Home Blog Page 32

अर्नब गोस्वामी को सुप्रीम कोर्ट ने दी जमानत

arnab goswami

रिपब्लिक टीवी के मुख्य संपादक अर्नब गोस्वामी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अर्नब गोस्वामी और अन्य सह-आरोपियों को अंतरिम जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। गोस्वामी को साल 2018 के इंटीरियर डिजाइनर (वास्तुकार) अन्वय नाइक और उनकी मां की आत्महत्या के मामले में 4 नवंबर को न्यायिक हिरासत में लिया गया था।

शीर्ष अदालत ने कहा कि यह गहरी चिंताजनक बात है कि अगर अदालतें मानवीय स्वतंत्रता को संरक्षित नहीं करती हैं और यदि संवैधानिक अदालतें स्वतंत्रता की रक्षा नहीं करती हैं, तो कौन करेगा?

न्यायमूर्ति डी.वाई. चंद्रचूड़ और इंदिरा बनर्जी की पीठ ने कहा कि अगर किसी को टीवी चैनल पसंद नहीं है तो उस व्यक्ति को इसे नहीं देखना चाहिए।

अर्नब और दो अन्य को इंटीरियर डिजाइनर अन्वय नाइक और उनकी मां की आत्महत्या के सिलसिले में पिछले हफ्ते गिरफ्तार किया गया था।

पीठ ने अर्नब की गिरफ्तारी पर महाराष्ट्र सरकार की खिंचाई करते हुए कहा कि पीड़ित निष्पक्ष जांच का हकदार है और जांच आगे बढ़नी चाहिए, लेकिन अगर राज्य इस आधार पर व्यक्तियों को निशाना बनाता है तो एक मजबूत संदेश जाना चाहिए।

चंद्रचूड़ ने महाराष्ट्र सरकार के वकील से कहा, “हमारा लोकतंत्र असाधारण रूप से मजबूत है। बात यह है कि सरकार इस पर ध्यान नहीं देती। प्रधान न्यायाधीश ने बहुत महत्वपूर्ण बात कही है। उन्होंने कहा है कि हम सभी पक्षों से जिम्मेदारी की उम्मीद करते हैं।”

पीठ ने कहा कि अर्नब को जांच में सहयोग करना चाहिए और आरोपियों की रिहाई में देरी नहीं होनी चाहिए। अदालत ने उन्हें 50,000 रुपये के बांड प्रस्तुत करने को भी कहा।

अर्नब ने बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत का रुख किया था, जिसने उनकी अंतरिम जमानत पर विचार करने से इनकार कर दिया था।

न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने जोर देकर कहा, “अगर संवैधानिक अदालतें हस्तक्षेप नहीं करती हैं, तो हम विनाश के रास्ते पर यात्रा कर रहे हैं।”

अर्नब का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने अदालत के समक्ष कहा, “क्या अर्नब गोस्वामी आतंकवादी हैं? क्या उन पर हत्या का आरोप है? उन्हें जमानत क्यों नहीं दी जा सकती है?”

वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश हुए, जबकि वरिष्ठ अधिवक्ता अमित देसाई ने महाराष्ट्र पुलिस और वरिष्ठ अधिवक्ता सी.यू. सिंह ने पीड़ित परिवार का प्रतिनिधित्व किया।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले में सह आरोपी नीतीश सारदा और फिरोज मोहम्मद शेख की अंतरिम रिहाई की भी अनुमति दी। कोर्ट ने कहा कि अंतरिम जमानत देने के लिए आवेदन को खारिज कर हाईकोर्ट ने त्रुटि की है। (एजेंसी)

दिल्ली हाईकोर्ट ने न्यूज चैनलों को भेजा सम्मन

news channel

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को टाइम्स नाउ और रिपब्लिक टीवी सहित विभिन्न मीडिया चैनलों को सम्मन जारी किया। कोर्ट ने चार बॉलीवुड संगठनों और 34 निर्माताओं द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई की और इन आउटलेट्स से समाचार रिपोर्टिग के मानकों में सुधार के लिए उचित समाधान के साथ आने के लिए कहा। याचिकाकर्ताओं ने समाचार चैनलों पर हिंदी फिल्म उद्योग और उसके सदस्यों के खिलाफ ‘गैर-जिम्मेदाराना, अपमानजनक टिप्पणी’ को लेकर लगाम लगाने की मांग की थी।

न्यायमूर्ति राजीव शकधर ने मीडिया चैनलों से जवाब मांगा और मामले की आगे की सुनवाई 14 दिसंबर तक के लिए टाल दी।

