राजनीति की ललित कलाएं सीख गई हैं सोनिया गांधी

काम तो सभी करते हैं। लेकिन नाम उन्हीं का होता है, जो मुश्किल काम करते हैं। कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी ने अपने जीवन के सबसे मुश्किल काम को आसानी से करते हुए 15 साल पूरे कर लिए हैं। आज उनका नाम है। पूरी दुनिया में है और बहुत चमकदार भी है।पंद्रह साल पहले 1998 में जब उन्होंने पार्टी की बागडोर संभाली थी, तब वे एक मजह सीधी सादी, सरल घरेलू महिला थी। लेकिन जब कुर्सी पर बैठी तो पूरे ठसके के साथ कामकाज संभाला। कांग्रेस अध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज होने के बाद बहुत मुश्किलें बहुत आईं। नहीं आई होती, तो अपने कामकाज के पंद्रह साल पूरे होने पर सोनिया गांधी ने कांग्रेस नेताओं को संबोधित करते हुए यह नहीं कहती कि ‘यह काम आसान नहीं है। लेकिन सोनिया गांधी ने साथ में यह भी कहा कि आप जैसे नेताओं और कार्यकर्ताओं के सहयोग से यह काम कर रही हूं। फिर सबको बधाई भी दी कि असली बधाई के पात्र तो आप लोग हैं, क्योंकि इस सफलता में सहयोग दिया। सोनिया गांधी ने 1998 में कांग्रेस अध्यक्ष की कुर्सी संभाली थी।

 

66 साल की सोनिया गांधी ने जब 127 साल पुरानी इस पार्टी के अध्यक्ष पद को संभाला था और तब से वह लगातार इस पद पर बनी हुई हैं। लगातार सबसे अधिक वक्त तक कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष रहने का रिकॉर्ड भी उनके नाम के साथ जुड़ गया है। और इस नाते कहा जा सकता है कि उन्होंने जवाहर लाल नेहरू और इंदिरा गांधी को भी पीछे छोड़ दिया है। उन्हीं के कार्यकाल में कांग्रेस ने लंबे समय बाद सत्ता में वापसी की और सबसे बड़ी सफलता यह भी कही जा सकती है कि लगातार दूसरी बार भी केन्द्र में कांग्रेस के अगुवाई वाली गठबंधन की सरकार बनाने में वे कामयाब रही है।

सोनिया गांधी यूपीए गठबंधन की अध्यक्ष भी हैं और किसी देश के प्रधानमंत्री के पद को ठुकराने वाली पूरी दुनिया की पहली महिला भी। भले ही इतने साल बाद श्रीमती गांधी अपना भाषण अब भी पढ़कर ही बोलती हैं, या लिखा हुआ ही बांचती हैं। और उच्चारण भी उनके कटरीना कैफ की हिंदी जैसे ही होते हैं, लेकिन उनकी आम सभाओं की आजकल खास बात यह भी होती है कि बीच बीच में लिखे हुए भाषण से नजर हटा कर श्रोताओं से सीधा संवाद भी साध लेती हैं।

बतौर कांग्रेस अध्यक्ष यह श्रीमती सोनिया गांधी का चौथा कार्यकाल है। इस कार्यकाल के लिए वर्ष 2010 में वह निर्विरोध निर्वाचित हुई थीं। उनका कार्यकाल वर्ष 2015 में समाप्त हो रहा है। मतलब साफ है कि भले ही पीएम के पद पर हमारे परम श्रद्धेय सरदारजी मजे मार रहे हैं, और राहुल भैया गली गली घूम घूम कर कांग्रेस को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। पर, दोनों ही अभी उतने दमदार साबित नहीं हुए हैं, जितनी एक अकेली सोनिया गांधी हैं। सो, तय है कि 2014 का अगले लोकसभा चुनाव भी उनकी अगुवाई में ही लड़ा जाना है।

देश के बहुत सारे कांग्रेसी नेता भले ही राहुल गांधी के नाम की माला जपते हैं, पर सीधी और सच्ची बात यही है कि कांग्रेस के पास श्रीमती सोनिया गांधी से ज्यादा बड़ा और जीत सुनिश्चित करवाने वाला कोई दूसरा नेता नहीं है। और ऐसा नहीं है कि सोनिया गांधी को इस बात का आभास नहीं है। सोनिया गांधी अपनी इस महिमा को अच्छी तरह समझ भी रही है। और जाहिर है इसीलिए वे अभी से चुनाव अभियान मुद्रा में आ गयी है। आपने भी देका होगा,  सोनिया गांधी के भाषण इन दिनों खासे चुनावी अंदाज के होने लग गए हैं। इसके पहले कि विरोधी पार्ट्यां महंगाई को मुद्दा बनाएं, खुद सोनिया गांधी मुद्रास्फीति और महंगाई की बात छेड़ते हुए लगे हाथ पाकिस्तान से संबंधों को सभी मुसीबतों का निदान बता कर एक तीर से कई निशाने भी साध लेती है। पीएम के पद पर अपनी अनुपस्थिति में सरदारजी जैसे आदमी को भी देश का अब तक का सबसे काबिल प्रधानमंत्री करार दे देती हैं। सोनिया गांधी वर्तमान में जीने की बहुत मुश्किल राजनैतिक ललित भी कला सीख गई हैं। (लेखक राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार हैं)

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