महाराष्ट्र में गरमाया एट्रोसिटी विवाद राष्ट्रीय मीडिया ने बनाई दूरी

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महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के कोपरडी गाँव में कुछ दिन पहले एक सवर्ण जाती की अल्पवयीन लड़की से सामूहिक बलात्कार करके कुछ असामाजिक तत्वो के दबंगईयो ने बर्बरता से ह्त्या कराई थी। माना जाता है की वे दबंगई दलित समुदाय से तालुक रखते है। पीड़ित लड़की मराठा समुदाय से तालुक रखती है, इसीलिए इस मामले ने महाराष्ट्र के राजनीति में भूचाल आया है। यह मामला इतना गर्माया हुआ है की दलित – मराठा समुदाय एक दूसरे के खिलाफ सोशल मीडिया पर जहर उगल रहे। मराठा स्ट्रांग मैन और एनसीपी के अध्यक्ष शरद पवार के बयांन के बाद इस मसले ने आग में घी डालने का काम किया। शरद पवार ने अपने बयान में कहा था की संसद में पारित राष्ट्रीय कानून प्रीवेंशन ऑफ़ एट्रोसिटी एक्ट – १९८९ का दलितों द्वारा गलत इस्तेमाल हो रहा है जिसे खत्म कर देना चाहिए। किन्तु जब दलित संगठनों ने सोशल मीडिया पर आक्रमकता दिखाई तब शरद पवार ने बयान से पलटी मारी थी। मराठा स्ट्रांग मैन शरद पवार को कट्टर सेक्युलर, प्रोग्रेसिव, माना जाता है। एवम फुले, शाहू, आम्बेडकर के विचारो पर निष्ठ रखने वाले नेताओ में उनका नाम शुमार है। किन्तु मराठा समुदाय से जुड़े विभिन्न संगठन मसलन संभाजी ब्रिगेड, मराठा ब्रिगेड, मराठा क्रांति दल, जिजाऊ ब्रिगेड आदि महाराष्ट्र के कई जिलो में बड़ी तादाद में प्रिवेंशन ऑफ़ एट्रोसिटी एक्ट – १९८९ को लेकर लामबंध हो रहे है। मराठवाड़ा के कई जिलो में लाखो की तादाद मराठा समुदाय धरना, मोर्चा ऑर्गनाइज़ कर रहे।

दूसरी और दलित, आम्बेडकरी समुदाय से जुड़े संगठनों की दलील है की दलित – मराठा समुदाय के बिच कुछ असामाजिक तत्व दरार डाल रहे है। मराठी न्यूज़ चैनल, अखबार इस मसले को लगातार उठा रहे किन्तु नेशनल मीडिया ने संतुलित भूमिका रखते हुए दुरी बनाना बेहतर समझा है।

सुजीत ठमके

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