Home Blog Page 67

आखिर अंग्रेजी के किसी संपादक को क्यों याद नहीं किया जाता है : राहुल देव

s p singh 2017
एसपी सिंह स्मृति परिचर्चा में दीप प्रज्वलन

मनीष ठाकुर, वरिष्ठ पत्रकार

एसपी की याद में नौ साल से वैसे पत्रकार परिचर्चा का आयोजन करवाते हैं, जिनने एसपी को कभी आमने सामने ,देखा ही नहीं।मेरे दोस्त पुष्कर पुष्प का यह प्रयास नौ साल से जारी है। ये बात अलग है कि शुरू में एसपी के चेले इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने से भागते थे। उन से यह उम्मीद तो की ही नहीं जा सकती कि जिस एसपी के कारण मात्र से कुछ लोगो की पहचान पत्रकार के रूप में हुई, वे बस अहंकार ही पालते रह गए। उस लायक थे ही नहीं । खुद एसपी की बुनियाद के परजीवी से ज्यादा रहे नहीं ,अपनी साख बचा नहीं पाए ,तो क्या खाक एसपी को याद करते। पिछले साल हम लोगों ने ऐसा आयोजन ( वौइस् ऑफ मुजफ्फरपुर की टीम पुष्कर उस टीम के महत्वपूर्ण हिस्सा है) मुजफ्फरपुर में भी किया था।

खैर, हिंदी पत्रकारिता की जब भी तुलना अंग्रेजी पत्रकारिता से की जाती है तो शिकायत होती है कि हिंदी के पत्रकार ज्यादा जुनूनी होते है, मेहनती होते है, काबिल होते है लेकिन उनकी तनख्वा उनसे बेहद कम होती है,संसद में हिंदी अखवार की प्रति कभी नहीं लहराई जाती है। इस बात की कसक अक्सर हिंदी के पत्रकारों की होती है। आपको भरोसे के साथ कहूँ तो सरकार द्वारा उपलब्ध दस्तावेज़ों की बात यदि आप छोड़ दे तो मैने अक्सर पाया है, देखा है, खुद गवाह रहा हूँ अंग्रेजी अखबार के पत्रकार अक्सर किसी हिंदी अख़बार के एक्सक्लूसिव खबर को अगले दिन छापते है ,एक्सक्लूसिव बनाकर ।चुकी लगभग कोई अंग्रेजी का संपादक हिंदी अख़बार पढ़ता ही नहीं इस लिए उन्हें पता ही नहीं चलता की हिन्दी के अखबार में वो खबर दस दिन पहले छप चूकी है जो उनके रिपोर्टर ने आज एक्सक्लूसिव छापा है। यकीं मानिये जब हम अखबार में थे तो यह साप्ताहिक घटना होती थी। हम कई बार इस बात को लेकर परेशां होते थे ,फिर इसे परिपार्टी पर मज़ा लेकर अपना दर्द हल्का करते थे। मेरे कई पत्रकार साथी इसके गवाह है। जो भले ही इस पर चुप्पी लादे मगर याद कर रहे होंगे।

मतलब सत्ता के नज़दीक रह कर सत्ता के फायदे के लिए, विपक्ष के खिलाफ या फिर इसके उलट प्लांटेड स्टोरी ही अंग्रेज़ी पत्रकारिता की पहचान रही है। क्योंकि सत्ता के शिखर पर वही अखबार पढ़ी जाती है। हाँ टेलीविजन के आने के बाद यह परिपार्टी थोड़ी बदल गई है। बिना संघर्ष के एजेंडा पत्रकार ही सिर्फ अंग्रेजी में रहे शायद यही कारण है कि अंग्रेजी के किसी पत्रकार या संपादक की याद में वो सम्मान नहीं होता जो हर साल प्रभाष जोशी जी की याद में होता है, राजेंद्र माथुर की याद में होता है, सुरेंद्र प्रताप सिंह (sp) की याद में आयोजित किया जाता है। यह सम्मान आज तक किसी अंग्रेजी पत्रकार को नहीं मिल पाया।
समझा जा सकता है सरकार , सत्ता या सत्ता के खिलाफ एजेंडा की पत्रकारिता और जुनूनी पत्रकारिता में क्या अंतर है। तहलका से लेकर एनडीटीवी की पत्रकारिता ने एक वक्त धमक तो खूब जमाया लेकिन कोई नाम लेवा कभी नही रहा। कुछ जेल से लौट कर जमानत पर है कुछ जमानत लेने वाले है।

