
बतकही : पिछले साल टेलीविजन की भाषा पर एक किताब आयी थी. किताब के लेखक ने शुरूआती लाइनों में ही टेलीविजन की शब्द सीमा 1000 -1500 शब्दों तक में बाँध दी.
उन्होंने लिखा कि यदि आप इतने शब्द जान गए तो समझ लीजिए कि हिंदी के अच्छे टेलीविजन पत्रकार बन गए. हालाँकि ये बेहद विवादास्पद लाइनें हैं. लेकिन कई बार ये लगता है कि शायद सच भी है.
ऐसा हिंदी चैनलों के दिग्गज पत्रकारों के कारण लगता है. वजह इनका एक ही शब्द को बार – बार दुहराना है. ये शब्द इनका तकिया –कलाम बन गए हैं और इनकी आदत में कुछ ऐसे शामिल हो गयी है कि 50 मिनट के कार्यक्रम में एक – डेढ़ दर्जन बार तो बोल ही देते हैं.







