शोक समाचार : वरिष्ठ पत्रकार राजेन टोडरिया का आज निधन हो गया. दिल का दौरा पड़ने से उनकी मौत हुई. वे महज 56 साल के थे. अपने पत्रकारीय जीवन में उन्होंने दैनिक भास्कर, अमर उजाला आदि कई संस्थानों के साथ काम किया. उनके निधन पर शोक प्रकट करते हुए पत्रकार सुनीता भास्कर अपने एफबी वॉल पर लिखती हैं :
हमारी पीढ़ी के पत्रकारीय गुरु राजेन टोडरिया का दिल का दौरा पढने से असमय निधन.. पैनी धार के पत्रकार,उत्तराखंड की पाक्षिक पत्रिका जनपक्ष आजकल को एक दौर में गढ़वाल में अमर उजाला से भी अधिक रीडरशिप तक पहुंचाने वाला यह योद्धा, उत्तराखंडी जन के हकों के लिए दहाड़ें मारकर लड़ने वाला यह स्तम्भ …रसूल हमजातोव के दागिस्तान सा गर्वीला उत्तराखंड बनाने वाला यह शिल्पी..पहाड़ियों के डीएनए में संघर्ष की ज्वाला जगाने वाला यह असाधारण योद्धा आंदोलनरत छोड़ उत्तराखंड को चुपचाप चल लिया …..उत्तराखंड के पत्रकार, राजनीतिज्ञ सामाजिक लोग सकते में हैं आज,, सदमे मैं हैं…..उत्तराखंड आज खुद को अनाथ महसूस कर रहा…….
बिहार की जनपक्षीय पत्रकारिता को एक विशेष आयाम देने वाले वरिष्ठ पत्रकार श्रीकांत ने दैनिक हिंदुस्तान के विशेष संवाददाता के पद से सेवानिवृति के बाद पत्रकारों, साहित्यकारों के साथ बैठकर अपने अगले और नई पारी पर विमर्श किया। जहाँ लोग किसी सेवा से सेवानिवृति के बाद मुख्य धारा से कट जाते हैं, वहीं यह विमर्श गोष्ठी पत्रकारिता को और मजबूत बनाने की शुरुआत के लिए थी। जैसा कि इस दौरान श्रीकांत ने कहा अब स्वतंत्र रूप से लेखन कार्य जारी रखने की बारी है। किसानों और सामाजिक परिवर्तन के लिए कलम उठाने वाले श्रीकांत कहते हैं कि पत्रकार कभी सेवानिवृत नहीं होता और जहां तक मेरे लेखन का सवाल है, वो बाजारवाद के खिलाफ है। साथ ही त्रिवेणी संघ पर काम चल रहा है और सामाजिक परिवर्तन की लड़ाई जारी रखनी है।
विश्व हिंदू परिषद के अशोक सिंघल अतर्ध्यान थे. मीडिया में कहीं दिख नहीं रहे थे. खबरों से गायब थे. मान लिया गया था कि राम मंदर आंदोलन अस्ताचल की ओर जा रहा है. तभी अचानक से एक नैशनल हिंदी न्यूज चैनल उन्हें रात 10 बजे अपने प्राइम टाइम प्रोग्राम में लेकर प्रकट होता है और अशोक सिंघल को पूरा-पूरा मौका देता है कि एक खास समुदाय के खिलाफ वो जितना विष उगल सकते हैं, उगलें. भावनाएं भड़काएं. राम नाम और हिंदुत्व का राग अलापें.