यह सच है कि अंग्रेजी पत्रकारिता के दवाव में हिंदी की साख भी कमज़ोर हुई। लेकिन हिंदी के ज्यादातर संपादकों के अंदर जो नैतिक बल रहा वो एजेंडा पत्रकारों के अंदर नहीं रहा।शायद यही कारण है कि हिंदी के गौरवपूर्ण संपादक याद किये जाते है। अंगेजी वाले, पैसा,रसूख न जाने क्या क्या तो बना लिया साख नहीं बना पाए । अंग्रेजी के किसी संपादक को यूं याद नहीं किया जाता। राहुल देव जी शायद यही कहना चाहते थे।

manish thakur, journalist
मनीष ठाकुर,वरिष्ठ टीवी पत्रकार

आशुतोष के जीते जी ही उनकी पुरानी पहचान मिट गयी

ashutosh
आशुतोष, नेता, आप (फोटो क्रेडिट : आईबीएन-7)

हमारी यादाश्त कितनी तेजी से खत्म होती जा रही है. पुष्कर ने अपनी वॉल पर एस पी सिंह समारोह की पुरानी तस्वीर लगायी और आशुतोष का जिक्र किया तो हैरानी से एक ने टिप्पणी की- ये तो आम आदमी पार्टी में हैं ?

आशुतोष की आम आदमी पार्टी से जुडने की पहचान अपेक्षाकृत नई है. इसके पीछे बतौर मीडियाकर्मी लंबा अनुभव है. हमारी उंगलियों पर दर्जनों स्टोरी और घटनाएं गिनाने के लिए है.

लेकिन इस टिप्पणीकार के अलावा ऐसे सैकडों ऐसे लोग होंगे जिनके लिए आशुतोष मतलब आम आदमी पार्टी.. नमस्कार मैं आशुतोष और आप देख रहे हैं हमारा कार्यक्रम डंके की चोट पर या फिर कैमरामैन एक्स के साथ मैं आशुतोष, कश्मीर आजतक.

हम जिस दौर में जी रहे हैं, वहां जीते जी जिंदगी का बडा हिस्सा हमसे कट जाता है. ऐसे जैसे पेट्रोल पम्प में हर शख्स के लिए मीटर जीरो पर आकर शुरु होता है. अतीत की लीगेसी साथ नहीं होती. पहले पुरानी पहचान और काम का इतनी तेजी से भुला दिया जाना आसान नहीं हुआ करता था.

एसपी सिंह स्मृति परिचर्चा में अनोखे अंदाज़ में हुआ अतिथियों का स्वागत

supriya prasad litchi
आजतक के चैनल हेड सुप्रिय प्रसाद का लीची से स्वागत करते मीडिया खबर के संपादक पुष्कर पुष्प

पत्रकारिता के महानायक एसपी सिंह अपने बुलेटिन में साहित्य, संस्कृति,गाँव, किसान और उनकी समस्याओं को भी जगह देते थे। उनके बारे में वरिष्ठ पत्रकार बताते हैं कि वे प्रतिदिन अलग-अलग भाषाओँ के कई अखबार पढ़ते थे और दूर-दराज व ग्रामीण पृष्ठभूमि की खबर निकालकर उसपर स्टोरी करवाते थे.वरिष्ठ टीवी पत्रकार दीपक चौरसिया ने भी कई बार ये बात कही है. बहरहाल उनके कार्यक्रम में खेती-किसानी और बाग़-बगीचों को महत्व देते हुए, फूलों की बजाए लीची के गुच्छे से अतिथियों का स्वागत किया गया. इसका उद्देश्य मुजफ्फरपुर की शाही लीची को प्रमोट करना था. लीची बचाओ आंदोलन के तहत इस मुहिम की शुरुआत हुई.

