दो टेलीविजन पत्रकारों के बीच मंदिर,मस्जिद और दरगाह पर घमासान

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दारेन शाहीदी और प्रखर श्रीवास्तव
दारेन शाहीदी और प्रखर श्रीवास्तव

टीवी पत्रकार प्रखर श्रीवास्तव और दारेन शाहिदी के बीच फेसबुक पर घमासान –

प्रखर श्रीवास्तव

वैसे तो पत्रकार का कोई धर्म नहीं होना चाहिए… लेकिन इस यूपी चुनाव में देख लिया कि कुछ पत्रकारों ने अपना धर्म पूरी ईमानदारी से निभाया है… और इन्ही में से एक हैं Darain Shahidi… दारेन शहिदी ने अपने फेसबुक पर मोदी के लिए लिखा कि “चुनाव प्रचार के दौरान मंदिर तो जाएंगे… लेकिन किसी दरगाह पर चादर नहीं चढ़ाएंगे।” जब मैंने दारेन से पूछा कि – कितने मुसलमान दरहगाह को पवित्र मानते हैं तो ये कुतर्क पर उतर आए… दारेन से मैंने पूछा कि – क्या मस्जिद और दरगाह दोनों पवित्र नहीं हैं तो उन्होने दरगाह और मस्जिद को बराबर मानने से इंकार कर दिया… जबत मैंने ये कहा कि “इस्लाम की दिक्कत ही यही है। अगर दरगाह को पाक मान लिया होता तो हम सब आज एक होते। अफसोस मुसलमान की पहली जंग मंदिर से नहीं दरगाह से है”… तो इसके बाद तो दारेन की तरफ से सेक्युलर हमलों का एक सिलसिला शुरु हो गया… मुझे आश्चर्य होता है कि दारेन जैसे लोग चौड़े पर मंदिर की तुलना दरगाह से कर देते हैं लेकिन दरगाह और मस्जिद की तुलना करने में इनका इस्लाम आड़े आने लगता है… असल मे आज ये साबित हो गया कि पिछले 20 साल से पत्रकार होने का अभिनय कर रहे इस शख्स के अंदर का एक “असली” मुसलमान एक “नकली” पत्रकार से कहीं ऊपर है… दारेन और मेरेे बीच हुए इस संवाद को पढ़िए और बताइये कि सेक्युलर होने का मुखौटा पहने ऐसे पत्रकारों का क्या किया जाए…

