सुयश सुप्रभअब देखना यह है कि पत्रकार बंधु अपने अधिकारों के लिए किस सीमा तक संघर्ष कर सकते हैं। दिल्ली में जनसत्ता के बहुत-से पत्रकार मजीठिया आयोग के नियमों को लागू करने की माँग करते हुए इंडियन एक्सप्रेस की बिल्डिंग के सामने धरने पर बैठे हुए हैं। यह जानना भी दिलचस्प होगा कि फ़ेसबुक पर तमाम विमर्शों की अखंड ज्योति जलाए रखने वाले संपादकों की इस मसले पर क्या राय है । बहुत-से संपादक अपने पाठकों को पर्यटन, भोजन जैसे विषयों पर मज़ेदार जानकारी देते रहते हैं। अगर वे वेतन के मसले के लिए थोड़ा समय निकाल लें तो पाठकों और पत्रकारों दोनों का भला होगा। कृपया छपास रोग से पीड़ित पाठक और इस रोग को बनाए रखने वाले संपादक मेरी बात पर ध्यान न दें। इससे उन लोगों का ब्लड प्रेशर ही बढ़ेगा। (स्रोत-एफबी)
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