मीडिया खबर डॉट कॉम के संपादक पुष्कर पुष्प सोशल मीडिया लिखते हैं – “मीडिया खबर कॉनक्लेव में वक्ता और अतिथियों का स्वागत लीची से किया गया।। हमने पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से उसे प्लास्टिक के गिफ्ट रैप में पैक भी नहीं कराया।।ये पहल सभी को बहुत पसंद आयी। लीची प्रदेश से होने की वजह से हमारा हृदय भी लीची-लीची हो गया।। ”

वहीँ मीडिया खबर मीडिया कॉन्क्लेव और एसपी सिंह स्मृति परिचर्चा के वक्ता और वरिष्ठ पत्रकार हर्षवर्धन त्रिपाठी लिखते हैं – “ज़्यादातर कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत बुके से ही किया जाता है। पुष्कर पुष्प ने इसमें सुखद बदलाव किया, अतिथियों का स्वागत लीची देकर किया। इससे पहले भी कई जगह कार्यक्रमों में स्वागत पौधे का गमला देकर किया गया। इस साल मिले ऐसे २ गमले मेरी बालकनी में सुशोभित हैं। मुझे लगता है कि कम से कम अकादमिक, शैक्षणिक, साहित्यिक कार्यक्रमों में पुस्तक, पौधे और जिस जगह कार्यक्रम हो, वहाँ की स्थानीय पहचान वाली वस्तु देकर अतिथियों का स्वागत करना सार्थक होता है। प्रभाव भी दीर्घजीवी होता है।”

एसपी सिंह पर डाक टिकट जारी करने की मांग,वरिष्ठ पत्रकारों ने समर्थन में किया हस्ताक्षर

sp singh smriti paricharcha 2017
एसपी सिंह स्मृति परिचर्चा, 2017

पत्रकारिता के महानायक एसपी सिंह की 20 वीं पुण्यतिथि पर इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में हर साल की तरह इस बार भी मीडिया खबर डॉट कॉम द्वारा मीडिया खबर मीडिया कॉन्क्लेव और एसपी सिंह स्मृति परिचर्चा का आयोजन किया गया. इसमें एसपी के साथ काम कर चुके कई वरिष्ठ पत्रकारों ने शिरकत की.

कॉन्क्लेव और परिचर्चा के दौरान मीडिया खबर की तरफ से संचार मंत्रालय से मांग की गयी कि एसपी सिंह पर डाक टिकट जारी किया जाए ताकि उनकी स्मृति को याद रखा जा सके.

मीडिया खबर के इस मांग का समर्थन वहां मौजूद तमाम पत्रकारों ने किया और समर्थन में हस्ताक्षर भी किया. इस संबंध में जल्द ही संचार राज्य मंत्री मनोज सिन्हा से मिलकर उन्हें ज्ञापन सौंपा जाएगा. उस सिलसिले में मीडिया खबर डॉट कॉम के संपादक द्वारा लिखा गया पत्र और हस्ताक्षर अभियान की छायाप्रति –

sp stamp paper manoj sinha
एसपी पर डाक टिकट जारी करने की मांग
postal stamp sp
एसपी सिंह पर डाक टिकट जारी हो, उसके समर्थन में हस्ताक्षर अभियान

बीस साल बाद भी और शिद्दत से याद आते हैं एसपी : राजेश बादल

rajesh badal journalist
राजेश बादल, एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर, राज्यसभा टीवी

