अखबार के खिलाफ जदयू नेता के आंदोलन का सच

1
445

मनोज सिन्हा

‘मुंगेर में प्रभात खबर की कॉपियां फूंकी जा रही है’ शीर्षक से श्रीकृष्ण प्रसाद की रिपोर्ट को कई बेव पत्रिकाओं में देखने का अवसर मिला और इसके पीछे के सच को तलाशने की कोशिश एक पत्रकार की निगाह से मैंने की. रिपोर्ट में जिस छाया चित्र का इस्तेमाल किया गया है वे स्वयं इस बात का गवाह है कि इसमें दल के लोग शामिल नहीं हैं. बल्कि यह स्वयं उसका अभियान है और इसे वही पत्रकार तूल दे रहे हैं जिसे काफी पहले चुनाव के दौरान सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के तत्कालीन के उपनिदेषक सुरेश पांडेय ने दूसरे के प्रेस प्राधिकार पत्र पर घूमते हुए पाया था. मामला 420 ही का था. पुलिस के हवाले करने की बात हो रही थी. लेकिन लिखित माफीनामा के पश्चात उन्हें छोड़ा गया.

यह सच है कि नरेंद्र कुशवाहा के मामले में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतिश कुमार और वर्तमान मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के साथ-साथ जदयू के कई नेताओं ने कोई दिलचस्पी नहीं दिखायी. कारण सिर्फ एक था कि आपराधिक किरदार के कार्यकर्ता को मदद करने से शासन और प्रशासन के बीच गलत संदेश जाता. इसी कारण जदयू ने नरेंद्र कुशवाहा को पार्टी के जिला सचिव पद से बर्खास्त कर दिया.

मुंगेर के पुलिस अधीक्षक वरूण कुमार सिन्हा ने पूरे प्रकरण की जांच मुंगेर रेंज के आरक्षी महानिरीक्षक के निर्देश पर अपर पुलिस अधीक्षक संजय कुमार सिंह से करवायी और उसकी रिपोर्ट 26 जून को ही समर्पित की जा चुकी है. लेकिन 21 अक्तूबर के पोस्ट में संघर्षशील पत्रकार कृष्णा प्रसाद ने सारे तत्वों को दर किनार कर न सिर्फ बेव पत्रिकाओं को दिग्भ्रमित किया बल्कि इससे दिलचस्पी रखने वाले तमाम लोगों को गुमराह भी किया. एएसपी के पत्रांक 1892 दिनांक 24 जून 2014 के माध्यम से जांच के दौरान नरेंद्र कुशवाहा को इस कांड में दोषी माना और पुलिस ने 30 जून को आरोप पत्र संख्या 109/13 के माध्यम से अभियुक्त नरेंद्र के विरूद्ध शस्त्र अधिनियम की धारा 25 (1 बी) ए/26 की धारा के तहत न्यायालय में चार्ज शीट दाखिल किया गया है. अब यह मामला न्यायालय में है. जबकि श्रीकृष्ण प्रसाद की रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि डीआईजी द्वारा जिन सात बिंदुओं पर एसपी को जांच का आदेश दिया गया था उसे पुरा कर कारवाई की जाय. जब जांच कर एसपी ने नरेंद्र कुशवाहा को आर्म एक्ट में दोषी करार कर दिया और उसके विरुद्ध आरोप पत्र भी कोर्ट में दाखिल कर दिया गया तो इस परिस्थिति में एक पत्रकार द्वारा आरोपी को प्रोत्साहित कर अखबार जलवाने की घटना कहां तक सही है.

1 COMMENT

  1. narendra kushwa ke khilaf charg sheet dakhi hote hi kai logo ki raat ki nind haram ho gayi hai. charg sheet dakhil hone ke baad maanniya patrkar kirishna prasd ki sakiriyata to kai swalo ko janm de rahi hai. chargeet court me jma hote hi kirishna prasad ne web media par jis tarh se galat tathyo ke hwale se anasnap likhna suru kiya hai. us se yah sandeh utpann ho raha hai ki hathiyar taskari ke khel me unki bhi bhumika hai. charjseet ke baad police anusandhan ki aanch un tak nahi pahuche. isliye unhone pahle se hi police aur media ke khilaf halla bol diya hai. aise me unki bhumika ki naye sire se jaanch kari jani chaye.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

two + 3 =