अंबानी आम से ज़्यादा पत्रकार खा गए, तो क्या हम कलम और कैमरे की रंडियां हैं?

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CNN-IBN और IBN-7 में हुई छंटनी पर पत्रकार पाणिनि आनंद की प्रतिक्रिया

ibn-mandi-ipshitaPanini Anand : अजब स्थिति है. एक ओर दिल्ली के कुछ स्वनामधन्य सरोकारी पत्रकार अंबानी की ओर से तोहफे में मिला अलफांन्ज़ो आम अपने पड़ोसियों को खिला रहे हैं. हाथ का मैल छुड़ाकर लाल कॉरिडोर से लेकर समाजवादी दमन तक का कहानी गा रहे हैं.

दूसरी ओर अंबानी आम से ज़्यादा पत्रकार खा गए हैं. पत्रकार खाए जा रहे हैं. अलग-अलग जगहों पर. नुकसान की भरपाई के लिए या फिर मुनाफ़े में इज़ाफ़े के लिए. ताज़ा घटना में जिनके सिर काटे गए हैं, वे ईमानदारी से काम करने वाले, हुनरमंद और बेहतरीन लोग हैं.

नौकरी से निकालने के लिए किसी आधार की ज़रूरत शेष नहीं रही है. अगले एक साल में हालात और बदतर होते जाने हैं.

पत्रकारिता की कक्षाओं में जिन प्रशिक्षुओं को यह समझाता रहा, उनके लिए जीवंत और कड़वे उदाहरण सामने हैं.

अगले एक साल में दिल्ली में अगर पत्रकारों की आत्महत्या का सिलसिला शुरू हो जाए तो आश्चर्य मत कीजिएगा.

आगे आगे देखिए होता है क्या. तो क्या हम कलम और कैमरे की रंडियां हैं, जिनके कोठे पर दबिश पड़ी है. मौसी पुलिसिये के साथ मुस्कराती हुई पान खा रही है. शर्मनाक. बेहद शर्मनाक.

(फेसबुक से साभार)




2 COMMENTS

  1. सबसे चौंकाने वाली बात ये कि जेट और किंगफिशर के कर्मचारियों को निकाले जाने या सैलरी ना मिलने पर हाय तौबा मचाने वाले न्यूज चैनल आज आईबीएन के पत्रकारों को निकाले जाने पर एक शब्द नहीं बोल रहे…असलियत में सारे संपादक मालिकों के हाथों बिक चुके हैं, एकाध हैं भी जो पत्रकारों के लिए लड़ते हैं उनकी सुनता कौन है ….

  2. यह बहुत ही, दुखद और शर्मनाक स्थिति है… पता नहीं इसका मुकाबला करने के लिए मीडियाकर्मी लोग क्या सोच रहे हैं…

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