विनीत कुमार
2. आम और मध्यवर्ग का खून चूसकर कॉर्पोरेट जिस तेजी से पैर पसारता गया और चमचमाती बड़ी गाड़ी, दैत्याकार फ्लैट्स,विदेश भ्रमण और रंग-बिरंगा पानी के लालच में मीडियाकर्मियों ने जिस तरह से न केवल इनका साथ दिया और देते आए हैं बल्कि वो खुद भी कार्पोरेट बन गए, नेटवर्क 18 में एकमुश्त 350 लोगों की छंटनी की खबर से आप समझ सकते हैं कि वो जिस कार्पोरेट की कंठी-माला लेकर उसे पालने-पोसने का काम किया, आज वही उसकी क्रेडिबिलिटी को चूसकर कैसे चौसा आम की तरह सड़क पर फेंक दे रहा है.
3. नेटवर्क 18 से करीब साढ़े तीन सौ लोगों को निकाल-बाहर करने की तैयारी पूरी हो चुकी है. आप सीएनएन-आइबीएन. आइबीएन7 के लोगों से अभी बात कीजिए तो लगेगा कि टांसिल प्रॉब्लम के शिकार हो गए हैं, ठीक से आवाज नहीं निकल रही है. सूत्रों के अनुसार मिली खबर पर गौर करें तो इस्तीफा बांटने का काम शुरु हो गया है..लेकिन द हिन्दू की रिपोर्ट को छोड़ दें तो मेनस्ट्रीम मीडिया में चारों तरफ सन्नाटा पसरा है. कोई कुछ बोलने के लिए तैयार नहीं है. उल्टे चैनल आर्थिक मंदी की स्टोरी को इस अंदाज में पेश कर रहा है जैसे संस्कृत के सूत्र की व्याख्या कर रहा हो और हमारा काम उदाहरण खोजने का है. यही काम दूसरे सेक्टर में होता तो मीडिया आसमान सर पर उठा लेता .
4. नेटवर्क 18 से साढ़े तीन सौ लोगों की छंटनी की जो तलवार चली है वो दरअसल रिलायंस इन्डस्ट्री वाया नरेन्द्र मोदी की है. इस पर पूरी स्टोरी जल्द ही विस्तार से..फिलहाल नींद और थकान के मारे बुरा हाल है. हालांकि इस खबर से बिस्तर पर जाने के बाद भी नींद नहीं आएगी. कई दुश्चिंताओं से मन भरा है. मीडिया की क्लास में हम अक्सर अपने छात्र को खूब मेहनत करने, रगड़ने,लिखने की आदत डालने और तथ्यात्मक बातें लिखने की सलाह देते हैं, अपील करते हैं लेकिन ऐसी घटनाओं के बाद भीतर से हिल जाते हैं. यहां तो योग्य होना भी एक स्तर पर ज्यादा खतरनाक है- अगर उन्होंने ये सब कर भी लिया तो ? योग्य होने के बाद इस तरह निकाल-बाहर किए जाएंगे और कल को पलटकर ये छात्र मुझसे योग्यता की अहमियत को लेकर सवाल करेंगे तो मैं उन्हें क्या जवाब दूंगा.. रात की बेचैनी, ओफ्फ.
(साभार – फेसबुक)