जब अदालत इस मामले की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से कर रही थी, तब याचिकाकर्ताओं के वकील राजीव नायर ने कहा कि यह सब अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या से शुरू हुआ, जो बाद में हत्या बन गई, फिर बॉलीवुड आपराधिक बन गया, फिर ड्रग पेडलर्स और अब आईएसआई से जोड़ दिया गया। उन्होंने कहा कि यह बात इस मानहानि शिकायत का आधार है।

उन्होंने अनुरोध किया कि यूट्यूब और ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्मों से आपत्तिजनक सामग्री को हटा दिया जाए। नायर ने अदालत के समक्ष गुहार लगाते हुए कहा, “मैं तुरंत चाहता हूं कि यूट्यूब और ट्विटर पर जो अपमानजनक चीजें सामने आई हैं, उन्हें तुरंत हटा दिया जाए।”

बॉलीवुड संस्थाओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अखिल सिब्बल भी पेश हुए। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता के आदर्श विचार और टीवी मीडिया के एक निश्चित वर्ग द्वारा किए गए काम के बीच एक अंतर है।

सिब्बल ने तर्क दिया कि प्रेस किसी को दोषी नहीं ठहरा सकता है। उन्होंने कहा, “सबूतों की जांच कोर्ट द्वारा की जाती है, मीडिया चैनलों द्वारा नहीं।”

अदालत ने सवाल किया, “वे (बॉलीवुड सेलेब्स) खुद इस मुकदमे के पक्षकार क्यों नहीं बन गए? चूंकि वे पीड़ित हैं, उन्हें व्यक्तिगत रूप से संपर्क करना चाहिए।” इसने कहा कि इससे पता चलता है कि ये लोग नुकसान का दावा करने में हिचकिचाते हैं।

हाईकोर्ट ने समाचार चैनलों से यह भी सवाल किया कि रिपोर्टिग मानकों में सुधार के लिए क्या किया जाना चाहिए। अदालत ने कहा, “अगर आप आत्म-संयम नहीं बरत रहे हैं, तो हम क्या करेंगे? अदालतों के सामने आपका अंडरटेकिंग भी नहीं काम कर रहा है।”

अदात ने कहा, “मुझे लगता है कि ब्लैक एंड व्हाइट दूरदर्शन युग बहुत बेहतर था।”

न्न्यायमूर्ति राजीव शकधर ने कहा, “लोगों में प्रेस के बारे में डर फैल गया है। यहां तक कि अगर बड़ी हस्तियों की निजता का मुद्दा कमजोर भी करें तो भी आप (समाचार चैनल) उनके निजी जीवन को पब्लिक डोमेन में नहीं खींच सकते।” (एजेंसी)

हाईकोर्ट ने कहा, ब्लैक एंड व्हाइट दूरदर्शन का युग बहुत बेहतर था

doordarshan

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को समाचार चैनलों से न्यूज रिपोर्टिग मानकों में सुधार लाने के लिए कहा। इसने कहा कि लोग प्रेस से डरे हुए हैं और दूरदर्शन युग इससे ज्यादा बेहतर था। न्यायमूर्ति राजीव शकधर ने कहा, “लोगों में प्रेस के बारे में डर फैल गया है। यहां तक कि अगर बड़ी हस्तियों की निजता का मुद्दा कमजोर भी करें तो भी आप (समाचार चैनल) उनके निजी जीवन को सार्वजनिक क्षेत्र में नहीं खींच सकते।”

अदालत ने कहा, “मुझे लगता है कि ब्लैक एंड व्हाइट दूरदर्शन का युग बहुत बेहतर था।”

अदालत ने आजकल जिस तरह से समाचार रिपोर्टिग हो रही है, उस तरीके को बदलने के तंत्र के बारे में भी समाचार चैनलों से सवाल किया। इसने पूछा, “यहां तक कि कुशल और शिक्षित दिमाग भी इस तरह की गलत रिपोर्टिग से प्रभावित होते हैं। आप हमें बताएं कि हमें इसका समाधान कैसे करना चाहिए?”

यह टिप्पणी तब की गई जब अदालत चार बॉलीवुड संघों और 34 निमार्ताओं द्वारा रिपब्लिक टीवी और टाइम्स नाउ की बॉलीवुड हस्तियों के खिलाफ रिपोर्टिग पर लगाम कसने के लिए दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। बॉलीवुड संघों ने दोनों चैनलों द्वारा की गई रिपोटिर्ंग और बॉलीवुड हस्तियों के खिलाफ की गई टिप्पणियों को ‘गैर जिम्मेदाराना और अपमानजनक’करार दिया था।