Prakhar Shrivastava दरगाह पर गए तो 90% मुस्लमान बोलेंगे ये तो कुफ्र है 😂😂😂😂
Prakhar Shrivastava आप बताओ दरगाह और मजार को कितने मुस्लमान कुफ्र मानते हैं
Prakhar Shrivastava सच्चा जबाव देना
Prakhar Shrivastava इस्लाम की दिक्कत ही यही है। अगर दरगाह को पाक मान लिया होता तो हम सब आज एक होते। अफसोस मुसलमान की पहली जंग मंदिर से नहीं दरगाह से है। बताइये क्या मैं गलत हु ????
Prakhar Shrivastava -Mujhe pata hai aap mujhe sampradaiyak ghoshit karenge isliye apne kuldevta ke mandir ki tashwir post kar raha hu… Jaha mandir ke sath mazar hai… Aur main in dono ko pujta hu…
Darain Shahidi आपके विचार उच्च हैं सर
Prakhar Shrivastava माफ़ करना आप बात को हवा कर रहे हैं
Darain Shahidi कौन सी बात ?
Prakhar Shrivastava डरो मत बोलो ना
Prakhar Shrivastava कितने मुसलमान दरगाह को मानते हैं
Darain Shahidi अच्छा अच्छा आप ये पूछ रहे हैं । पर आपके इस सवाल का तात्पर्य ?
Prakhar Shrivastava बस जानना चाहता हु
Darain Shahidi इसका प्रधानमंत्री जी कि भेदभाव वाली बात से कोई संबंध नहीं है। फिर भी बता देता हूं कि अधिकतर भारतीय मुसलमान या यूं कहें कि उपमहाद्वीप का मुसलमान सूफी परंपरा में विश्वास करता है। वहाबी विचारधारा नई नई इंपोर्ट हो रही है। वहाबी मतलब समझते होंगे ?
Prakhar Shrivastava ओह वहाबी। क्या आपको लगता है मैं इसका मतलब नहीं समझता। कृपया आप किस से विचार विमर्श कर रहे हैं ये पता कर लीजिये।
Prakhar Shrivastava वैसे आपने अब तक दरगाह का मतलब नहीं बताया
Darain Shahidi किस से पता करूं भाई । माफ कीजिए इस गरीब की अज्ञानता और अनभिज्ञता पर तरस खाकर स्वयं ही बता दीजिए। वैसे तेवर से कोई बड़े आदमी मालूम होते हैं
Darain Shahidi और मैंने आपकी अज्ञानता पर कोई सवाल नहीं उठाया
Darain Shahidi हां शंका अवश्य प्रकट की
Prakhar Shrivastava आपने उपमहाद्वीप के मुसलमान का ज़िक्र किया। कहा वो सूफी परंपरा को मानता है। तो फिर हमारे प्रिय पाकिस्तान में दरगाहो मैं ही क्यों बम्ब फट रहे हैं
Darain Shahidi प्रिय पाकिस्तान ! कटाक्ष है ये ! हे हे हे । वैसे सवाल अच्छा है
Darain Shahidi The answer is in your question itself. The biggest threat to the Wahhabis is the Sufi order practiced in the the subcontinent.
Darain Shahidi ओहो । देखी सर आपकी प्रोफाइल। गलती हो गई बड़े आदमी हैं आप तो
Darain Shahidi पर वो भेदभाव वाली बात तो सही कही है न मैंने ? नहीं होना चैये न !
Prakhar Shrivastava बिल्कुल दरगाहो औऱ मस्जिदों में भेदभाव नहीं होना चाहिए
Darain Shahidi सहमत
Darain Shahidi पर वे दो अलग-अलग चीजें हैं
Darain Shahidi और प्रधानमंत्री वाली बात ? भेदभाव वाली ?
Prakhar Shrivastava आपको अपने परवर दिगार की कसम… आज आप कहिए मस्जिद और दरगाह दोनों पाक हैं… हर मुसलमान को दोनों को बराबर मानना चाहिए
Darain Shahidi मेरे परवरदिगार कौन है आपको पता है ? कमाल है ।
दरगाह अलग है मस्जिद अलग है । दोनों का अपना अलग महत्व है।
Prakhar Shrivastava तो फिर डर क्यों रहे हैं… कहिए ना मस्जिद और दरगाह बराबर हैं… फतवे से क्यों डरते हैं
Darain Shahidi जब बराबर है नहीं तो कैसे कह दूं कि बराबर है भई ।
Prakhar Shrivastava अच्छा बराबर क्यों नहीं हैं… क्या आप मुझे बता सकते हैं प्लीज़

Darain Shahidi

हद होती है जहालत की । जब वहां जवाब न दे पाए तो यहां आकर गंदगी फैला दी । पत्रकारिता का कितना ह्रास हुआ है ये इसका बेहतरीन नमूना है। चाल देखिए । महाशय ने सवाल ये किया था कि क्या मस्जिद और दरगाह बराबर है ? जिसका जवाब मैंने दिया “नहीं लेकिन दोनों का अलग अलग महत्व है। पवित्रता पर सवाल नहीं था । बड़ी चतुराई से कुछ कमेंट्स छुपा दिए गए हैं। रही बात मुसलमान होने की तो प्रखर मीर का एक मिसरा सुनो ।
कश्का खैंचा दह्र में बैठा कबका तर्क इस्लाम किया। इस तरह से बहस छोड़, कर भागना और फिर अपनी वॉल पर टैग कर खिसियाहट निकालना ठीक नहीं है।
पोस्ट भेदभाव पर थी और वह सवाल कायम है।

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