नकवी जी की पाठशाला में जानिए अन्तरराष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय और अन्तरराज्यीय-अन्तर्राज्यीय का अंतर

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qamar-wahid-naqvi-bhashaआजतक के पूर्व न्यूज़ डायरेक्टर और वरिष्ठ पत्रकार कमर वहीद नकवी पिछले एक साल से फेसबुक पर हिंदी की पाठशाला चला रहे हैं. पाठशाला का मतलब है कि फेसबुक पर लोग उनसे शब्दों के बारे में सवाल करते हैं और वे उसका जवाब देते हैं. इसी पाठशाला से कुछ शब्द और उनके अर्थ आज मीडिया खबर के पाठकों के लिए हम लेकर आए हैं. पहले जानते हैं अन्तरराष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय और अन्तरराज्यीय-अन्तर्राज्यीय का अंतर.

1. कमर वहीद नकवी अन्तरराष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय, अन्तरराज्यीय और अन्तर्राज्यीय
इस विषय पर इधर दो जिज्ञासाएँ मेरे पास आयीं. वैसे तो आजकल ज़्यादातर लोग ‘अंतर्राष्ट्रीय’ ही लिख रहे हैं क्योंकि टीवी में स्लग और ब्रेकिंग न्यूज़ की पट्टियों पर यह कम जगह लेता है.

लेकिन जो लोग बिलकुल सही ही लिखना चाहते हैं, उन्हें दो या अधिक राष्ट्रों के बीच हुई बात, घटना आदि के लिए अन्तरराष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय लिखना चाहिए और राष्ट्र के भीतर के लिए अन्तर्राष्ट्रीय या अंतर्राष्ट्रीय लिखना चाहिए. किसी ज़माने में डाक विभाग का एक INLAND LETTER हुआ करता था, जिसे अन्तर्देशीय पत्र कहा जाता था, क्योंकि उसे केवल देश के भीतर ही एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजा जा सकता था.
दो या अधिक राज्यों के बीच के लिए अन्तरराज्यीय और किसी एक राज्य के भीतर के लिए अन्तर्राज्यीय ही शुद्ध रूप है.

लेकिन सच यह है कि इससे लोगों में भ्रम फैलता है. अगर हमें राष्ट्र के भीतर की बात करनी है तो हम राष्ट्रीय, राष्ट्रस्तरीय, अखिल भारतीय या अन्तर्राज्यीय कह कर भी काम चला सकते हैं. जैसे राष्ट्रीय खेल, अन्तर्राज्यीय हिन्दी कार्यशाला, राष्ट्रस्तरीय निबन्ध लेखन प्रतियोगिता आदि. मुझे याद नहीं पड़ता कि इस अर्थ में ‘अन्तर्राष्ट्रीय’ शब्द का प्रयोग मैंने हाल के दशकों में देखा हो.

इसी प्रकार राज्य के भीतर के लिए हम राज्यस्तरीय, प्रादेशिक या अन्तरज़िला आदि लिख कर काम चला सकते हैं.

2सवाल : आतंकवादी और आतंकी शब्द में क्या फर्क है। मुंबई हमले के दोषी आमिर अज़मल कसाब को उपरोक्त में से क्या पुकारा जा सकता है। आतंकी या आतंकवादी।

कमर वहीद नकवी : दोनों में कोई अन्तर नहीं है. पहले आतंकवादी ही लिखते थे. टीवी न्यूज़ चैनलों ने उसे छोटा कर आतंकी लिखना शुरू किया. तब से यही चल पड़ा है.

3 सवाल : ‘बारे-बारें’, ‘यंत्रो-यंत्रों’, ‘मंत्रो-मन्त्रों’ में कौन से शब्द सही हैं, एक प्रश्न यह कि क्या अति उत्साह की जगह ज्यादा उत्साह लिखा जा सकता है या नहीं।
कमर वहीद नकवी : बारे सही है. इसमें अनुस्वार नहीं लगता.
यंत्रों सही है. अनुस्वार के साथ लिखा जायगा.
लेकिन जब हम जीवित प्राणियों की बात करेंगे तो अर्थ के अनुसार भाइयो व भाइयों, बहनो व बहनों, माताओ व माताओं, अंगरेज़ो व अंगरेज़ों दोनों अलग-अलग अर्थ के लिए लिखा जायगा. इस विषय पर मेरी एक पुरानी पोस्ट है, देख सकते हैं. संक्षेप में इतना ही कि जब हम सम्बोधन के लिए ऐसे बहुवचन प्रयोग कर रहे हैं, तो अनुस्वार नहीं लगेगा, जैसे किसी सभा में वक्ता द्वारा कहा जाता है–भाइयो और बहनो.
या अंगरेज़ों से कहा जाय– अंगरेज़ो, भारत छोड़ो. इस वाक्य में आप देखेंगे कि पहले वाले ‘अंगरेज़ों’ में अनुस्वार है, लेकिन दूसरे में नहीं है, जहाँ हम उन्हें सम्बोधित कर रहे हैं.
लेकिन जहाँ सम्बोधन का तात्पर्य न हो, वहाँ अनुस्वार लगेगा, जैसे राम के भाइयों में से एक लक्ष्मण उनके साथ वनवास पर गये.
मंत्रों व मन्त्रों में से सही तो मन्त्रों ही है, लेकिन आजकल सभी मंत्रों ही लिख रहे हैं.
अति उत्साह के स्थान पर ज़्यादा उत्साह लिखना उचित नहीं होगा. ज़्यादा का अर्थ अधिक होता है, अति नहीं.

4 कमर वहीद नकवी : प्रलय आयी नहीं, प्रलय आया
प्रलय पुल्लिंग है.
बहुत-से लोग उत्तराखंड से सम्बन्धित ख़बरों/ टिप्पणियों में प्रलय शब्द को स्त्रीलिंग मानकर लिख रहे हैं– प्रलय आयी.
यह ग़लत है.
प्रलय आयी नहीं, प्रलय आया.

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