राजसमन्द। आज साहित्य और राजनीति के संबंधों को पुनर्परिभाषित करने की जरूरत आ गई है। जहां साहित्य संस्कृति का सबसे बड़ा प्रतिनिधि है वहीं राजनीति संस्कृति का नुक्सान किये बगैर आगे नहीं बढ़ती। पतनशीलता के ऐसे दौर में अभिधा से काम चल ही नहीं सकता। इसीलिए जब शब्द कम पड़ने लगते हैं तब शब्दों को मारना पड़ता है ताकि नए शब्द जन्म ले सकें। उक्त विचार अणुव्रत विश्व भारती राजसमन्द में पुरस्कृत साहित्यकार असग़र वजाहत ने आचार्य निरंजननाथ स्मृति सेवा संस्थान तथा साहित्यिक पत्रिका ‘संबोधन’ द्वारा आयोजित अखिल भारतीय सम्मान समारोह में व्यक्त किये।
सुधीर चौधरी का कलंक धोने आया दामिनी का बॉयफ्रेंड !

जी न्यूज के संपादक सुधीर चौधरी ब्लेकमेलिंग प्रकरण में अभी – अभी जेल की हवा खा कर आये हैं और आजकल फिर सुर्ख़ियों में हैं. लेकिन इस बार वजह कुछ और है. आते ही स्क्रीन पर एक धमाका किया है (ऐसा जी न्यूज और सुधीर चौधरी समझते हैं). धमाका ये हुआ कि सामुहिक दुष्कर्म की शिकार होकर अपनी जान गँवा चुकी दामिनी (काल्पनिक नाम) के बॉयफ्रेंड का इंटरव्यू जी न्यूज पर सुधीर चौधरी ने एक्सक्लूसिव की पट्टी के साथ दिखा दिया.
जी न्यूज से पह्ले किसी भी न्यूज़ चैनल पर इस लड़के का इंटरव्यू या बाईट तक प्रसारित नहीं हुआ था. ऐसा नहीं था कि दूसरे चैनल इस लड़के का इंटरव्यू नहीं ले सकते थे. लेकिन दिल्ली पुलिस के निर्देश, आईबी मिनिस्ट्री की एडवाइजरी और नैतिक दवाब के चलते दामिनी के बॉयफ्रेंड का इंटरव्यू बाकी चैनलों ने करने की कोशिश नहीं की और थाली में परोसकर बॉयफ्रेंड का इंटरव्यू लेने के लिए जी न्यूज़ के सुधीर चौधरी के लिए छोड़ दिया.
जी न्यूज से आजतक, गर्लफ्रेंड की मौत पर शोहरत की इमारत
कहना तो नहीं चाहिए, पर ऐसा लग रहा है, कि 16 दिसंबर की रात बलात्कार की शिकार हुई लड़की के दोस्त को भी अब अपने हिस्से की शोहरत और दौलत चाहिए । उसे भी चस्का लग चुका है चैनलों पर आकर इंटरव्यू देने का ।
ज़ी न्यूज़ के बाद आज ‘आज तक’ वाले उसे अपने यहां ले आए हैं, और सबसे पहले अपने चैनल पर उसका इंटरव्यू दिखाने का दावा भी कर रहे हैं । हां, आज तक ने बेहद सतर्कता दिखाते हुए उसका चेहरा छिपा दिया है, ताकि बलात्कार पीड़िता की पहचान उजागर करने के मामले में वो दिल्ली पुलिस के शिकंजे में ना फंसें ।
लड़का भी ज़ी न्यूज़ में इंटरव्यू की नेट प्रैक्टिस करने के बाद पहले से ज़्यादा कांफिडेंट हो गया है और तेज़ आवाज़ में बातें करने लगा है । हां, उसके गहरी सांसें लेने का अंदाज़ अभी भी वही है । शायद उसे भी अपनी अहमियत का अंदाज़ा हो चुका है ।
देखिए उस लड़के को ‘आज तक’ पर, सुनिए उसे और फ़ैसला कीजिए, कि बलात्कार का बाज़ारीकरण तो नहीं हो रहा अब ख़बरिया चैनलों पर ? कम से कम मुझे तो ऐसा ही लग रहा है, ग़लत भी हो सकता हूं । ( Manoj Vashisth के फेसबुक वॉल से )







नोएडा रेप मामले में मीडिया की मुस्तैदी
नोएडा रेप मामले में मीडिया की मुस्तैदी शानदार उदाहरण है कि कैसे पत्रकारों की कार्यकुशलता और तत्परता से पुलिस और प्रशासन कार्रवाई करने को मजबूर होता है…
काश इज्जतनगर से लेकर इम्फ़ाल तक में होने वाले रेप के मामलों को हमारा तथाकथित नेशनल मीडिया गंभीरता से लेता…काश सीतापुर के पास किसी गांव और बेगूसराय के पास की बस्ती में होने वाले बलात्कारों को लो प्रोफाइल कह कर न गिरा देता…
ख़ैर अभी आंदोलन को लानत भेजने और अपनी पीठ थपथपाने का वक़्त है…प्रोफेशनल और असंवेदनशील मीडिया सोनी सोरी का नाम भी लेना गवारा नहीं करता लेकिन हां दिल्ली में लाठियां खाने वाले आंदोलनकारियों को प्रोफेश्नल ज़रूर मानता है…
अच्छा है, मौका है, निकाल लीजिए खुन्नस…खत्म कर लीजिए कुंठा…हिसाब मांगा जाएगा आप से भी दंतेवाड़ा…कालाहांडी…बस्तर…बुंदेलखंड…सीतापुर…मिर्चपुर…मिदनापुर…सब जगहों का…
तब न्यूज़रूम में स्टोरी को लो प्रोफाइल कहने वालों की झुकी हुई आंखों और तमतमाते चेहरों को भी देखा जाएगा.
(मयंक सक्सेना के फेसबुक वॉल से)