राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में दुनिया भर के नाटय स्कूलों को मिलेगा मंच

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राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में दुनिया भर के नाटकों को मिलेगा मंच
राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में दुनिया भर के नाटकों को मिलेगा मंच

19 अक्टूबर से शुरू होगा नाट्य विद्यालयों का 9वां एशिया-पेसिफिक ब्यूरो सम्मेलन




राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में दुनिया भर के नाटकों को मिलेगा मंच
राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में दुनिया भर के नाटकों को मिलेगा मंच

नई दिल्ली, 13 अक्टूबर: देश की प्रमुख नाट्य शिक्षण संस्था – राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) में दुनिया के विभिन्न हिस्सों के बेहतरीन थिएटर स्कूलों का भव्य समागम होने जा रहा है। एनएसडी परिसर में होने वाले इस समागम की तैयारियां पूरी हो चुकी है। मंच सज चुके हैं और पर्दा उठने ही वाला है। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय दुनिया भर के नाट्य विद्यालयों के 9 वें एशिया-पेसिफिक ब्यूरो (एपीबी) सम्मेलन की मेज़बानी करने वाला है। इस सम्मेलन में नई दिल्ली स्थित एनएसडी सहित विभिन्न देशों ; बंगलादेश , चीन, इंडोनेशिया, ईरान, जापान, दक्षिण कोरिया, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर और थाईलैंड सहित दस देशों के 14 नाट्य स्कूल हिस्सा लेंगे। इन विद्यालयों के प्रतिनिधि एवं छात्र एशिया पेसिफिक क्षेत्र के नाट्य विद्यालयों के वार्षिक सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए एनएसडी के परिसर में जुटेंगे। कुल मिलाकर इस आयोजन में 20 देशों का प्रतिनिधित्व होगा। इस सम्मेलन में इन देशों के पर्यवेक्षक, शिक्षक और छात्र भी शामिल होंगे।
देश के इस अग्रणी और प्रमुख नाट्य विद्यालय में आयोजित होने वाले विश्व स्तरीय सांस्कृतिक रंगमंच आयोजन की तैयारी को लेकर भरपूर उत्साह है। एनएसडी में 19 से 25 अक्तूबर तक होने वाले इस व्यापक आयोजन को सफल तरीके से सम्पन्न करने के लिए पूरे जोर-षोर से तैयारियां चल रही है। एपीबी सम्मेलन के इस साल के संस्करण का मुख्य विशय है – ‘‘समकालीन मंचीय संस्कृति में एशिया की क्षमता।’’ सम्मेलन के दौरान एशिया में समकालीन मंचीय संस्कृति तथा इसमें सामग्री, स्वरूप एवं शैली के संदर्भ में योगदान देने वाले परम्परावाद, आधुनिकीकरण और अन्य कारकों के विभिन्न तत्वों की समीक्षा होगी।

एपीबी सम्मेलन अंतरराष्ट्रीय स्तर का सर्वाधिक दिलचस्प थिएटर आयोजन है जो एशिया पेसिफिक क्षेत्र के नाट्य विद्यालयों को मंच प्रदान करता है। इसमें हिस्सा लेने वाले स्कूल मंचीय प्रदर्षनों तथा इसके तकनीकी पहलुओं में विभिन्न सांस्कृतिक बारीकियों का पता लगाएंगे तथा इन पर विस्तार से विचार-विमर्ष करेंगे। यह महोत्सव छात्रों एवं संकाय (फैकल्टी) दोनों के लिए एक दुर्लभ अवसर है।

इस आयोजन के इस संस्करण में भाग लेने वाले स्कूलों के लिए एक व्यापक शिक्षा कार्यक्रम की व्यवस्था की गई है। इसमें महोत्सव प्रदर्शन, निर्देशकों की बैठक, संवाद सत्र एवं कार्यषाला शामिल है। हर विद्यालय अन्य सभी विद्यालयों के लिए कार्यषाला आयोजित करेंगे जिसमें उस स्कूल की ओर से प्रतिभागियों के लिए अभ्यास श्रंृखलाओं के माध्यम से अपने यहां के प्रशिक्षण के तौर-तरीकों के बारे में जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा एक व्यवहारिक सत्र भी होगा जहां हर स्कूल को मंचन के लिए स्टूडियो स्थल उपलब्ध कराया जाएगा। इस सम्मेलन में हिस्सा लेने वाले स्कूल 45 मिनट की छात्र प्रस्तुति पेष करेंगे। यह एनएसडी के फ्लेक्सिबल परफारमेंस स्पेस में आयोजित होगा।

राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के निदेश क प्रो. वामन केंद्रे ने कहा, ‘‘यह एक और अवसर है जहां एशिया पेसिफिक ब्यूरो के स्कूल एक दूसरे के समक्ष अपनी क्षमता को प्रदर्षित कर सकेंगे तथा एक दूसरे के साथ अपने अनुभवों को साझा कर सकेंगे। यह एनएसडी के लिए भी एक ऐसा मंच है जहां समृद्ध भारतीय रंगमंचीय विरासत को प्रदर्षित किया जाए तथा दुनिया के समक्ष समकालीन तथा परम्परागत रंगमंचीय विविधता को दिखाया जाए।

