मेरा हमेशा से मानना रहा है कि एग्जिट पोल और ओपिनियन पोल बाजार के तमाशे हैं. हमेशा ये सही नहीं होते और इसमें छेड़छाड़ की बेहद ज्यादा गुंजाइश होती है ताकि नतीजे मनमाफिक निकलें.
ऐसा पिछले दो बार से हो रहा है कि एग्जिट पोल गलत साबित हो रहे हैं. मसलन वर्ष 2004 में सभी चैनलों के अनुमान कोरी कल्पना साबित हुए. ज्यादातर टीवी चैनल्स ने एग्जिट पोल में ये अनुमान जताया था कि बीजेपी की सरकार बनेगी और एनडीए को 284 या इससे ज्यादा सीटें दी थीं. पर एनडीए को मिलीं महज 189 सीटें।
यूपीए के लिए 150 से 165 सीटों तक का अनुमान था लेकिन उसे इससे बहुत ज्यादा 222 सीटें मिलीं।
इसी तरह 2009 में बीजेपी की अगुवाई वाले एनडीए को 175-195 सीटें आने की बात कही जा रही थी लेकिन उसे सिर्फ 159 सीटें ही मिलीं. यहां भी यूपीए की ताकत को कम आंका गया था और उसे 180-215 सीटें मिलने की बात कही गई थी लेकिन यूपीए को उम्मीद से कहीं ज्यादा यानी 262 सीटें मिलीं और उसने सरकार बना ली. बीजेपी फिर मुंह ताकते रह गई.
अब आज के हालात पर गौर करें. नरेंद्र मोदी की लहर नहीं, सूनामी है. हर चैनल पर मोदी का इंटरव्यू चल रहा है. चैनल वाले उनसे 30 से लेकर 50 और 100-100 तीखे सवाल पूछ-दिखा रहे हैं. राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल और बाकी क्षेत्रीय पार्टियों के नेता सीन में कहीं नहीं दिख रहे. सो....
ये लाजिमी है कि आज शाम 5 बजे से टीवी चैनलों पर जो एग्जिट पोल्स आएंगे, उसमें नरेंद्र मोदी की लहर का असर दिखेगा. हो सकता है कि कुछ चैनल्स फिर ये बता दें कि एनडीए को पूर्ण बहुमत आ रहा है.
लेकिन मेरा ये मानना है कि देश के मिजाज को समझना ओपिनियन और एग्जिट पोल्स वालों के वश की बात नहीं. यहां तो वोटर अंदर ईवीएम मशीन पर ठप्पा किसी और निशान पे लगाता है और बाहर आकर कुछ और बोलता है. सबको अपनी निजता प्यारी है (कुछेक अंधभक्त नेता समर्थकों को छोड़कर). सो एग्जिट पोल्स के आंकड़ों पर मत जाइएगा. अपनी अक्ल लगाइएगा.
ये ठीक है कि कांग्रेस के खिलाफ पूरे देश में गुस्सा है, जिसका फायदा बीजेपी को होगा लेकिन ये भी सत्य है कि राज्यों की क्षेत्रीय पार्टियों को भी ये फायदा उतना ही मिलेगा. अब देख लीजिए कि कितने राज्यों की कितनी क्षेत्रीय पार्टियां एनडीए के साथ है. आप अंदाजा लगा लेंगे कि चुनाव नतीजे आने तक एनडीए की कितनी ताकत होगी.
सो असली खेल तो चुनाव नतीजे आने के बाद 16 तारीख को शुरु होगा. एग्जिट पोल्स को बतौर मनोरंजन देखिए, ये सोचकर कि टीवी के पर्दे पर जो ज्ञान बघार रहे हैं, उनसे ज्यादा जानकारी तो आपके मुहल्ले के चायवाले टीपू, बाल काटने वाले टीकू और आपकी सोसायटी में गाड़ियां साफ करने वाले बहादुर को होती है. जय हो.
(स्रोत-एफबी)
M
Media Khabar
Staff Writer · Media Khabar
