जब ‘अरुणब घोस्वामी’ जा पहुँचे भारत-पाक बॉर्डर पर

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जब ‘अरुणब घोस्वामी’ जा पहुँचे भारत-पाक बॉर्डर पर
जब ‘अरुणब घोस्वामी’ जा पहुँचे भारत-पाक बॉर्डर पर

रोहित श्रीवास्तव




जब ‘अरुणब घोस्वामी’ जा पहुँचे भारत-पाक बॉर्डर पर
जब ‘अरुणब घोस्वामी’ जा पहुँचे भारत-पाक बॉर्डर पर

व्यंग्य : भारत के सबसे अति उत्साहित, ऊर्जावर्धक एवं तेजस्वी प्रतिभाशाली पत्रकार, मुख्य जांच अधिकारी,वकील और न्यायाधीश अरुणब घोस्वामी का देश प्रेम और उनका अद्वितीय साहस और पराक्रम उनको बार्डर पर जाने से रोक नहीं पाया और वो एलओसी पर जा पहुंचे। घोस्वामी के इस साहसिक कदम ने पाकिस्तान सेना को लगातार धूल चटा रही भारतीय सेना के जज्बे मे मानो एक नयी जान फूँक दी। उनके जाने से सेना के जवानो मे एक नयी ऊर्जा का संचार हो गया था।

उधर दूसरी तरफ पाकिस्तान के खेमे मे इस खबर से अफरा-तफरी सी मच गयी थी। प्रशासनिक स्तर से लेकर सेना के निचले स्तर तक हर एक पाकिस्तानी अरुणब से खौफजदा नजर आ रहा था। यहाँ तक कि आनन-फानन मे पाकिस्तान ने अपनी सारी मिसाइलों को तैयार रहने को कह दिया था। शायद पाकिस्तानियों को घोस्वामी बाबा कितने घातक हो सकते थे उसका अंदाजा उन्हे पहले से ही पूर्वानुमित था। इससे पहले भी अरुणब ने अपने ‘फ्यूज़आवर’ न्यूज़ प्रोग्राम मे पाकिस्तान पेनलिस्ट के छक्के छुड़ाए हुए थे।

इसी बीच पाकिस्तान की ओर से फायरिंग की खबर आ रही थी। घोस्वामी बाबा ने बार्डर पर स्वयं ही ‘खुद’ को सेनापति घोषित करके भारतीय सेना की बागडोर हाथ मे ले ली थी। ‘नेशन वंट्स टु नो’ के जयकारों के साथ जवानो ने आगे बढ़ना शुरू कर दिया था जिसका आक्रामकता के साथ नेत्रत्व कर रहे थे बाबा अरुणब घोस्वामी। ‘नेशन वंट्स टू नो’ ने पाकिस्तान सेना मे हड़कंप मचा दिया था सभी पाकिस्तानी सैनिक कुत्ते की तरह पागल होके इधर से उधर भाग रहे थे। शायद उनके कान का ‘फ्यूज’ उड़ गया था। अकेले दम पर अरुणब ने हजारो पाकिस्तानियों को मिनटों मे ‘बेहरे’ के साथ दिमाग से पैदल बना दिया था। उनका अचूक वाणी-शस्त्र ‘नेशन वंट्स टु नो’ बड़ा कारगर साबित हो रहा था। पाकिस्तान सैनिकों को तभी राहत मिल पा रही थी जब वो ‘एक सेकंड’ या ‘एक मिनट’ लेते थे। घोस्वामी जी को बिना हथियार बार्डर पर भेजना भारत सरकार की कूटनीतिक चाल के का हिस्सा हो सकता है । भारत वैश्विक मंच को यह संदेश देना चाहता है की वो बिलकुल भी ‘अस्त्र-शस्त्र-हथियार’ मे विश्वास नहीं रखता है। इसी उद्देश्य से घोस्वामी बाबा को बार्डर पर बातचीत के जरिये जंग लड़ने के लिए भेजा गया था। विश्वास मानिए बदुक की गोली मे जो दम नहीं है वो अरुणब बाबा की ‘अजब-गजब’ आवाज़ मे है। जिनकी आवाज़ से समस्त संसार क्या सम्पूर्ण ब्रह्मांड काँप उठता है उसके सामने ‘पाकिस्तान’ क्या चीज़ है।

उनका ‘इंडिया वंट्स टू नो’ कहते ही बार्डर पर खड़े दुश्मन या तो ‘परलोक’ सिधार गए या फिर कान मे ‘तेल’ डालने के लिए इधर-उधर पागल कुत्तो कि तरह ‘जय हिन्द…जय हिन्द’ कहते नाच रहे थे। कई पाकिस्तानियों ने तो अरुणब के सामने समर्पण तक कर दिया। इस असीम हृदय-परिवर्तन को देख कर घोस्वामी बाबा आनंद के कारण मन्मोंचित हो गए और उनका मन ‘अमन की आशा’ की ओर पुनः अग्रसित हो गया।

भारतीय जवान घोस्वामी बाबा की जय-जयकार लगाते और कहते हे ‘फ्यूजआवर’ के दाता। ‘टाइम्स नाव’ के विधाता। सर्वज्ञानी, सर्वबलशाली जिसके सामने न टिक पाये कोई ‘खली’। भारत का ब्रह्मास्त्र आप ही हो….अग्नि मिसाइल… मिग फाइटर विमान आपके सामने प्रभु पानी भरते है।

जय हो गोस्वामी बाबा की …

रोहित श्रीवास्तव
रोहित श्रीवास्तव

रोहित श्रीवास्तव

कवि/लेखक/व्यंगकार
अध्यापक
आईएएस ऑफिसर के पूर्व निजी सचिव
बहुराष्ट्रीय कंपनी मे पूर्व प्रबंधकारिणी सहायक




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