नोटबंदी के बाद तीन तलाक की आंधी से ख़त्म होने के इंतजार में विपक्ष!

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modi triple talaq
ट्रिपल तलाक और पीएम मोदी

अभय सिंह-

11 मार्च को यूपी में बीजेपी की अपार सफलता से घबराये नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला का ट्वीट जिसमे विपक्ष को 2019 चुनाव को छोड़ 2024 की तैयारी के लिए कहा था ।आज उनके ये विचार मूर्त रूप लेना प्रारम्भ हो गए है।

तीन तलाक जैसे संवेदनशील मसलों पर पीएम नरेंद्र मोदी के खुलकर सामने आने से मुस्लिम महिलाओं में उनके प्रति अटूट विश्वास एवं अपार समर्थन देखने को मिल रहा है।विपक्ष आज अपने बड़े वोटबैंक को खिसकते देख पंगु की स्थिति में खड़े होने को मजबूर है।

हाल ही में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अपनी किताब ‘द टर्बुलेंट इयर्स :1980-1996’ में अयोध्या में राम जन्मभूमि का ताला खुलवाने और शाहबानो प्रकरण में लिए गए फैसले को तत्‍कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की बड़ी गलती बताया था।
लोग जानते हैं कि शाहबानो प्रकरण ने किस तरह देश की राजनीति को बदलकर रख दिया था. आज पीएम मोदी राजीव गांधी की तरह कट्टरपंथियों के दबाव में आने के उलट खुलकर मुस्लिम महिलाओ के पक्ष में मजबूती से डटे है।और उनको जल्द न्याय दिलाने के पक्षधर है।

-तीन तलाक का मुद्दा शाहबानो केस से भी अधिक ज्वलंत और क्रांतिकारी सिद्ध होगा।ये मुद्दा इतना व्यापक है की इसमें आधी मुस्लिम आबादी का भविष्य टिका हुआ है।

-मोदी और उनकी सरकार अगर बिना किसी विवाद के इस मुद्दे को सुलझा लेते हैं तो ये सुधारवादी कदम आजादी के बाद किसी नेता की सबसे बड़ी राजनीतिक सफलता होगी।इससे इनका जनाधार इतना व्यापक होगा जिसकी कल्पना करना सम्भव नहीं होगा।

-बड़ी रोचक बात तब सामने आती है जब मुस्लिम महिलाएं तीन तलाक के मसले पर टीवी परिचर्चा में कट्टरपंथी धर्मगुरुओ से सीधे भिड़ जाती है और उनकी बोलती बंद कर देती है।अगर इस मसले पर मुस्लिम महिलाये अगर खुलकर सामने न आती तो कट्टरपंथी मौलाना,धर्मगुरुओ, सेक्यूलर विपक्षी दलों द्वारा असहिष्णुता,धार्मिक स्वतंत्रता के उलंघन का मामला बनाकर मोदी सरकार को बुरी तरह से घेरा जा सकता था।लेकिन मुस्लिम महिलाएं आज अपनी घोर पीड़ा,अत्याचार से निजात पाने की आस लेकर मोदी सरकार के लिए ढाल का काम कर रही है।

-मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड द्वारा इस मामले में चुप्पी ,और सरकार का खुलकर विरोध करना मुस्लिम महिलाओ को नागवार गुजर रहा है।

-ये गौर करने की बात है कि तीन तलाक के मामले का अंतिम समाधान कॉमन सिविल कोड है क्योकि अगले महीने इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई में अगर इस निर्णय(CCC) पर मुहर लगा दी तो कट्टरपंथी मुस्लिम तबका इसकी मुखालफत जरूर करेगा और निश्चित ही इसे मानने से इनकार कर देगा।ऐसी स्थिति में देखना होगा की सरकार इस लागू कर पाने में कितनी सफल होती है ।वैसे इस मुद्दे को देशव्यापी बनने से मोदी ने जबरदस्त राजनीतिक बढ़त ले ली है।

अभय सिंह ,राजनैतिक विश्लेषक
अभय सिंह,
राजनैतिक विश्लेषक

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