पीड़ित पत्रकार रहीसुद्दीन ने यूपी पुलिस की कार्यशैली से आज़िज आकर आला अधिकारियों को लिखा शिकायती पत्र

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सेवा में, 03 अगस्त 2014
माननीय आला अधिकारियों जी.
पुलिस विभाग, उत्तर-प्रदेश.

महोदय,

रहीसुद्दीन
रहीसुद्दीन
मैं एक अदना-सा पत्रकार हूं, ज़िला गाजियाबाद के थाना लोनी एरिया में रहता हूं. घर में बूढ़े मां-बाप हैं और 2 भाई,1 बहन है. मैं 29 जुलाई 2014 को अपने माता-पिता और भाई-बहनों के साथ ईद मनाने के लिए अपने नानाजी के घर गया था. नानाजी की छह माह पूर्व गुज़र गये थे तो ईद पर वहां जाना
ज़रुरी था.

जब मैं 30 जुलाई 2014 को घर वापिस आया तो पता चला घर में चोरी हो गई है. चोर घर में रखे 35 हज़ार रुपये, 9 तोले सोने के जेवरात, डेढ़ किलो चांदी के जेवरात, 4 गैस सिलेंडर और एक कंम्प्यूटर सैट ले गये हैं. ये सब सामान माता-पिता की अभी तक की जमा-पूंजी थी.

मैंनें इस मामले में मुक़दमा दर्ज करने के 30 तारीख़ को ही लोनी थाना में तहरीर दी. पर थाने वालों ने मक़दमा दर्ज करने से मना कर दिया और कहा कि साहब कहेंगे तो कर देंगे मुक़दमा दर्ज, वरना नहीं. मैंनें साहेब से फ़ोन पर बात की. साहेब को समझाया-बुझाया. साहेब ने मुंशी को मुक़दमा दर्ज करने की स्वीकृति दे दी. लेकिन मुक़दमा फ़िर भी दर्ज नहीं हुआ. क्योंकि थाने में रोजनामचा उपस्थित नहीं था. मुंशी ने कहा कि आपका मामला कल दर्ज होगा.
उसके जबाव में मैंनें कहा कि चोरी तो मेरे घर में आज हुई है तो मामला फ़िर कल क्यों दर्ज होगा. काफी बातचीत हुई उससे. अंत में मेरे काफ़ी दबाव ड़ालने पर तहरीर स्वीकार करने को राज़ी हुआ मुंशी. मैंनें कहा मुक़दमा कब दर्ज होगा अब..? तो उसने कहा- कल आ जाईये आप. कल आपको एफआईआर की कॉपी मिल जायेगी.

मैं अगले दिन ठीक 24 घंटे बाद थाने पहुंचा. थाने में मुंशी से मिला. मुंशी की ड़यूटी चेंज थी. मैंनें नये मुंशी से एफआईआर की कॉपी मांगी. उसने मेरा नाम-पता पूछते हुए रजिस्टर तलाशने शुरु किये. पर उसमें मेरे मामले की एफआईआर कॉपी नहीं थी. उसने कहा- आपका मुक़दमा अभी लिख़ा नहीं है… लिखा जायेगा अभी.

मैंनें कहा ठीक है लिख दीजिये. उसने कहा बैठ जाईये, अभी 1 घंटा लगेगा. मैं उसकी बात सुनकर बैठ गया. एक घंटा पूरा हुआ और उसने रोजनामचे में सारी तहरीर को शब्द-ब-शब्द लिखा. उसके बाद तहरीर को आगे बढ़ाते हुए कंम्प्यूटर ऑपरेटर की तरफ़ बढ़ा दिया.

मैंनें देखा कंम्पयूटर ऑपरेटर ने मेरी तहरीर अपने ड्रोर में रख दी है. उसने कहा कल ले लीजियेगा एफआईआर की कॉपी. मैंनें कहा- क़ल दी थी तहरीर. अभी तक मुझे एफआईआर की कॉपी नहीं मिली है. मुझे अभी चाहिए एफआईआर की कॉपी. उसने भौंहों को सिकोड़ते हुए एक घंटे बाद आने के लिए कहा. मैंनें एक घंटा इंतज़ार किया. तब कहीं मुझे एफआईआर की कॉपी मिल पाई.

थाने वालों की लापरवाही अभी ख़त्म नहीं हुई थी. इंद्रापुरी चौकी इंचार्ज भानु प्रताप सिंह को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया. आज 5 दिन हो गये हैं लेकिन पुलिस अभी तक वारदात का कोई सुराग नहीं निकाल पाई है. आपकी पुलिस कछुए चाल से भी कम गति से कार्रवाई कर रही है. इससे मैं दुखी होने के साथ-साथ ख़ासा ऩाराज हूं. मेरे बूढ़े मां-बाप हैं. उनको बार-बार संभालना मेरे लिए कठिन होता जा रहा है. आपकी कार्यशैली से मुझे विश्वास नहीं हो पा रहा है कि पुलिस कभी चोरों के पकड़ पाएगी.

आपसे निवेदन है कि आप अपने विभाग को हिदायत दें और मेरे मामले में जल्द से जल्द जांच करवाकर अपराधियों को पकड़े. मैं आपका सदैव आभारी रहूंगा.

शिकायतकर्ता-
रहीसुद्दीन S/O मौ. हारुन
निवासी- 455, बी-ब्लॉक, संगम विहार, लोनी गाजियाबाद- 201102.
मोबाईल नंबर- 9555023323.

ज़िला- गाजियाबाद
थाना- लोनी
एफआईआर नंबर- 1280
रोजनामचा संख्या- 42,
दिनांक- 31/07/2014

आपसे जल्द कार्रवाई की उम्मीद में एक दुखी अदना-सा पत्रकार- रहीसुद्दीन.

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