पीठ ने कहा कि यह समाचार चैनलों को खबरों को कवर करने से नहीं रोक रहा है, लेकिन केवल उन्हें जिम्मेदार पत्रकारिता को आगे बढ़ाने के लिए कह रहा है। इसने कहा, “हम यह नहीं कह रहे हैं कि आप ऐसी खबरों को कवर नहीं कर सकते, लेकिन हम (केवल) आपको जिम्मेदार पत्रकारिता करने के लिए कह रहे हैं।”

अदालत ने चैनलों को यह भी चेतावनी दी कि यदि वे प्रोग्राम कोड का पालन नहीं करते हैं, तो अदालत को ‘लागू’ करना होगा। (एजेंसी)

अर्नब गोस्वामी को नहीं मिली जमानत

arnab goswami in jail

बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को रिपब्लिक टीवी के प्रबंध निदेशक और मुख्य संपादक अर्नब गोस्वामी की अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी है।

गिरफ्तारी के छह दिन बाद भी गोस्वामी को कोई राहत नहीं मिल सकी है।

अदालत ने उन्हें अलीबाग अदालत में नियमित जमानत याचिका दायर करने के लिए कहा है और साथ ही यह निर्देश भी दिया है कि इस पर चार दिनों के भीतर फैसला किया जाना चाहिए।

गोस्वामी की टीम ने उन्हें एक स्कूल से तलोजा सेंट्रल जेल में स्थानांतरित करने के एक दिन बाद ही अलीबाग अदालत के समक्ष अपनी जमानत याचिका दायर कर दी थी।

वहीं महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने गृहमंत्री अनिल देशमुख से गोस्वामी की सुरक्षा और स्वास्थ्य पर चिंता व्यक्त की है।

आधिकारिक प्रवक्ता ने कहा कि उन्होंने देशमुख से गोस्वामी के परिवार से मिलने और उनके साथ बात करने की अनुमति देने का आग्रह किया है।

बता दें कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने इंटीरियर डिजाइनर को कथित तौर पर आत्महत्या के लिए उकसाने से जुड़े 2018 के एक मामले में गोस्वामी को अंतरिम जमानत देने से इनकार किया है।

इस मामले पर महाराष्ट्र पुलिस की कार्रवाई और सरकार के रवैये को लेकर विपक्ष के नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कड़ी आलोचना की है। (एजेंसी)

अर्नब गोस्वामी अलीबाग स्कूल से तलोजा सेंट्रल जेल में स्थानांतरित किए गए

arnab goswami arrested

रिपब्लिक टीवी के मुख्य संपादक अर्नब गोस्वामी को अलीबाग स्कूल से जिले की तलोजा सेंट्रल जेल में स्थानांतरित कर दिया। उन्हें 4 नवंबर को गिरफ्तारी के बाद से स्कूल परिसर में रखा गया था, क्योंकि इस स्कूल को कैदियों के लिए कोविड-19 आइसोलेशन सेंटर के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।

उन्हें अलीबाग कोर्ट की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुनैना पिंगले ने 18 नवंबर तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

उनकी हिरासत की जगह बदले जाने की आलोचना करते हुए अर्नब की पत्नी सम्यब्रता रे गोस्वामी ने दावा किया कि उनके पति को “आज सुबह तलोजा जेल ले जाने के दौरान महाराष्ट्र पुलिस द्वारा एक ब्लैक आउट पुलिस वैन में घसीटते हुए ले जाया गया।”

उन्होंने कहा कि उनके पति ने बार-बार कहा कि ‘उनकी जान को खतरा था’ और जब उन्होंने जेलर से अपने वकीलों से मिलने देने की मांग की तो उनके साथ मारपीट की गई और मिलने से मना कर दिया गया।

सम्यब्रता ने अपने बयान में कहा, “अर्नब (गोस्वामी) ने सार्वजनिक रूप से अपनी जिंदगी को खतरा बताया था और हिरासत में किए जा रहे अत्याचारों के बारे में कहा था, यदि मेरे पति को कोई नुकसान पहुंचता है तो इसके लिए कानून और व्यवस्था के अधिकारियों और पूरे राज्य और राष्ट्रीय मशीनरी को जिम्मेदार ठहराया जाएगा।”

वहीं विपक्षी भारतीय जनता पार्टी के उपाध्यक्ष किरीट सोमैया जेल पहुंचे और गोस्वामी की उचित देखभाल और सुरक्षा की मांग की।

सोमैया ने मीडियाकर्मियों से कहा, “जेलर ने मुझे जेल में गोस्वामी का उत्पीड़न न करने का आश्वासन दिया और यदि आवश्यक हो तो उचित चिकित्सा मुहैया कराई जाएगी।”

सोशल मीडिया पर मीडिया खबर

665,311FansLike
4,058FollowersFollow
3,000SubscribersSubscribe

नयी ख़बरें