यह अवधारणा है कि पष्चिमी रंगमंच की तुलना में एशिया पेसिफिक क्षेत्र की अलग सांस्कृतिक विषेशता है और इसलिए रंगमंच के कलाकारों, नाट्य लेखकों तथा दर्षकों के बीच विचारों का आदान-प्रदान किए जाने तथा नई संभावनाओं का पता लगाए जाने की जरूरत है। इसी विचार से नाट्य स्कूलों के एशिया पेसिफिक ब्यूरो की स्थापना हुई। हर साल एपीबी का सम्मेलन आयोजित होता है जिसमें नाटक के छात्रों एवं षिक्षकों को अनेक तरह से एक दूसरे के साथ संवाद करने के अवसर मिलते हैं। एक सप्ताह तक चलने वाले इस आयोजन के दौरान प्रतिभागी कार्यषाला में, संकाय सदस्यों द्वारा दी जाने वाली प्रस्तुतियों, अभ्यास सत्रों तथा अन्य कार्यक्रमों के जरिए अपने विचारों एवं अनुभवों का आदान-प्रदान कर सकते हैं।
एपीबी के इस संस्करण की अध्यक्षता कर रही एनएसडी की प्रोफसर सुश्री त्रिपुरारी शर्मा कहती हैं, ‘‘विभिन्न संस्कृतियों के सम्मेलन और कहानियों तथा मंचीय अवधारणाओं के आदान-प्रदान से रंगकर्म की कला समृद्ध होती है।’’

एपीबी सम्मेलन की भावना एक दूसरे के साथ जुड़ने, एक दूसरे के साथ विचार साझा करने, एक दूसरे से संवाद करने तथा एक दूसरे से सीखने की है। यह रंगमंच के शिक्षण एवं अभ्यास के लिए मूल्यवान और आवश्यक है। एपीबी सम्मेलन की मेज़बानी करना एक गौरव है और यह गौरव राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय को दूसरी बार मिल रहा है। पहली बार एनएसडी को यह महत्वपूर्ण दायित्व 2011 में मिला था।

राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की स्थापना 1958 में हुई थी और इस अंतराल के दौरान इसके छात्रों की प्रतिभा, कुषल संकाय संदस्यों के प्रयासों तथा सम्मानित निदेश कों के दिषा-निर्देषों की बदौलत यह दुनिया के सर्वश्रेश्ठ नाट्य वि़द्यालयों में षुमार हो गया। इस विद्यालय के पास दो मंचीय प्रभाग हैं – रेपर्टरी कंपनी और थिएटर-इन-एजुकेशन कंपनी।

इन दोनों प्रभागों के अलावा स्कूल के पास सक्रिय विस्तार कार्यक्रम, प्रकाशन अनुभाग और श्रुति नामक एक साहित्यिक मंच है। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय ने देश भर में रंगकर्म तथा कला की अन्य विद्याओं के विकास के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है ओर इसके लिए कई महत्वपूर्ण पहल की है। इनमें प्रमुख हैं – भारत रंग महोत्सव, बाल संगम, जश्न-ए-बचपन, रविवार क्लब, पूर्वोत्तर नाट्य समारोह और राष्ट्रीय पूर्वोत्तर रंगमंच महोत्सव। प्रो वामन केंद्रे अपनी नियुक्ति के समय से ही शिक्षाविदों, बुनियादी ढांचे, परिसर के सौंदर्यीकरण आदि में सुधार के लिए काम करते रहे हैं। उन्हें लीमा, पेरू में आयोजित जीएटीएस आम सभा में वर्श 2016-17 के लिए एशिया ई मामलों का उपाध्यक्ष भी चुना गया है जो इस संस्थान के लिए एक और गौरव गाथा है।




राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) के बारे में:

राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय दुनिया में प्रमुख थिएटर प्रशिक्षण संस्थानों में से एक है। यह भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त संगठन है। सालों से, संस्थान ने बेहतरीन अभिनेताओं, निर्देशकों, पटकथा लेखकों, तकनीशियनों और शिक्षाविदों को निर्माण किया है जो थिएटर, फिल्म और टेलीविजन में काम करते हुए एक मुकाम दिया है। एनएसडी के पूर्व छात्र पद्म भूषण और पद्म श्री सहित देश में और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई सर्वोच्च सम्मानों से सम्मानित हो चुके हैं। संस्थान भारत रंग महोत्सव (1997 से), जश्न-ए-बचपन, बाल संगम, पूर्वोत्तर नाट्य समारोह और नार्थ ईस्ट थियेटर फेस्टिवल जैसे कई वार्षिक और द्विवार्षिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के थिएटर त्योहारों का आयोजन कराता है। प्रोफेसर वामन केंद्रे 2013 से एनएसडी के निदेशक हैं।

-प्रेस विज्ञप्ति

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