदान करता है. डॉ.बलविंदर कौर ने ‘बाहरी स्वतंत्रता और स्त्री’ शीर्षक निराला का निबंध प्रस्तुत किया और कहा कि वे स्त्री विमर्श के भारतीय स्वरूप के द्रष्टाओं में एक थे.








दीपक चौरसिया को गेट आउट, जस्टिस काटजू ने हद कर दी
जस्टिस काटजू सामान्य शिष्टाचार की हदें पार करते जा रहे हैं, जैसे वे प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष ना होकर कांग्रेस पार्टी के घोषित प्रवक्ता हों। कल उन्होंने दीपक चौरसिया को गेट आउट तक कह डाला। चौरसिया पीसीआई के दफ्तर में काटजू का इंटरव्यू करने गए थे और एक सवाल के जवाब में जब चौरसिया ने आधा-अधूरा सच कहा तो लगभग आपे से बाहर आते हुए उसे मैनर सीखने की हिदायत दे डाली, जबकि वे शांत भाव से या तो चुप रह सकते थे या नो कमेंट्स भी कह सकते थे। अब वो कह रहे हैं कि निजी हैसियत से लेख लिखा है। राजनीति में काटजू से पूछकर लोग आयें। वे कश्मीरी पंडित हैं, लेकिन कभी भी कश्मीरी पंडितों की आवाज़ नहीं उठायी और सदा अपने व्यक्तिगत हितों को तरजीह देते रहे। ऐसे व्यक्ति से क्या उम्मीद की जा सकती है।
(हरेश कुमार के फेसबुक वॉल से )
मारकंडे बाबा कैसे भी हों, दाएं या बाएं या बीच में, लेकिन क्लास सही लेते हैं। उन्हें दीपक बाबा को डांटते देख कर दिल गार्डेन गार्डेन हो गया। देखिए कितने बेहया हो गए हैं सब, हत्यारे के चैनल से पैसा लेते हैं और अर्धसत्य की बात करते हैं। सबसे पहले तो ऑक्युपाई मीडिया का आंदोलन चलाना चाहिए, वॉल स्ट्रीट आदि तो दूर की चीज़ है।
(अभिषेक श्रीवास्तव के फेसबुक वॉल से )