संजय तिवारी,वरिष्ठ पत्रकार-
एक सांसद जी होते थे। हमारी तरफ के ही। उन दिनों अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार थी और राजनाथ सिंह यूपी में बीजेपी के विनाश पर आमादा थे। यूपी में राजनीतिक संकट पैदा हुआ तो बीजेपी ने राम प्रकाश गुप्ता को मुख्यमंत्री बना दिया। राम प्रकाश गुप्ता का सबसे पहला समर्थन माननीय राजनाथ ने ही किया और जैसे ही राम प्रकाश गुप्ता सीएम बने उनके खिलाफ खबरें प्लांट करनी शुरु कर दी। वो तो बाथरुम में ही सो जाते हैं। वो तो सबका नाम ही भूल जाते हैं। एक दिन अपने पीए को ही पूछ लिया कि तुम यहां मेरे पास दिन भर क्यों मंडराते रहते हो। देखते देखते राम प्रकाश गुप्ता मीडिया में मजाक बन गये।
आखिरकार पार्टी को राजनाथ सिंह को सीएम घोषित करके यूपी भेजना ही पड़ा जहां जाकर उन्होंने बीजेपी का पूर्ण विनाश कर दिया। लेकिन जिन दिनों राजनाथ सिंह अपने मिशन पर थे वही सांसद महोदय उनसे मिलने गये। वो राम प्रकाश गुप्ता के करीबी भी थे इसलिए सबकुछ जानते थे। उन्होंने राजनाथ सिंह को खूब फटकार लगाई। राजनाथ मुस्कुराते रहे और दलील देते रहे कि आप लोगों के पास गलत सूचना है। ऐसा मैं क्यों करूंगा। जब वो सीएम बन गये तो सब समझ में आ गया कि ऐसा वो क्यों कर रहे थे।
इसलिए यह जो राजनाथ का नाम उछल रहा है न, तो दावे से कहा जा सकता है कि उनका कहीं कोई नाम नहीं होगा। वो इसी कला की बदौलत बीजेपी के अध्यक्ष और देश के गृहमंत्री बने हैं। ऐसी ऐसी खबरें प्लांट करवाते हैं कि सोचने वाले सोच भी नहीं पाते हैं। मसलन, इस प्लांटेशन में उनके संघ कार्यालय जाने की खबर जरूर होती है। भले ही उन्हें किसी ने बुलाया हो या न बुलाया हो वो चाय पीने ही सही संघ कार्यालय चले जाते हैं और खबर ठेलनेवाले खबर ठेलना शुरु कर देते हैं। इस बार भी यही सब हो रहा है।
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