चुनावी सर्वे का स्टिंग आपरेशन या जालसाजी ?

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मनीष कुमार

ऑपरेशन प्राइम मिनिस्टर
ऑपरेशन प्राइम मिनिस्टर

न्यूज एक्सप्रेस द्वारा चुनावी सर्वे के उपर स्टिंग आपरेशन देखा.. चुनावी सर्वे भ्रम फैलाते हैं.. ऐसा मैंने विधानसभा चुनावों से पहले एक रिपोर्ट लिखी थी.. इसमें हमने आम आदमी पार्टी द्वारा की गई सर्वे का विश्लेषण किया था.. आप लोगों ने इसे पढ़ा भी होगा. दरअसल, हिंदुस्तान में ऐसी कोई सर्वे एजेंसी नहीं है, जिसकी भविष्यवाणी ग़लत नहीं हई हो. तो क्या सभी एजेंसियां धोखा देने का धंधा करती है? सर्वे अपने आप में ग़लत नहीं होते. यह एक तरीक़ा है, एक ज़रिया है जिससे एक अनुमान, बस अनुमान ही लगाया जा सकता है. सच्चाई ये है कि बिल्कुल ईमानदारी और वैज्ञानिक तरीके से किया गया सर्वे भी गलत हो सकता है. इसलिए जो लोग इस स्टिंग आपरेशन को लेकर अपनी छाती पीट रहे हैं कि यह प्रजातंत्र के साथ धोखा है और यह जनमत का सौदा है वो पूरी तरह से पुर्वाग्रह से ग्रसित हैं..

रही बात स्टिंग आपरेशन की .. तो मेरी नजर में ये कोई स्टिंग आपरेशन ही नहीं है.. आप किसी को फंसा कर उनकी बातचीत रिकार्ड कर लो… ठीक वैसे ही जैसे सड़क पर 500 रुपये का नोट फेंक दो .. कैमरे लगा दो.. जो उसे उठाए उसे चोर बता दो.. इसे हम इनट्रैपमेंट कह सकते हैं.. जाल बिछा कर लोगों को फंसाया गया है.. समझने वाली बात यह है कि पांच घंटे का यह स्टिंग आपरेशन के दौरान किसी असली सर्वे को नहीं पकड़ा गया.. न कोई सर्वे हुआ… न कोई रिपोर्ट पेश की गई… न कोई फर्जी रिपोर्ट का खुलासा हुआ… न कोई पैसे का लेन-देन हुआ…

जो रिपोर्टर इन एजेंसी वालों से मिले वो किसी राजनीतिक दल के लिए या नेता के लिए दलाली करने वाले का रुप बदल कर मिले… वो ढेर सारे रुपये देने के आफर के साथ गए.. ऐसे में किसी को भी ट्रैप किया जा सकता है… स्टिंग आपरेशन तब इसे माना जाता जब वाकई में किसी ने पूरी डील की होती.. पैसा लिया होता और फर्जी सर्वे किया होता.. ऐसा तो कुछ हुआ नहीं… वैसे भी सर्वे करने वालों को पता है कि सर्वे का पूरा खेल ही अविश्वसनीय है.. वो सिर्फ भविष्य को जानने को कौतुहल मानव स्वभाव के साथ खेलते है.

वैसे मैं ये भी बता दूं कि स्टिंग करने वाले ज्यादातर रिपोर्टर मेरे मित्र हैं… हमने साथ में काम किया है.. इसलिए मैं उनसे और आपसे यही गुजारिश करना चाहता हूं कि इस स्टिंग आपरेशन में ऐसी कोई नई बात नहीं बताई गई है जो देश के लोगों को पहले से पता नहीं हो.. कि सर्वे फर्जी होते हैं और ये लोगों को भ्रमित करते हैं… यह खेल देश में पिछले 20 साल से चल रहा है…. इसलिए न तो गुनाहगार है… न ही कोई जुर्म है… बस टीआरपी का खेल है.

(लेखक चौथी दुनिया से जुड़े हैं. स्रोत – एफबी)

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