राजेश बादल, एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर, राज्यसभा टीवी

रविवार को दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में पहुंचे पत्रकारों ने एस पी याने सुरेंद्र प्रताप सिंह को दिल की गहराइयों से याद किया |मीडिया ख़बर के पुष्कर पुष्प इसके संयोजक थे | नौ साल से पुष्कर एसपी की याद में अपने बूते यह कार्यक्रम करते आ रहे हैं | पुष्कर को सलाम इसलिए कि न उन्होंने एसपी को देखा, न उनके साथ काम किया और न उनकी कोई रिश्तेदारी है |हम जैसों के लिए शर्म का अवसर भी कि दस-बीस बरस एसपी के साथ काम करने,उनके बेहद क़रीब रहने के बाद भी हम यह न कर पाए | आपसी मारकाट में,दिल्ली के दाँवपेंच में,नई पीढ़ी को कोसने और एक दूसरे की नौकरी लेने में लगे हम लोग शायद मंच पर बैठकर मुख्य अतिथि ,विशेष अतिथि और वरिष्ठ पत्रकार कहलाने में अपनी शान समझते हैं | बहरहाल अपने को लानत देते हुए कार्यक्रम की बात |

rajesh badal in sp singh smriti paricharcha
एसपी पी सिंह स्मृति परिचर्चा,2017

इसमें बड़ी संख्या में एसपी के चाहने वाले चिंतक ,विचारक और पत्रकार आए | सबसे पहला नाम जुगनू शारदेय का है ,जिनको हम रविवार में लगातार पढ़ते थे | अपने शब्दों के जादू से बांधकर रखा था उन्होंने | पूरे समय कभी चुप्पी से कभी बेचैनी से अपनी उपस्थिति दर्ज़ कराते रहे | इसके बाद सांसद प्रभात झा,अहमदाबाद से आए साथी धीमंत पुरोहित,क़मर वहीद नक़वी,राहुलदेव,सतीश के.सिंह,सुप्रिय प्रसाद,नीरेंद्रनागर ऑन लाइन के पंडित हर्षवर्धनत्रिपाठी और पुष्पेंद्रपरमार, इंडियन एक्सप्रेस डिज़िटल के सीईओ संदीपअमर,एचसीएल टेक्नॉलोजी के वाइस प्रेजिडेंट अपूर्व चमड़िया, आजतक के सईद अंसारी और सच बताऊँ तो इतने चाहने वाले कि नाम भी कहाँ तक लूँ |

भावुक कर देने वालीं एसपी की यादें छिड़ीं,उनकी निर्भीक,बेबाक और मूल्य आधारित पत्रकारिता का विवेचन हुआ और आज की मीडिया मंडी में सोशल मीडिया,बाज़ार,ऑनलाइन मीडिया के हाल और संभावनाओं पर भी शानदार चर्चा हो गई | कई साल बाद ऐसे किसी आयोजन में गया | एक तकलीफ और कलेजे में ठंडी तीखी फाँस लेकर लौटा | एक-यह कि आज एसपी को अगर नई नस्ल जानना चाहे तो इंटरनेट पर क्या है ? हम लोग खुद कटघरे में खड़े हैं और दो-ऐसे आयोजन दिल्ली में ही होकर क्यों दम तोड़ देते हैं ? दिल्ली में तो देश के पत्रकारों का एक फीसदी भी नहीं है | हम इस तरह के आयोजनों को देश भर में क्यों नहीं फैला सकते ?
चित्र इसी अवसर के हैं |

s p singh 2017
एसपी सिंह स्मृति परिचर्चा में दीप प्रज्वलन
sp singh smriti paricharcha 2017
एसपी सिंह स्मृति परिचर्चा, 2017

सोशल मीडिया पर मीडिया खबर

665,311FansLike
4,058FollowersFollow
3,000SubscribersSubscribe

नयी ख़बरें