फिल्म स्टार कोई भगवान नहीं, हिंदी के पत्रकार इंटरव्यू के लिए गिड़गिड़ाते क्यों हैं?

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बृज दुग्गल, टेलीविजन पत्रकार

film-journalism-hindi-journफिल्म पत्रकारिता के एक शानदार और बेहद वरिष्ठ पत्रकार हैं Ajay Brahmatmaj । हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में हिंदी पत्रकारों के साथ होने वाले अपमानजनक बर्ताव को लेकर उनकी टिप्पणी (Tweet) बहुत कुछ सोचने पर मजबूर कर देती है।वो कहते हैं कि फिल्म इंडस्ट्री ,PR इंडस्ट्री के चंगुल में है और इंग्लिश में लिखने वालों के साथ बहुत अच्छा और हिंदी पत्रकारों के साथ अपमानजनक बर्ताव होता है ।हालांकि उनके tweet का जवाब देते हुए अभिषेक बच्चन Abhishek Bachchanने कहा कि वो ऐसा नहीं करते और सबको एक समान नजर से देखते हैं ।

अजय जी फिल्म पत्रकारिता के बहुत वरिष्ठ पत्रकार हैं और यदि वो कह रहे हैं तो यकीनन बात में दम होगा क्योंकि वो मुंबई में हिंदी फिल्मों के गढ़ में पत्रकारिता करते हैं । उनके पास ब्रांड भी बड़ा है-दैनिक जागरण ।

बहरहाल अब मुद्दे की बात पर आते हैं …मैं अक्सर कहता हूं कि फिल्म पत्रकार हमेशा फिल्म स्टार के सामने बिछ जाते हैं । चाहे वो अमिताभ बच्चन Amitabh Bachchan हों या फिर हाल ही में आए वरुण धवन Varun Dhawan जैसे ही पत्रकार उनसे मिलते हैं तो बस उन्हें लगता है कि मानों साक्षात भगवान मिल गए हों । वो उनके साथ फोटो खिंचवाने में अपनी शान समझते हैं । फिर उस फोटो को सोशल मीडिया पर शेयर करके शेखी बघारते हैं ।

सबसे बड़ी दिक्कत यही है …जब तक पत्रकार ये नहीं समझेंगे कि स्टार फिल्म में काम करके पैसा कमाते हैं और वो कोई भगवान नहीं है ।उन्हें भगवान मत बनाइए। कोई एक बार नखरे दिखाए तो आप 10 बार दिखाइए। मत भूलिए ..किंग आप हैं ,फिल्म स्टार नहीं । कोई इंटरव्यू नहीं देता तो गिड़गिड़ाइए मत । शेखी बघारने के लिए तो ये बात ठीक है कि मुझे मत छापिए लेकिन कैसे ये स्टार बगैर प्रेस कवरेज के गिड़गिड़ाते हैं ,ये भी आप जानते ही हैं ।

यही तो पीआर एजेंसियों का खेल है…वो फिल्म स्टार को रहस्य के आवरण में रखना चाहती हैं …सिर्फ गुडी गुडी..आपने कोई तीखा सवाल पूछा नहीं और लग जाती है उन्हें मिर्ची ।

किसी भी स्टार की पूरे साल में सिर्फ दो या तीन फिल्म ही आती होंगी । आपका अखबार रोज छपता है । 1 महीने कवरेज नहीं देंगे तो इनका दिमाग अपने आप ठिकाने आ जाएगा । अब सवाल ये है कि ये होगा कैसे? ये होगा तभी जब पत्रकारों के बीच कुछ ‘जयचंद’ नहीं होगें।

विषय से थोड़ा हट रहा हूं …एक बार एक फिल्म प्रिव्यू के दौरान एक पी आर को मैनें कहते सुना कि ‘अरे वो फिल्म समीक्षक हर फिल्म में मीन मेख निकालता है, किसी भी फिल्म को बढ़िया स्टार नहीं देता ,मैनें उसे फिल्म रिव्यू के लिए बुलाना ही बंद कर दिया ।

बताइए जहां ये स्तर हो,वहां क्या होगा?

ये फिल्म स्टार ,पीआर एजेंसियां ,टीवी न्यूज चैनल और अखबारों का कैसा इस्तेमाल करती हैं जरा इसकी एक बानगी भी देख लिजिए। कोई भी फिल्म करोड़ो में बनती है लेकिन जरा सोचिए कैसे फिल्म का प्रोड्यूसर ,डॉयरेक्टर,पीआर एजेंसियां ,सभी अखबारों और न्यूज़ चैनलों को बेवकूफ बनाकर फ्री में वहां अपनी फिल्म का प्रचार करती हैं । स्टार इंटरव्यू के नाम पर वो अखबारों में एक बड़ा स्पेस और न्यूज़ चैनल में बड़ा स्लॉट हथिया लेती हैं।

एक कहावत है……चित भी इनकी पट भी इनकी और अंटा ……..

अजय जी ,आप फिल्म पत्रकारिता के स्तंभ हैं ,अब जब आपने ये मुद्दा उठा ही दिया है तो रुकिएगा मत ….

चलिए बाकी फिर कभी ….

(स्रोत-एफबी)

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